एमपी की अफ़सरशाही का नया कारनामा: 30 जून की डेडलाइन ख़त्म, बैठक के हफ़्ते भर बाद भी हॉस्टल लिस्ट 'गायब'! mpadministration, administrativenegligence, governmentmonopoly,
- Jul 22
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बैतूल में छात्रावास प्रवेश में भारी धांधली की आशंका; विधायक का 'भाई-भतीजावाद' का आरोप, 'शिवराज बनाम मोहन यादव' गुटबाज़ी से लेकर BEO के कारनामों तक—भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के जिले कि प्रशासनिक व्यवस्था ।
भोपाल/बैतूल | 22 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग की साख और अफ़सरशाही की पारदर्शी कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूबे के आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले के शाहपुर विकासखंड में संचालित छात्रावासों और आश्रम शालाओं में नवीन प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह से अनिश्चितता, मनमानी और गड़बड़ी की आशंकाओं से घिर चुकी है।
कार्यालय आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग (मध्य प्रदेश) के स्पष्ट आदेश (पत्र क्रमांक: छात्रावास/I/923798/2026) के तहत प्रवेश की पूरी प्रक्रिया हर हाल में 30 जून 2026 तक संपन्न हो जानी चाहिए थी। हालांकि, शाहपुर में नियमों को ठेंगा दिखाते हुए 15 दिन की देरी से 15 जुलाई को चयन समिति की बैठक रखी गई। हद तो तब हो गई जब बैठक संपन्न होने के पूरे एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी अंतिम चयन सूची सार्वजनिक नहीं की गई है।

चयन सूची अटकाकर किसे फ़ायदा? मेरिट को दरकिनार करने का आरोप
नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन चयन सूची सार्वजनिक न होने के कारण दूर-दराज के ग्रामीण व आदिवासी इलाकों से आने वाले गरीब मेधावी बच्चे और उनके अभिभावक रोज़ाना हॉस्टल और ब्लॉक शिक्षा कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
अभिभावकों ने सीधा आरोप लगाया है कि सूची को सार्वजनिक न करके उसे जानबूझकर दबाया गया है, ताकि:
पात्र और मेधावी छात्रों के नाम हटाए जा सकें।
रसूखदारों और पसंदीदा लोगों के बच्चों को मनमाने ढंग से एडजस्ट किया जा सके।
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BEO का रटा-रटाया जवाब: "बन रही है लिस्ट..."
जब इस प्रशासनिक देरी और अटकाव पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से सवाल पूछा गया, तो उनका बयान अफ़सरशाही के रवैये को साफ़ बयां करता है:
"सभापति से बैठक की तारीख लेने के कारण प्रक्रिया कुछ लेट हुई है। कुछ लिस्टें बची हुई हैं, जैसे-जैसे लिस्ट बनते जा रही है, वैसे-वैसे ओपन हो रही है।"— जी. आर. बर्डे, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO), शाहपुर
घटनाक्रम की पूरी परतें: कैसे हॉस्टल लिस्ट से शुरू होकर भोपाल तक गूंजा सियासी संग्राम
1. विधायक गंगा सज्जन सिंह ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग की है :
मामले में मचे बवाल के बाद घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र की विधायक गंगा सज्जन सिंह उइके ने सीधा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कलेक्टर जिला बैतूल को आधिकारिक पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
विधायक ने अपने पत्र में लिखा:
: 15 जुलाई की बैठक में शासन के चयन नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।
: मेरिट (पिछली कक्षा के अंकों) को दरकिनार कर केवल 'भाई-भतीजावाद' और पसंदीदा नामों के आधार पर चयन किया गया है।
: शाहपुर के सभी हॉस्टलों की मेरिट और सिलेक्ट लिस्ट सार्वजनिक की जाए और धांधली करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई
हो।
2.बैठक में विधायक खड़ी रहीं, 'बिन बुलाए मेहमान' सीटों पर जमे रहे
'गमाकी मीडिया' द्वारा जारी रिपोर्ट से पूरे सिस्टम की सच्चाई सामने आई है। 15 जुलाई को जनपद पंचायत सभागार में आयोजित आधिकारिक चयन समिति की बैठक में BEO और स्थानीय अफ़सरों का रवैया इतना शर्मनाक रहा कि क्षेत्रीय महिला विधायक गंगा सज्जन सिंह उइके को बैठने तक के लिए कुर्सी नहीं दी गई।
विधायक के अपमान और अफ़सरों की मनमानी के विरोध में वे बैठक छोड़कर बाहर निकल गईं। वहीं दूसरी ओर, इस गोपनीय व संवेदनशील बैठक में पूर्व मंडल अध्यक्ष मनीष कुमरे, BEO के चहेते शिक्षक पंकज मालवीय जैसे कई अनाधिकृत और 'बिन बुलाए मेहमान' मुख्य सीटों पर काबिज होकर फैसले ले रहे थे।
3. एमपी बीजेपी की अंदरूनी जंग: 'शिवराज गुट बनाम मोहन यादव गुट' का एंगल
मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इस पूरे विवाद को भाजपा के अंदरूनी 'पावर शिफ्ट' से जोड़कर देखा जा रहा है:
प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले में घटना: यह पूरा सियासी ड्रामा भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के गृह जिले बैतूल में हुआ है।
शिवराज समर्थक नेताओं को टारगेट करने की चर्चा: सूत्रों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाने वाले नेताओं और जनप्रतिनिधियों को नए प्रशासनिक दौर में जानबूझकर हाशिए पर धकेला जा रहा है।
अफ़सरशाही बेक़ाबू: प्रदेश में 'पावर गेम' के चलते स्थानीय अफ़सर इतने बेफ़िक्र हो चुके हैं कि वे जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल को ठुकराने और नियमों की धज्जियां उड़ाने से भी नहीं हिचक रहे।
शाहपुर का यह मामला महज़ एक हॉस्टल लिस्ट का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश में प्रशासनिक साठगांठ, भ्रष्टाचार और राजनीतिक गुटबाज़ी का एक बड़ा उदाहरण बन चुका है। अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय जनता की मांग है कि:
तत्काल प्रभाव से शाहपुर के सभी छात्रावासों की मेरिट सूची सार्वजनिक की जाए।
15 जुलाई की विवादित बैठक की निष्पक्ष विभागीय जांच हो।
अनाधिकृत हस्तक्षेप करने वालों और BEO की कार्यप्रणाली पर कड़ा एक्शन लिया जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के गृह जिले में घटे इस घटनाक्रम पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन क्या कार्रवाई करता है या मामला फाइलों में ही दबा दिया जाएगा।











