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आईटीआई के निजीकरण के विरोध में उठी आवाज: जनप्रतिनिधियों ने भी निर्णय को बताया नियमों के विरुद्धVoices Rise Against Privatization of ITIs, Hundreds of Students March, 8 km to Submit Memorandum

  • 5 days ago
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(बैतूल): बैतूल जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र शाहपुर (कुंडी) एवं भीमपुर स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) को निजी गैर-सरकारी संगठन (NGO) 'परम फाउंडेशन' को सौंपे जाने के निर्णय का विरोध तेज हो गया है। विद्यार्थियों के जमीनी आंदोलन के साथ-साथ अब जनप्रतिनिधियों और संवैधानिक आयोगों ने भी शासन के इस कदम पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विपरीत बताया है।

Voices Rise Against Privatization of ITIs, Hundreds of Students March, 8 km to Submit Memorandum

विद्यार्थियों ने 8 किलोमीटर पैदल मार्च निकाल एसडीएम कार्यालय में दिया ज्ञापन

शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था कुंडी (शाहपुर) के लगभग एक सैकड़ा विद्यार्थियों ने संस्था परिसर से शाहपुर स्थित अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम/तहसीलदार) कार्यालय तक लगभग 8 किलोमीटर का पैदल मार्च निकाला। सरकार के इस निर्णय के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विद्यार्थियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि दूरदराज के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं के लिए शासकीय आईटीआई तकनीकी शिक्षा, कौशल संवर्धन और आजीविका का एकमात्र सुलभ माध्यम है। निजी हाथों में संचालन जाने से शुल्क वृद्धि, जटिल प्रवेश प्रक्रिया और कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के तकनीकी शिक्षा से वंचित होने की आशंका गहरा गई है। ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 46 का संदर्भ देते हुए कहा गया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और कमजोर वर्गों के शैक्षणिक व आर्थिक हितों का संवर्धन करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

म.प्र. राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग और विधायक ने भी उठाए गंभीर सवाल

इस मामले में म.प्र. राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य मंगल सिंह धुर्वे तथा क्षेत्रीय विधायक (घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 132) गंगा सज्जन सिंह उईके ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं तकनीकी शिक्षा व कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल को औपचारिक पत्र भेजकर स्थानांतरण प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है।

जनप्रतिनिधियों एवं आयोग द्वारा भेजे गए पत्रों के प्रमुख आधार:

  1. शासन के नीतिगत नियमों का उल्लंघन: तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के मूल नियमों (संदर्भ पत्र क्र. एफ -15-2/2022/42-2) के अनुसार, पीपीपी (PPP) मोड या निजी एनजीओ को केवल वही संस्थाएं सौंपी जानी थीं जहां:

    • 3 या 3 से कम ट्रेड संचालित हों।

    • प्रवेश दर (नामांकन) अत्यंत कम हो।

    • प्लेसमेंट की स्थिति कमजोर हो।

    • प्रत्येक जिले से अधिकतम एक आईटीआई का ही हस्तांतरण होना था।

  2. बैतूल जिले में पहले ही हो चुका है एक संस्था का हस्तांतरण: जिले के घोड़ाडोंगरी विधानसभा अंतर्गत शासकीय आईटीआई घोड़ाडोंगरी को वर्ष 2023 में पहले ही परम फाउंडेशन को सौंपा जा चुका है। ऐसे में उसी जिले व विधानसभा क्षेत्र की एक अन्य उत्कृष्ट संस्था (शाहपुर) को दोबारा निजी एनजीओ को देना नियमों का खुला उल्लंघन है।

  3. शाहपुर आईटीआई का उत्कृष्ट प्रदर्शन और 9.8 की डीजीटी ग्रेडिंग: शासकीय आईटीआई शाहपुर एक पूर्णतः सक्रिय और उत्कृष्ट प्रदर्शन वाली संस्था है:

    • यहाँ वर्तमान में कुल 6 ट्रेड (इलेक्ट्रीशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट-COPA, वेल्डर, फिटर, मैकेनिकल डीजल एवं ड्रोन टेक्नीशियन) संचालित हैं, जिनमें से 3 ट्रेड एनसीवीटी (NCVT) से मान्यता प्राप्त हैं।

    • वर्तमान में संस्था में 208 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

    • डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग (DGT) द्वारा इस संस्थान को 9.8 की उच्च ग्रेडिंग प्राप्त है, जो इसके बेहतर प्रदर्शन और गुणवत्ता का स्पष्ट प्रमाण है।Voices Rise Against Privatization of ITIs, Hundreds of Students March, 8 km to Submit Memorandum

प्रमुख मांगें

ज्ञापन और आधिकारिक पत्रों के माध्यम से शासन व प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:

  • शासकीय आईटीआई शाहपुर (कुंडी) एवं भीमपुर को परम फाउंडेशन या किसी भी निजी संस्था को हस्तांतरित करने का आदेश तत्काल निरस्त किया जाए।

  • मध्य प्रदेश की आदिवासी बाहुल्य 16 शासकीय आईटीआई के निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

  • संस्थाओं का संचालन, प्रबंधन और जवाबदेही पूर्णतः शासकीय नियंत्रण में रखी जाए तथा आधुनिक मशीनरी, नियमित प्रशिक्षक और उच्च स्तरीय रोजगारपरक अवसर उपलब्ध कराकर इन्हें उन्नत कौशल विकास केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।



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