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Ground Reporting


प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल: हक की आवाज उठाने पर भड़के अफसर, कोर्ट के आदेशों की अनदेखी! Questions raised regarding, administrative accountability, rights of an orphaned girl with disabilities
Editorial: मध्य प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बैतूल जिले के शाहपुर अनुविभाग में एक अनाथ और दिव्यांग बालिका के अधिकारों को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे परिजनों की गुहार और मीडिया की मौजूदगी पर उप-खंड के जिम्मेदार अधिकारी का भड़कना प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर देश की सर्वोच्च अदालत दिव्यांगजनों के संरक्षण और मीडिया की स्वतंत्रता को अनिवार्य मानती है, वहीं मैदानी स्तर पर लोक सेवकों द्वारा सवा
18 hours ago5 min read


मध्यप्रदेश वन विभाग में रेंजर के तबादले पर विवाद: APCCF को सौंपी गई याचिका-दस्तावेजों की जांच रिपोर्ट, MPFOREST, ADMINISTRATIVE LOOPHOLE, MP GOVT ISSUES,
मध्यप्रदेश वन विभाग के उत्तर वन मंडल बैतूल अंतर्गत सारनी वन परिक्षेत्र (रेंज) के रेंजर शारदेन्दु नायक के स्थानांतरण आदेश का लंबे समय बाद भी पालन न होने का मामला अब राज्य स्तर पर प्रशासनिक गलियारों में तूल पकड़ता जा रहा है। वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता आदिल खान ने अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (APCCF - प्रशासन-2), मध्यप्रदेश वन विभाग, भोपाल को साक्ष्यों सहित एक विस्तृत शिकायती पत्र प्रस्तुत किया है।
Jul 277 min read


सच दिखाने पर पत्रकार को धमकी; पत्रकार कल्याण परिषद ने खोला मोर्चा, एसपी के नाम एसडीओपी को सौंपा ज्ञापन PressFreedom, JournalistSafety, PoliticalInterference
बैतूल। शाहपुर क्षेत्र में पत्रकारिता और सच की आवाज को दबाने के प्रयास का एक गंभीर मामला सामने आया है. कृषि उपज मंडी में चल रही कथित अनियमितताओं और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने वाले Gamki Media Pvt Ltd के एडिटर एवं साँझवीर टाइम्स के पत्रकार आशीष राठौर के साथ बदसलूकी करने, मां-बहन की गालियां देने और अनुसूचित जाति/जनजाति (ST/SC Act) के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने का सनसनीखेज मामला शाहपुर थाने तक पहुंच चुका है.
Jun 293 min read
जनगणना 2026 और आदिवासी अस्मिता: 'सरना कोड' की आड़ में धर्मांतरण का दीर्घकालिक चक्रव्यूह या राजनीतिक बिसात? TribalIdentity, SarnaCodeDebate, Census2026Implications
विशेष रिपोर्ट: झारखंड की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में इन दिनों एक नई बहस चरम पर है। यह बहस है—आगामी जनगणना, सरना धर्म कोड की मांग और जनगणना फॉर्म में मौजूद 'ORP' (अदर रिलिजन एंड परसुएशंस) का कॉलम। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ग्राउंड जीरो पर काम कर रहे उरांव जनजाति के प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश उरांव ने कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। संथाल परगना के जनजातीय समाज के बीच काम करने वाले कैलाश उरांव का मानना है कि 'सरना कोड' और 'ORP' की आड़ में आदिवासियों को उनकी सनातनी ज
Jun 287 min read


Ground Report: Administrative Neglect Leaves Korku Tribe in Bhind-Gohad Facing Civil Crisis.KorkuTribeStruggles, BasicFacilitiesCrisis, TribalRightsIndia
Despite various welfare claims made by the Madhya Pradesh government regarding tribal development and empowerment, a recent ground investigation conducted between May 12 and May 15, 2026, reveals a starkly different reality in Bhind district. The Korku tribe residing in the Bhind district and Gohad tehsil continues to endure severely substandard living conditions with near-zero access to basic amenities. Highlighting this administrative oversight, the local administration has
May 293 min read


