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Madhya Pradesh
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प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल: हक की आवाज उठाने पर भड़के अफसर, कोर्ट के आदेशों की अनदेखी! Questions raised regarding, administrative accountability, rights of an orphaned girl with disabilities
Editorial: मध्य प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बैतूल जिले के शाहपुर अनुविभाग में एक अनाथ और दिव्यांग बालिका के अधिकारों को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे परिजनों की गुहार और मीडिया की मौजूदगी पर उप-खंड के जिम्मेदार अधिकारी का भड़कना प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर देश की सर्वोच्च अदालत दिव्यांगजनों के संरक्षण और मीडिया की स्वतंत्रता को अनिवार्य मानती है, वहीं मैदानी स्तर पर लोक सेवकों द्वारा सवा


कौशल विकास की आड़ में ; सरकारी मशीनरी, अरबों की संपत्ति और गरीब छात्रों की छात्रवृत्ति हड़पने का PPP मॉडल!A nationwide PPP model, that misappropriates government machinery, assets worth billions,
सवाल : क्या मध्य प्रदेश में नियमों को ताक पर रखकर 16 उत्कृष्ट आदिवासी आईटीआई को निजी एनजीओ 'परम फाउंडेशन' के हवाले करने की तैयारी; देश भर के वंचित युवाओं के तकनीकी भविष्य पर गहराता संकट नहीं ?


अपमान से लेकर अनाथ-दिव्यांग बालिका को प्रवेश न देने तक, गहराया प्रशासनिक सिंडिकेट का खेल! After Alleged Protocol Breach of MLA, Orphan Specially Abled Girl Denied Admission, BEO Accused of Intimidatio
इस पूरे मामले ने बैठक में उठे उन सवालों को और पुख्ता कर दिया है, जिसे अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य मंगल सिंह धुर्वे द्वारा सोशल मीडिया पर तस्वीरें जारी कर उजागर किया गया था। बैठक में नियमों को ताक पर रखकर भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष मनीष कुमरे, भौरा स्कूल के शिक्षक पंकज मालवीय और जनपद सदस्य पति सूर्यकांत मर्सकोले को अग्रिम पंक्ति में बैठाया गया था।


आईटीआई के निजीकरण के विरोध में उठी आवाज: जनप्रतिनिधियों ने भी निर्णय को बताया नियमों के विरुद्धVoices Rise Against Privatization of ITIs, Hundreds of Students March, 8 km to Submit Memorandum
(बैतूल): बैतूल जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र शाहपुर (कुंडी) एवं भीमपुर स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) को निजी गैर-सरकारी संगठन (NGO) 'परम फाउंडेशन' को सौंपे जाने के निर्णय का विरोध तेज हो गया है। विद्यार्थियों के जमीनी आंदोलन के साथ-साथ अब जनप्रतिनिधियों और संवैधानिक आयोगों ने भी शासन के इस कदम पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विपरीत बताया है।


समृद्ध किसान, सशक्त मंडी: स्वतंत्रता दिवस पर कृषि उपज मंडी का संकल्प। Prosperous Farmers, Empowered Mandis Agricultural Produce Markets, Pledge on Independence Day
15 अगस्त का यह ऐतिहासिक दिन हमें देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर शहीदों के महान बलिदानों की याद दिलाता है। आजादी का यह पर्व हमें आत्मचिंतन और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी को और मजबूत करने का अवसर देता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी ने कहा था कि "देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों और खलिहानों से होकर गुजरता है।" हमारा देश तभी सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बन सकता है, जब देश का पेट भरने वाला हमारा किसान भाई आर्थिक
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