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Nature & Wildlife


भारत के 'क्रिटिकल मिनरल मिशन' का नया हब बनता मध्य प्रदेश का बैतूल बेल्ट; यूरेनियम के बाद 'ग्राफाइट और वैनेडियम' की खोज NationalCriticalMineralMission, UraniumExplorationIndia, GraphiteAndVanadium
मध्य प्रदेश का बैतूल बेल्ट एक बड़े रणनीतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। इस क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा के प्रमुख स्रोत यूरेनियम (Uranium) के साथ-साथ भविष्य की 'हाई-टेक बैटरियों' और रक्षा उपकरणों में प्रयुक्त होने वाले ग्राफाइट (Graphite) और वैनेडियम (Vanadium) के विशाल भंडार प्रमाणित हुए हैं।


GSI रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश को सौंपे गए 73 नए खनिज ब्लॉक, जानें किस जिले को क्या मिला ! CG-10, MP-4 TENDER (MineralExplorationIndia, ChhattisgarhMineralBlocks, MadhyaPradeshMining)
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में किए गए खनिज अन्वेषण (mineral exploration) की अंतिम तकनीकी रिपोर्ट्स खनिज मंत्रालय को सौंप दी हैं। हाल ही में जारी किए गए नए आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के उत्तर कांकेर में सोने (Gold) के नए ब्लॉक के साथ-साथ मध्य प्रदेश के बैतुल, शिवपुरी, ग्वालियर और टीकमगढ़ जिलों में हीरा (Diamond), तांबा (Copper) और अत्यंत दुर्लभ माने जाने वाले प्लेटिनम ग्रुप ऑफ एलीमेंट्स (PGE) के Exploration License (EL)


अंतराज्यीय खैर तस्करी गिरोह का एक और सदस्य गिरफ्तार: एसटीएफ और शिवपुरी वनमंडल की बड़ी कार्रवाई IllegalPoaching, WildlifeCrimeArrest, KhairSmuggling
वन्यजीव शिकार और खैर वनोपज की अवैध कटाई व तस्करी के खिलाफ जारी अभियान में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) और वनमंडल शिवपुरी की संयुक्त टीम को एक और बड़ी सफलता मिली है। टीम ने बुधवार को मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक और आरोपी भगवान सिंह राजपूत उर्फ भूरा (निवासी ग्राम ऐरावान, जिला शिवपुरी) को उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया है।


बस्तर में 'पर्यावरण की बलि' और बच्चों को 'समर कैंप' का लॉलीपॉप; NMDC और सरकार की दोहरी नीति पर उठे सवाल EnvironmentalJustice, MiningImpact, IndigenousRights
दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले से सरकारी ढिंढोरा पीटने वाली एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने क्षेत्र के आदिवासियों और पर्यावरणविदों को हैरान कर दिया है। एक तरफ जहां बस्तर के जंगलों को उजाड़ने, पहाड़ों को खोदने और पर्यावरण की सरेआम हत्या करने के आरोप झेल रही नवरत्न कंपनी NMDC (राष्ट्रीय खनिज विकास निगम) ने 17 गांवों में आदिवासी बच्चों के लिए 'समर कैंप' शुरू किया है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय जनता इसे सरकार की "जख्म देकर मरहम लगाने" वाली नीति करार दे रही है।


कागजी योजनाओं और समीक्षा बैठकों का दौर: क्या 'जल जीवन 2.0' से बुझेगी गांवों की प्यास या सिर्फ बदलेंगे नाम? WaterScarcitySolutions, RuralWasteManagement, GovernmentInitiativesIndia
देश के ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की किल्लत और कचरा प्रबंधन की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। लेकिन सरकारी गलियारों में अब भी जमीनी सुधार से ज्यादा जोर समीक्षा बैठकों और नए डिजिटल पोर्टल्स पर है। पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS) ने देश भर के 759 से अधिक जिला कलेक्टरों और जिला मजिस्ट्रेटों (DMs) के साथ एक राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा बैठक की।


जमीनी हकीकत से दूर 'सरकारी उत्सव': एक तरफ कट रहे जंगल, दूसरी तरफ पीठ थपथपा रही सरकार DeforestationImpact, DevelopmentVsForests, BiodiversityPolicies
एक तरफ देश में विकास के नाम पर हर साल लाखों पेड़ और घने जंगल काटे जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों और राष्ट्रीय समारोहों में 'जैव विविधता संरक्षण' का उत्सव मनाकर अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त है। भोपाल के भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM) में आयोजित 'अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 2026' के सरकारी कार्यक्रम में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहाँ केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'प्रोजेक्ट चीता' और 'लोकल


आपदा प्रबंधन या सिर्फ डैमेज कंट्रोल? अमित शाह ने की बाढ़ और लू की समीक्षा; जंगलों की कटाई बनी बड़ी चुनौती EnvironmentalConcerns, FloodManagement, HeatWavePreparedness
नई दिल्ली openion: मानसून की दस्तक से पहले केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने संभावित बाढ़ और लू (Heat Waves) से निपटने के लिए 'जीरो कैजुअल्टी' (शून्य जनहानि) का लक्ष्य रखा। हालांकि, सरकार की इन तैयारियों के बीच विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्ट्स में उठ रही जंगलों की अंधाधुंध कटाई की खबरें इस आपदा प्रबंधन की सफलता पर सवालिया निशान खड़ा कर रही हैं।