Ground Report: Gond Tribal Families Face Forced Displacement and Neglect in Bhind Despite Valid Land Titles! GondTribalRights, GovernmentNegligence, RuralJustice
Bhind (Madhya Pradesh) | Special Coverage by Rajkamal Gupta (Gamaki Media & Aabadi Ki Goonj)
A highly concerning ground report has emerged from the Mau tehsil of Bhind district in Madhya Pradesh. While the government frequently highlights its initiatives for tribal welfare and empowerment, members of the Gond tribal community in Mau find themselves running from pillar to post just to get their lawful land recognized. Despite possessing absolute legal documentation, official
May 232 min read
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प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल: हक की आवाज उठाने पर भड़के अफसर, कोर्ट के आदेशों की अनदेखी! Questions raised regarding, administrative accountability, rights of an orphaned girl with disabilities
Editorial: मध्य प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बैतूल जिले के शाहपुर अनुविभाग में एक अनाथ और दिव्यांग बालिका के अधिकारों को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे परिजनों की गुहार और मीडिया की मौजूदगी पर उप-खंड के जिम्मेदार अधिकारी का भड़कना प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर देश की सर्वोच्च अदालत दिव्यांगजनों के संरक्षण और मीडिया की स्वतंत्रता को अनिवार्य मानती है, वहीं मैदानी स्तर पर लोक सेवकों द्वारा सवा


कौशल विकास की आड़ में ; सरकारी मशीनरी, अरबों की संपत्ति और गरीब छात्रों की छात्रवृत्ति हड़पने का PPP मॉडल!A nationwide PPP model, that misappropriates government machinery, assets worth billions,
सवाल : क्या मध्य प्रदेश में नियमों को ताक पर रखकर 16 उत्कृष्ट आदिवासी आईटीआई को निजी एनजीओ 'परम फाउंडेशन' के हवाले करने की तैयारी; देश भर के वंचित युवाओं के तकनीकी भविष्य पर गहराता संकट नहीं ?


अपमान से लेकर अनाथ-दिव्यांग बालिका को प्रवेश न देने तक, गहराया प्रशासनिक सिंडिकेट का खेल! After Alleged Protocol Breach of MLA, Orphan Specially Abled Girl Denied Admission, BEO Accused of Intimidatio
इस पूरे मामले ने बैठक में उठे उन सवालों को और पुख्ता कर दिया है, जिसे अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य मंगल सिंह धुर्वे द्वारा सोशल मीडिया पर तस्वीरें जारी कर उजागर किया गया था। बैठक में नियमों को ताक पर रखकर भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष मनीष कुमरे, भौरा स्कूल के शिक्षक पंकज मालवीय और जनपद सदस्य पति सूर्यकांत मर्सकोले को अग्रिम पंक्ति में बैठाया गया था।


आईटीआई के निजीकरण के विरोध में उठी आवाज: जनप्रतिनिधियों ने भी निर्णय को बताया नियमों के विरुद्धVoices Rise Against Privatization of ITIs, Hundreds of Students March, 8 km to Submit Memorandum
(बैतूल): बैतूल जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र शाहपुर (कुंडी) एवं भीमपुर स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) को निजी गैर-सरकारी संगठन (NGO) 'परम फाउंडेशन' को सौंपे जाने के निर्णय का विरोध तेज हो गया है। विद्यार्थियों के जमीनी आंदोलन के साथ-साथ अब जनप्रतिनिधियों और संवैधानिक आयोगों ने भी शासन के इस कदम पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विपरीत बताया है।


समृद्ध किसान, सशक्त मंडी: स्वतंत्रता दिवस पर कृषि उपज मंडी का संकल्प। Prosperous Farmers, Empowered Mandis Agricultural Produce Markets, Pledge on Independence Day
15 अगस्त का यह ऐतिहासिक दिन हमें देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर शहीदों के महान बलिदानों की याद दिलाता है। आजादी का यह पर्व हमें आत्मचिंतन और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी को और मजबूत करने का अवसर देता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी ने कहा था कि "देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों और खलिहानों से होकर गुजरता है।" हमारा देश तभी सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बन सकता है, जब देश का पेट भरने वाला हमारा किसान भाई आर्थिक
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