प्रोटोकॉल उल्लंघन पर सियासी घमासान: क्या मप्र भाजपा में 'शिवराज गुट' को किया जा रहा है टारगेट ? PoliticalDramaMP, BJPInternalConflict, AdministrativeNegligenceMP
- Jul 18
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बैतूल (मध्य प्रदेश)। भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के गृह जिले बैतूल के शाहपुर में बुधवार को एक ऐसा सियासी ड्रामा देखने को मिला, जिसने सूबे के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। शाहपुर जनपद पंचायत सभागृह में आयोजित एक सरकारी बैठक में क्षेत्रीय भाजपा विधायक गंगा सज्जन सिंह को बैठने के लिए कुर्सी तक नसीब नहीं हुई। इस घोर अपमान से नाराज विधायक ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को जमकर फटकार लगाई और बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल गईं।

यह घटना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, बल्कि खुद सत्ताधारी दल (भाजपा) के सूबा मुखिया (प्रदेश अध्यक्ष) के अपने ही गृह जिले में पार्टी की अंदरूनी गुटबाज़ी और 'पॉवर शिफ्ट' की एक बड़ी इनसाइड स्टोरी बयां कर रही है। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा आम हो गई है कि क्या प्रदेश में जानबूझकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खेमे से जुड़े नेताओं को टारगेट किया जा रहा है?
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बैतूल जिला हमेशा से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है, और अब हेमंत खंडेलवाल के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद इस जिले का सियासी वजन और बढ़ गया है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के ही गृह क्षेत्र में उनकी ही पार्टी की महिला आदिवासी विधायक के साथ प्रशासनिक स्तर पर इस तरह का बर्ताव होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
पहले से थी सूचना: विधायक गंगा सज्जन सिंह ने बैठक में आने की सूचना अधिकारियों को पहले ही दे दी थी। इसके बावजूद उनके लिए कोई कुर्सी आरक्षित नहीं रखी गई।
अधिकारियों की मनमानी: जब विधायक शाहपुर जनपद सभागृह पहुंचीं, तो उन्हें खड़ा रहना पड़ा। मौके पर मौजूद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) और जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों ने उनके प्रोटोकॉल की धंज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
बहिष्कार: विधायक ने इस लापरवाही पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाकर तुरंत बैठक से बाहर चली गईं।

चर्चाओं का बाजार गर्म: बैठक में जनजाति आयोग के सदस्य मंगल सिंह धुर्वे, जनपद अध्यक्ष शिवशंकर मवासे और उपाध्यक्ष रोशनी ठाकुर जैसे नेता मौजूद थे, लेकिन संगठन के नए मुखिया के गृह जिले में ही एक सिटिंग विधायक का इस तरह अपमान होना प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ आंतरिक अनुशासन पर भी बड़ा सवाल है।
'शिवराज बनाम मोहन यादव' खेमे की जंग आई सामने!
इस पूरे घटनाक्रम को मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बैतूल जिले की इस घटना के पीछे गहरी सियासी बिसात बिछी है:
शिवराज खेमे को साइडलाइन करने की कोशिश: क्षेत्र में यह सुगबुगाहट तेज है कि जो जनप्रतिनिधि और नेता पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाते रहे हैं, उन्हें अब सरकारी तंत्र में सोचे-समझे तरीके से हाशिए पर धकेला जा रहा है। विधायक गंगा सज्जन सिंह के साथ हुआ यह व्यवहार इसी कथित 'टारगेटिंग' का हिस्सा माना जा रहा है।
सीएम डॉ. मोहन यादव के करीबियों को तरजीह: दूसरी तरफ, चर्चा है कि प्रशासन अब नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के करीबी नेताओं और उनके गुट को जरूरत से ज्यादा तवज्जो दे रहा है। इसी 'पॉवर गेम' की वजह से अफसरशाही भी पुराने और कद्दावर नेताओं के प्रोटोकॉल को नजरअंदाज करने की हिम्मत जुटा पा रही है।

प्रशासनिक लापरवाही या सोची-समझी राजनीति?
यह बैठक जनजाति कार्य विभाग के अंतर्गत छात्रावासों और आश्रमों में खाली सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया को लेकर बुलाई गई थी, लेकिन यह पूरी तरह राजनीति की भेंट चढ़ गई।
मुख्य बिंदु | जमीनी हकीकत |
प्रोटोकॉल का मखौल | मध्य प्रदेश में विधायकों का प्रोटोकॉल तय है, लेकिन शाहपुर जनपद में उसे हवा में उड़ा दिया गया। |
पार्टी की साख पर आंच | नए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के गृह जिले में ही भाजपा विधायक का यह हाल होना, विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए मुद्दा दे गया है। |
कार्रवाई पर टिकी नजरें | क्या इस गंभीर गुस्ताखी के लिए शाहपुर के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और जनपद सीईओ पर गाज गिरेगी, या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? |
यह 'कुर्सी विवाद' अब सीधे भोपाल तक पहुंच चुका है। देखना दिलचस्प होगा कि हेमंत खंडेलवाल के गृह जिले में उनकी ही विधायक के साथ हुए इस व्यवहार पर संगठन क्या कड़ा रुख अपनाता है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस अंदरूनी कलह को कैसे संभालते हैं।











