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अंतराज्यीय खैर तस्करी गिरोह का एक और सदस्य गिरफ्तार: एसटीएफ और शिवपुरी वनमंडल की बड़ी कार्रवाई IllegalPoaching, WildlifeCrimeArrest, KhairSmuggling

  • May 27
  • 2 min read

वन्यजीव शिकार और खैर वनोपज की अवैध कटाई व तस्करी के खिलाफ जारी अभियान में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) और वनमंडल शिवपुरी की संयुक्त टीम को एक और बड़ी सफलता मिली है। टीम ने बुधवार को मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक और आरोपी भगवान सिंह राजपूत उर्फ भूरा (निवासी ग्राम ऐरावान, जिला शिवपुरी) को उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया है।

यह आरोपी सामान्य वनमंडल शिवपुरी के वन परिक्षेत्र सतनवाड़ा में 7 मई 2025 को दर्ज किए गए वन अपराध के मामले में वांछित था। इस संगठित गिरोह के सरगना को पहले ही सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

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मुख्य सरगना की पहले ही हो चुकी है गिरफ्तारी

इससे पहले एसटीएसएफ ने अपने मुखबिर तंत्र की सूचना पर त्वरित छापामार कार्रवाई करते हुए इस अंतर्राज्यीय गिरोह के मुख्य सरगना अनूप यादव (निवासी झांसी, उत्तर प्रदेश) को घाटीगांव, जिला ग्वालियर से गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई में स्थानीय वनमंडल का विशेष सहयोग रहा था।

जांच में हुए बड़े खुलासे:IllegalPoaching, WildlifeCrimeArrest, KhairSmuggling

  • सक्रियता का क्षेत्र: अब तक की विवेचना में यह बात सामने आई है कि यह संगठित अंतर्राज्यीय गिरोह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के शिवपुरी, ग्वालियर और मुरैना जिलों के जंगलों में सक्रिय था।

  • तस्करी का नेटवर्क: गिरोह के सदस्य इन क्षेत्रों से कीमती खैर की अवैध कटाई करते थे और फिर ट्रकों के माध्यम से इसे हरियाणा सहित देश के कई अन्य राज्यों में खपाते थे।

  • कत्था निर्माण में उपयोग: जब्त और तस्कर की जाने वाली वनोपज खैर का मुख्य उपयोग बड़े पैमाने पर पान मसाला और कत्था निर्माण फैक्ट्रियों में किया जाता है।

वर्तमान स्थिति: विभाग द्वारा गिरोह के अन्य नेटवर्क और अवैध व्यापार से जुड़े कड़ियों को खंगालने के लिए मामले की विस्तृत विवेचना (जांच) लगातार जारी है।

आम भाषा में समझें तो यह वही पेड़ है जिससे 'कत्था' बनाया जाता है, जिसे लोग पान में लगाकर खाते हैं।

खैर के पेड़ से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

खैर के पेड़ के तने के अंदरूनी हिस्से (जिसे Heartwood या सार-लकड़ी कहते हैं) को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में उबाला जाता है। उबलने के बाद जो गाढ़ा रस बचता है, उसे सुखाकर कत्था तैयार किया जाता है।

  • पान और गुटखा उद्योग: कत्थे का सबसे बड़ा उपयोग पान मसाला, कत्था और गुटखा फैक्ट्रियों में होता है। यह पान का स्वाद और रंग बदलने का काम करता है।

  • औषधि (Medicine): आयुर्वेद में खैर को त्वचा रोगों (Skin Diseases) के लिए रामबाण माना गया है। इसके अलावा मसूड़ों की सूजन, गले की खराश, दस्त (Diarrhea) और खांसी के इलाज में भी इसका उपयोग होता है।

  • रंगाई और चमड़ा उद्योग (Tanning): इसकी छाल और लकड़ी के रस का उपयोग कपड़ों को रंगने और चमड़े को साफ/मजबूत (Tanning) करने में किया जाता है।

  • मजबूत लकड़ी: इसकी लकड़ी बहुत भारी और मजबूत होती है, इसलिए इस पर दीमक या कीड़े जल्दी नहीं लगते।

इसकी तस्करी क्यों होती है?

चूँकि पान मसाला और कत्था उद्योग बहुत बड़ा है, इसलिए बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले कत्थे और खैर की लकड़ी की डिमांड बहुत ज्यादा और कीमत काफी ऊंची होती है। सरकारी नियमों के मुताबिक बिना अनुमति के खैर के पेड़ों को काटना और परिवहन करना गैरकानूनी है, यही वजह है कि अपराधी गिरोह जंगलों से इसे अवैध रूप से काटकर महंगे दामों में फैक्ट्रियों को बेचते हैं।

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