सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान: 'विरोध प्रदर्शन करने वाले युवाओं के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने के लिए राज्य स्वतंत्र' SupremeCourt, AllowsStatesToCloseFIRs, AgainstProtesters
- Aug 3
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नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (3 अगस्त) को नीट (NEET) पेपर लीक मामले में चल रहे युवा आंदोलन और 20 जुलाई को नई दिल्ली में 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई कथित पुलिस बर्बरता के मामले पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि दिल्ली (NCT) और अन्य राज्य सरकारें आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को कानून के दायरे में रहकर बंद या वापस ले सकती हैं।
यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान दिया।
'आपराधिक पृष्ठभूमि' शब्द पर कोर्ट का अहम स्पष्टीकरण
28 जुलाई के अपने पिछले आदेश में कोर्ट ने कहा था कि जिन छात्रों के खिलाफ "आपराधिक रिकॉर्ड" नहीं हैं, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एम. सिंघवी ने अदालत का ध्यान आकर्षित किया कि छोटी-मोटी शिकायतों या ट्रैफिक चालान को भी आपराधिक पृष्ठभूमि मानकर छात्रों को परेशान किया जा सकता है।
इस पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा:
"हम आपसे यह नहीं कह रहे कि हत्या के आरोपियों के खिलाफ लगे आरोप हटा दिए जाएं।"
पीठ ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया:
गंभीर अपराध ही गिने जाएंगे: 'क्रिमिनल एंटीसीडेंट्स' (आपराधिक रिकॉर्ड) शब्द का अर्थ केवल गंभीर और जघन्य अपराधों (Grave and Heinous Offences) से ही समझा जाएगा।
FIR खत्म करने की छूट: राज्य सरकारों और पुलिस के पास पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के जरिए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने या FIR वापस लेने/रद्द (Quash) करने का पूरा कानूनी अधिकार है।
सुनवाई के दौरान कोर्टरूम में सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता, जस्टिस बागची और विभिन्न वरिष्ठ वकीलों के बीच अहम बातचीत हुई:
सरकार का पक्ष: सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि FIR को लेकर पहले कुछ भ्रम था, लेकिन सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों में शामिल लोगों को छोड़कर बाकी मामलों को सरकार के साथ बैठकर सुलझाया जा सकता है। SupremeCourt, AllowsStatesToCloseFIRs, AgainstProtesters
छात्रों का पक्ष: एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने पटना की एक FIR का हवाला देते हुए बताया कि उसमें 152 नामजद और 5,000 अज्ञात लोगों के नाम दर्ज हैं, जिससे किसी भी छात्र को कभी भी उठाया जा सकता है।
अदालत की टिप्पणी: जस्टिस बागची ने कहा कि आपराधिक कानून का ढांचा FIR वापस लेने की इजाजत देता है। यह FIR छात्रों के भविष्य पर तलवार की तरह नहीं लटकी रहनी चाहिए।
पुलिस की बर्बरता का मुद्दा: वरिष्ठ अधिवक्ता शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि पुलिस द्वारा छात्रों को पीटे जाने के लगभग 300 वीडियो साक्ष्य के तौर पर सौंपे गए हैं।
SIT गठन और पेलेट गन के इस्तेमाल पर गाइडलाइंस
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दो विकल्पों का प्रस्ताव रखा है:
पुलिस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) बनाई जाए।
किसी सेवानिवृत्त (Retired) न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की जाए।
सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी जानकारी दी कि शीर्ष अदालत प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन (Pellet Guns) के इस्तेमाल को लेकर एक सख्त प्रोटोकॉल/दिशा-निर्देश भी तय करेगी।
मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की गई है।