सतपुड़ा के 'रक्षकों' पर सवाल: चिखली में बेखौफ कुल्हाड़ी और कोयलारी में विस्फोटक धमाके – बेज़ुबानों और जंगल की जान खतरे में IllegalLoggingCrisis, WildlifePoachingImpact, MadhyaPradeshWildlife
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में स्थित सतपुड़ा के घने जंगल आज दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर शाहपुर ब्लॉक के चिखली में 'वन विकास निगम' की नाक के नीचे अवैध कटाई का तांडव जारी है, वहीं दूसरी ओर भौंरा के कोयलारी में शिकारियों के बिछाए 'मौत के जालों' (विस्फोटक गोलों) ने बेज़ुबान गोवंश के चिथड़े उड़ा दिए हैं। ये दोनों घटनाएँ चीख-चीख कर कह रही हैं कि जिले में वन विभाग और कॉर्पोरेशन का इकबाल खत्म हो चुका है।


बैतूल: गोवंश पर विस्फोटक हमले से सनसनी, वन्यजीवों के शिकार की आशंका; NSA लगाने की उठी मांग WildlifeSafety, ExplosiveIncidents, CommunityOutrage
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में स्थित भौंरा थाना क्षेत्र के ग्राम कोयलारी में एक बेहद गंभीर घटना सामने आई है। यहाँ एक स्थानीय डैम के समीप आटे के गोलों में छिपाकर रखे गए बारूद के फटने से 11 गोवंश बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इस घटना ने जहाँ एक ओर क्षेत्र में आक्रोश पैदा कर दिया है, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।


कागजों में सिमटा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’, शाहपुर में माचना नदी और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी का साम्राज्य: प्रशासन की विफलता उजागर PublicHealthHazards, EnvironmentalNegligence, WaterConservationCrisis
शाहपुर नगर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार चल रहे "जल गंगा संवर्धन अभियान" का जमीनी स्तर पर कोई सकारात्मक असर नहीं दिख रहा है। प्रशासन द्वारा जोर-शोर से चलाए जा रहे इस अभियान के बावजूद, शहर के प्रमुख जल स्रोत और सार्वजनिक स्थान गंदगी और प्रदूषण के ढेर में बदल गए हैं। उपलब्ध प्रमाणों (फोटोग्राफ) से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि अभियान केवल कागजी दावों और फोटो सेशन तक सीमित रह गया है, जबकि धरातल पर वास्तविकता अत्यंत चिंताजनक है।
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प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल: हक की आवाज उठाने पर भड़के अफसर, कोर्ट के आदेशों की अनदेखी! Questions raised regarding, administrative accountability, rights of an orphaned girl with disabilities
Editorial: मध्य प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बैतूल जिले के शाहपुर अनुविभाग में एक अनाथ और दिव्यांग बालिका के अधिकारों को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे परिजनों की गुहार और मीडिया की मौजूदगी पर उप-खंड के जिम्मेदार अधिकारी का भड़कना प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर देश की सर्वोच्च अदालत दिव्यांगजनों के संरक्षण और मीडिया की स्वतंत्रता को अनिवार्य मानती है, वहीं मैदानी स्तर पर लोक सेवकों द्वारा सवा


कौशल विकास की आड़ में ; सरकारी मशीनरी, अरबों की संपत्ति और गरीब छात्रों की छात्रवृत्ति हड़पने का PPP मॉडल!A nationwide PPP model, that misappropriates government machinery, assets worth billions,
सवाल : क्या मध्य प्रदेश में नियमों को ताक पर रखकर 16 उत्कृष्ट आदिवासी आईटीआई को निजी एनजीओ 'परम फाउंडेशन' के हवाले करने की तैयारी; देश भर के वंचित युवाओं के तकनीकी भविष्य पर गहराता संकट नहीं ?


अपमान से लेकर अनाथ-दिव्यांग बालिका को प्रवेश न देने तक, गहराया प्रशासनिक सिंडिकेट का खेल! After Alleged Protocol Breach of MLA, Orphan Specially Abled Girl Denied Admission, BEO Accused of Intimidatio
इस पूरे मामले ने बैठक में उठे उन सवालों को और पुख्ता कर दिया है, जिसे अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य मंगल सिंह धुर्वे द्वारा सोशल मीडिया पर तस्वीरें जारी कर उजागर किया गया था। बैठक में नियमों को ताक पर रखकर भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष मनीष कुमरे, भौरा स्कूल के शिक्षक पंकज मालवीय और जनपद सदस्य पति सूर्यकांत मर्सकोले को अग्रिम पंक्ति में बैठाया गया था।


आईटीआई के निजीकरण के विरोध में उठी आवाज: जनप्रतिनिधियों ने भी निर्णय को बताया नियमों के विरुद्धVoices Rise Against Privatization of ITIs, Hundreds of Students March, 8 km to Submit Memorandum
(बैतूल): बैतूल जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र शाहपुर (कुंडी) एवं भीमपुर स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) को निजी गैर-सरकारी संगठन (NGO) 'परम फाउंडेशन' को सौंपे जाने के निर्णय का विरोध तेज हो गया है। विद्यार्थियों के जमीनी आंदोलन के साथ-साथ अब जनप्रतिनिधियों और संवैधानिक आयोगों ने भी शासन के इस कदम पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विपरीत बताया है।


समृद्ध किसान, सशक्त मंडी: स्वतंत्रता दिवस पर कृषि उपज मंडी का संकल्प। Prosperous Farmers, Empowered Mandis Agricultural Produce Markets, Pledge on Independence Day
15 अगस्त का यह ऐतिहासिक दिन हमें देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर शहीदों के महान बलिदानों की याद दिलाता है। आजादी का यह पर्व हमें आत्मचिंतन और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी को और मजबूत करने का अवसर देता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी ने कहा था कि "देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों और खलिहानों से होकर गुजरता है।" हमारा देश तभी सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बन सकता है, जब देश का पेट भरने वाला हमारा किसान भाई आर्थिक
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