आपदा प्रबंधन या सिर्फ डैमेज कंट्रोल? अमित शाह ने की बाढ़ और लू की समीक्षा; जंगलों की कटाई बनी बड़ी चुनौती EnvironmentalConcerns, FloodManagement, HeatWavePreparedness
- May 11
- 2 min read
नई दिल्ली openion: मानसून की दस्तक से पहले केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने संभावित बाढ़ और लू (Heat Waves) से निपटने के लिए 'जीरो कैजुअल्टी' (शून्य जनहानि) का लक्ष्य रखा। हालांकि, सरकार की इन तैयारियों के बीच विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्ट्स में उठ रही जंगलों की अंधाधुंध कटाई की खबरें इस आपदा प्रबंधन की सफलता पर सवालिया निशान खड़ा कर रही हैं।

बैठक की बड़ी बातें: तकनीक और सतर्कता पर जोर
अमित शाह ने निर्देश दिया कि आपदाओं का सामना करने के लिए मौसम विभाग के पूर्वानुमानों को 3 दिन से बढ़ाकर 7 दिन पहले ही सटीक किया जाए।
खतरे में हिमालयी राज्य: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों में कम से कम 60 ऐसी झीलों की पहचान की गई है जो कभी भी विनाशकारी बाढ़ का कारण बन सकती हैं। इनके लिए 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' विकसित किया जाएगा।
राज्यों में विशेष टीमें: देश के हर राज्य में 'बाढ़ संकट प्रबंधन दल' (FCMTs) का गठन होगा।
खेती और लू: लू के प्रकोप से खेती को बचाने के लिए जिला और नगर निगम स्तर पर सख्त दिशा-निर्देश लागू करने को कहा गया है।
EnvironmentalConcerns, FloodManagement, HeatWavePreparedness
विश्लेषण: प्रकृति का विनाश और सरकारी 'चेक डैम'
एक तरफ सरकार पानी बचाने के लिए 'चेक डैम' बनाने और भूजल स्तर सुधारने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर देश के विभिन्न हिस्सों से आ रही जंगलों की कटाई की खबरें इस लक्ष्य को मुश्किल बना रही हैं।
मिटते जंगल, बढ़ती बाढ़: जंगल बारिश के पानी को रोकने के लिए 'प्राकृतिक स्पंज' का काम करते हैं। पेड़ों के कटने से मानसून का पानी अब सीधे ढलानों से बहकर शहरों में बाढ़ का कारण बन रहा है।
कंक्रीट का जंगल और हीट वेव: बैठक में लू (Heat Wave) से बचने की रणनीति बनाई गई, लेकिन हकीकत यह है कि पेड़ों की कमी के कारण शहरों का तापमान बढ़ रहा है। केवल आपदा प्रबंधन ऐप बनाने से गर्मी कम नहीं होगी, इसके लिए 'ग्रीन कवर' बचाना अनिवार्य है।
कैम्पा (CAMPA) फंड पर सवाल: अमित शाह ने कैम्पा फंड के इस्तेमाल पर जोर दिया। यह फंड जंगलों की कटाई के बदले पौधारोपण के लिए होता है। लेकिन क्या वर्षों पुराने घने जंगलों की जगह नए पौधे आपदाओं को रोक पाएंगे? यह एक बड़ा सवाल है।
निष्कर्ष
सरकार का 'होल ऑफ गवर्नमेंट' दृष्टिकोण सराहनीय है कि सभी विभाग मिलकर आपदा से लड़ेंगे। लेकिन जब तक विकास के नाम पर जंगलों की कटाई पर लगाम नहीं लगती, तब तक 'जीरो कैजुअल्टी' का सपना केवल कागजी मास्टर प्लान तक ही सीमित रह सकता है। मौसम के बदलते मिजाज से लड़ने के लिए सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि प्रकृति का साथ भी जरूरी है।









