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सतपुड़ा के 'रक्षकों' पर सवाल: चिखली में बेखौफ कुल्हाड़ी और कोयलारी में विस्फोटक धमाके – बेज़ुबानों और जंगल की जान खतरे में IllegalLoggingCrisis, WildlifePoachingImpact, MadhyaPradeshWildlife

  • May 7
  • 3 min read

बैतूल (शाहपुर/भौंरा) | (GAMĀKI JOURNAL™)

विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट: राजकमल गुप्ता, GAMAKI MEDIA

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में स्थित सतपुड़ा के घने जंगल आज दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर शाहपुर ब्लॉक के चिखली में 'वन विकास निगम' की नाक के नीचे अवैध कटाई का तांडव जारी है, वहीं दूसरी ओर भौंरा के कोयलारी में शिकारियों के बिछाए 'मौत के जालों' (विस्फोटक गोलों) ने बेज़ुबान गोवंश के चिथड़े उड़ा दिए हैं। ये दोनों घटनाएँ चीख-चीख कर कह रही हैं कि जिले में वन विभाग और कॉर्पोरेशन का इकबाल खत्म हो चुका है।

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चिखली अपडेट: 2 महीने बाद भी जारी है 'नस्लकुशी', अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला

फरवरी में 'गामकी मीडिया' द्वारा उठाए गए मुद्दों के बावजूद चिखली (मरदानपुर-भतोड़ी वन परियोजना) में अवैध कटाई थमी नहीं है। ताजा तथ्यों के अनुसार, यहाँ अब भी पुराने सागौन के पेड़ों को अवैध रूप से ज़मींदोज़ किया जा रहा है।

  • पूर्व सरपंच का गंभीर आरोप: पूर्व सरपंच एवं वर्तमान वन समिति अध्यक्ष रामकिशोर उइके का कहना है कि "अधिकारी और कर्मचारी मिलकर पूरे जंगल के विनाश की पटकथा लिख चुके हैं। महुआ, गुल्ली और चिरौंजी के पेड़ आदिवासियों के लिए रोज़गार का जरिया हैं, जिसे प्रशासन अपने पैरों तले रौंद रहा है।"

  • अधिकारियों की चुप्पी: मामले में जब गामकी मीडिया ने DFO कॉर्पोरेशन (9754281812) से संपर्क किया, तो उन्होंने केवल 'दिखवाने' की बात कही, लेकिन 3 दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, DM कॉर्पोरेशन एसपी शाक्य ने भी मामले से पल्ला झाड़ लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के चौकीदार रात-रात भर पेड़ कटवाकर साक्ष्य मिटा रहे हैं।

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कोयलारी त्रासदी: शिकारियों की साजिश में 11 गोवंश प्रभावित, 3 की मौत

जहाँ चिखली में पेड़ कट रहे हैं, वहीं भौंरा थाना क्षेत्र के कोयलारी में शिकारियों के आतंक ने दिल दहला दिया है। कोयलारी पंचायत के कछार इलाके में एक डैम के पास आटे के गोलों में छिपाकर रखे गए बारूद के फटने से 11 गोवंश गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं।

  • दर्दनाक हादसा: धमाके में 3 गोवंश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 8 अन्य बुरी तरह घायल हैं।

  • शिकार की आशंका: सतपुड़ा बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष आदिल खान ने इसे वन्यजीव शिकार की बड़ी साजिश बताया है। उनका कहना है कि यह विस्फोटक सामग्री वन्यजीवों के लिए बिछाई गई थी।

  • PFA की चेतावनी: PFA नई दिल्ली के सदस्य राजकमल गुप्ता ने बताया कि सतपुड़ा के इन क्षेत्रों में अवैध कटाई और पोचिंग (शिकार) लंबे समय से जारी है। उन्होंने प्रशासन से संभावित आरोपियों को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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प्रशासनिक जवाबदेही: क्या सिर्फ 'नजर रखना' काफी है?

इस पूरे मामले में SDO उत्तम सिंह सरत्या का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है और इसकी विस्तृत जाँच की जा रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब चिखली में भ्रष्टाचार की शिकायतें महीनों से लंबित हैं और कोयलारी में विस्फोटक सरेआम बिछाए जा रहे हैं, तो पुलिस बल, राजस्व विभाग और वन विभाग का खुफिया तंत्र क्या कर रहा था?

गामकी मीडिया के 5 तीखे सवाल:

  1. DFO और DM कॉर्पोरेशन को शिकायत मिलने के बावजूद 3 दिनों तक दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या भ्रष्टाचार को मूक सहमति दी जा रही है?

  2. जब नियमों के अनुसार वन सुरक्षा समिति की अनुमति अनिवार्य है, तो आदिवासियों की आजीविका (महुआ, चिरौंजी) को क्यों नष्ट किया जा रहा है?

  3. कोयलारी में विस्फोटक बिछाने वाले शिकारी कौन हैं? क्या वन विभाग का गश्ती दल सो रहा था कि इतना बड़ा विस्फोटक जाल बिछा दिया गया?

  4. क्या प्रशासन इन बेज़ुबान गोवंशों की मौत और आदिवासियों के उजड़ते रोज़गार की जिम्मेदारी लेगा?

  5. अगर चिखली के ग्रामीण भूख हड़ताल पर बैठते हैं, तो इसकी पूरी जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी या नहीं?

निष्कर्ष: चिखली के पेड़ों की आह और कोयलारी के बेज़ुबानों का खून, सतपुड़ा की बर्बादी की गवाही दे रहा है। यदि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने जल्द ही कोई बड़ा कदम नहीं उठाया, तो यह आक्रोश सड़कों पर उतरेगा।

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