top of page

अपमान से लेकर अनाथ-दिव्यांग बालिका को प्रवेश न देने तक, गहराया प्रशासनिक सिंडिकेट का खेल! After Alleged Protocol Breach of MLA, Orphan Specially Abled Girl Denied Admission, BEO Accused of Intimidatio

  • 3 days ago
  • 3 min read

बैतूल: जनपद पंचायत शाहपुर में जनजाति कार्य विभाग के छात्रावास एवं आश्रमों की रिक्त सीटों पर प्रवेश को लेकर उपजा विवाद अब केवल प्रोटोकॉल उल्लंघन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा विभाग में जड़े जमा चुके एक बड़े प्रशासनिक सिंडिकेट और भ्रष्टाचार के खेल के रूप में सामने आ गया है। हाल ही में संपन्न हुई प्रवेश समिति की बैठक में जहां एक ओर अधिकृत प्राचार्यों को दरकिनार कर 'बिन बुलाए मेहमानों' और रसूखदारों को कुर्सियां सौंपी गईं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय आदिवासी महिला विधायक गंगा सज्जन सिंह को बैठने तक की व्यवस्था न देकर अपमानित किया गया था। इस सियासी संग्राम के बाद अब इस सिंडिकेट का सबसे अमानवीय चेहरा भी बेनकाब हो गया है—जहां नियमों की दुहाई देने वाले अधिकारियों ने एक अनाथ व दिव्यांग बालिका को दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया है।

After Alleged Protocol Breach of MLA, Orphan Specially Abled Girl Denied Admission, BEO Accused of Intimidatio

अपात्रों को तवज्जो, अनाथ-दिव्यांग छात्रा बाहर; BEO पर धमकी देने का आरोप: बैठक में तय समयावधि (30 जून) के 15 दिन बाद तक चयन सूची को जानबूझकर सार्वजनिक न करने का सच अब सामने आ गया है। खकरा कोयलारी (तहसील घोड़ाडोंगरी) निवासी आशिका वरकड़े (पिता स्व. जगदीश वरकड़े), जो अनाथ होने के साथ-साथ दिव्यांग भी है, उसने कन्या उत्कृष्ट छात्रावास शाहपुर में प्रवेश हेतु आवेदन किया था। बालिका के अभिभावक गोविन्द उइके (निवासी कुण्डी, तहसील शाहपुर) के अनुसार, उन्होंने बालिका का दाखिला शासकीय कन्या उत्कृष्ट विद्यालय शाहपुर में इसलिए कराया था क्योंकि विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने प्राथमिकता के आधार पर छात्रावास में प्रवेश दिलाने का भरोसा दिया था।

किंतु महीनों तक गुमराह करने के बाद अंततः प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया गया। दिनांक 19 अगस्त 2026 को जब पालक जानकारी लेने बीईओ कार्यालय पहुंचे, तो बीईओ ने समाधान निकालने के बजाय उल्टा दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दे डाली।

आवेदक के अनुसार अधिकारी ने कहा— “तुम मुझ पर दबाव बना रहे हो, मैं तुम्हारी एफ.आई.आर. करवा दूंगा। नहीं तो तुम मेरी एफ.आई.आर. कर दो।” छात्रावास न मिलने के कारण बालिका की पढ़ाई बाधित होने की कगार पर है।

एसडीएम और थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज: अधिकारी के इस रवैये के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने दिनांक 19 अगस्त 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (SDM) शाहपुर और थाना प्रभारी शाहपुर को लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है। आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि यदि बालिका को प्रवेश नहीं मिला, तो मामले को सीधे जिला कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

रसूखदारों की दखलंदाजी और प्रशासनिक गठजोड़: इस पूरे मामले ने बैठक में उठे उन सवालों को और पुख्ता कर दिया है, जिसे अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य मंगल सिंह धुर्वे द्वारा सोशल मीडिया पर तस्वीरें जारी कर उजागर किया गया था। बैठक में नियमों को ताक पर रखकर भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष मनीष कुमरे, भौरा स्कूल के शिक्षक पंकज मालवीय और जनपद सदस्य पति सूर्यकांत मर्सकोले को अग्रिम पंक्ति में बैठाया गया था।

  • पूर्व मंडल अध्यक्ष का पक्ष: वहीं, बैठक में अपनी उपस्थिति को लेकर भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष ने 'Gamaki Media' से चर्चा में कहा कि उनकी उपस्थिति का मुख्य उद्देश्य अनाथ बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में शासन की योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से दिलवाना था।

  • शिक्षक की संदिग्ध भूमिका: सूत्रों के मुताबिक, भौरा स्कूल के शिक्षक पंकज मालवीय—जो पूर्व में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS) में लैब असिस्टेंट जो अपने शासकीय पद के विपरीत कार्यों मे संलिप्त रहे हैं—वे बीईओ जी.आर. बर्डे के बेहद करीबी माने जाते हैं। प्राचार्यों को दरकिनार कर ऐसे कर्मचारियों को बैठक में शरण देना और प्रवेश सूची को अपारदर्शी रखना मिलीभगत की ओर इशारा करता है। After Alleged Protocol Breach of MLA, Orphan Specially Abled Girl Denied Admission, BEO Accused of Intimidatio

जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश, BEO को हटाने की मांग तेज: मामले में जनपद सदस्य सुधीर नायक ने भी मोर्चा खोलते हुए कहा था कि जब कलेक्टर स्वयं जमीनी स्तर पर व्यवस्था सुधार रहे हैं, तब बीईओ द्वारा पूर्व सूचना के बावजूद क्षेत्रीय विधायक के प्रोटोकॉल को हवा में उड़ाना घोर निंदनीय है। उन्होंने 11वीं कक्षा के सुदूर ग्रामीण छात्रों को भी हॉस्टल सुविधा देने की मांग उठाई थी।

बीईओ जी.आर. बर्डे की कार्यप्रणाली और मनमाने रवैये को लेकर शिक्षक संघों और जनप्रतिनिधियों द्वारा पहले ही जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटाने की मांग की जा चुकी है। अधिकारियों का सिंडिकैट को संरक्षण : इस पूरे मामले मे एक गंभीर बात सामने आई है की पूर्व से महिला उत्पीड़न के आरोपी और सेवापुस्तिका कांड के मुख्य जवावदेह वर्तमान बी ई ओ को प्रशासन मे बैठे सक्षम अधिकारियों का सीधा संरक्षण प्राप्त है, हालाकी इसी ब्लॉक मे कार्य कर चुके एक अधिकारी का कहना है की बी ई ओ एक सिंडिकेट का मात्र एक हिस्सा है। जब पीड़ित परिवार ने आदिवासी विकलांग बच्ची को लेकर S.D.M. से शिकायत की तो मामले को ठंडे बस्ते मे डाल दिया गया वहीं, जनजातीय कार्य विभाग सहायक आयुक्त द्वारा भी इस मामले को लेकर ढीला रवैया अपनाते हुए मामले की जांच का कहते हुए अपना पल्ला झाड लिया गया ।



Top Stories

1/15
bottom of page