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लाइसेंसी शराब दुकानों पर रेट लिस्ट हुई 'गायब' शराब माफिया के रसूख के आगे सरकारी नियम बौने साबित हो रहे हैं।

  • Apr 24
  • 3 min read

आबकारी विभाग ने नैतिकता, कानून और अपने कर्तव्य का सरेआम गला घोंटकर खुद को शराब माफिया 'वैष्णवी ट्रेडर्स' के चरणों में समर्पित कर दिया है। खाकी की गरिमा और विभाग की बची-खुची साख को रसूखदारों के पास गिरवी रख दिया गया है। आज शाहपुर की गलियों में चर्चा आम है कि यहां संविधान का कानून नहीं, बल्कि माफिया का सिक्का चलता है। 'वैष्णवी ट्रेडर्स' द्वारा संचालित लाइसेंसी शराब दुकानों पर जिस तरह सरेआम लूट और अवैध ओवर रेटिंग का खेल चल रहा है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि प्रशासन ने अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर माफिया को जनता की जेब काटने का गुप्त लाइसेंस बांट दिया है।

शराब दुकानों पर आबकारी अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए दुकानों से रेट लिस्ट गायब कर दी गई है। नियमानुसार हर दुकान के मुख्य द्वार पर सरकारी रेट लिस्ट चस्पा होना अनिवार्य है, ताकि ग्राहक ठगी का शिकार न हो, लेकिन बैतूल जिला का आबकारी अमला इतना अक्षम और कर्तव्य विमुख साबित हो रहा है कि वह इन रसूखदार ठेकेदारों से एक बोर्ड तक नहीं लगवा पा रहा। यह चुप्पी विभाग की लाचारी नहीं, बल्कि उस साठगांठ और मलाई में हिस्सेदारी का पुख्ता प्रमाण है जिसने पूरे सरकारी तंत्र को माफिया का दरबान बना दिया है।


प्रशासनिक शिथिलता का आलम यह है कि ओवर रेटिंग के पुख्ता सबूत सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। हर बोतल पर 20 से 200 रुपये की अतिरिक्त अवैध वसूली की जा रही है, और विरोध करने पर वैष्णवी ट्रेडर्स के गुंडे ग्राहकों को धमकाते हैं। यह कार्यप्रणाली शासन की मंशा और विभाग की निष्ठा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करती है।

जब रक्षक ही रसूखदारों के घर की दासी बन जाएं और नियमों की मर्यादा को माफिया के पैरों तले रौंदने दिया जाए, तो शाहपुर की आम जनता इंसाफ की गुहार लेकर कहां जाएगी? सरकारी तंत्र की यह शर्मनाक लाचारी शहर के चौक-चौराहों पर चर्चा का विषय बनी हुई है कि आखिर एक शराब कारोबारी के रसूख के आगे पूरा प्रशासनिक अमला इतना बौना, लाचार और बेबस कैसे नजर आ रहा है? ऐसा प्रतीत होता है कि शाहपुर में अब लोकतंत्र नहीं, बल्कि शराब सिंडिकेट का अपना समानांतर प्रशासन चल रहा है।



*नियमों को ठेंगे पर रखकर जनता को दोनों हाथों से लूट रहे*

अधिकारी केवल एयर कंडीशनर दफ्तरों में बैठकर फाइलों का पेट भर रहे हैं और ऊपर तक हिस्सा पहुंचाने के खेल में मशगूल हैं, जबकि धरातल पर वैष्णवी ट्रेडर्स सरकारी नियमों को ठेंगे पर रखकर जनता को दोनों हाथों से लूट रहा है। यह पूरी कार्यप्रणाली प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस और सुशासन के दावों को सरेआम चुनौती दे रही है। जनहित और शासन हित की मांग है कि प्रशासन तत्काल कुंभकर्णी नींद से जागे, इन दुकानों पर भारी-भरकम आर्थिक दंड अधिरोहित करे और नियमों का खुला उल्लंघन करने वाले शराब लायसेंसों को सस्पेंड करने जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करे। जब तक इन दुकानों के लायसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरु नहीं होगी, माफिया का हौसला नहीं टूटेगा। यदि सरकार ने इन लुटेरी दुकानों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम नहीं उठाए, तो यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि शाहपुर में आबकारी विभाग का अस्तित्व अब केवल और केवल शराब माफिया के अवैध हितों को संरक्षण देने और उनकी दलाली करने के लिए ही बचा है। जनता की चुप्पी को उनकी कमजोरी समझाने की भूल प्रशासन को महंगी पड़ेगी, क्योंकि जब रक्षक ही भक्षक का साथ देने लगें, तो व्यवस्था के खिलाफ जन-आक्रोश का फूट पड़ना तय है। अब सवाल अधिकारियों की नीयत पर है वे संविधान की शपथ का मान रखेंगे या माफिया की गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहेंगे?

 
 

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