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बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा मानव अधिकार के लिए चिंताजनक।

  • Feb 21
  • 7 min read

नीलेश कौशल अधिवक्ता हरसूद।

लोकतांत्रिक देशों में निवास करने वाले प्रत्येक धर्म जाति एवं संप्रदाय एव पूजा पद्धति को मानने वाले नागरिकों के जीवन एवं उनकी जान माल व धार्मिक स्थलों की सुरक्षा करने का नैतिक दायित्व लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकारों के ऊपर रहता है। लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार का यह दायित्व होता है कि बिना किसी भेदभाव के सभी धर्म जाति एवं संप्रदाय के नागरिकों के अधिकारों का संरक्षण करने का अपने कर्तव्य का निर्वहन सरकार करें।


बांग्लादेश एक लोकतांत्रिक देश है जहां सभी धर्मो को मानने वाले नागरिक निवासरत है। बांग्लादेश में वर्ष 2024 में प्रारंभ हुआ छात्र आंदोलन के राष्ट्रीय आंदोलन का स्वरूप लेने के कारण छात्र आंदोलन ने हिंसक रूप लेने से कई लोगों की अकारण मृत्यु होने के कारण बांग्लादेश में अस्थिरता, अराजकता एवं तनाव का वातावरण तथा सेना से संघर्ष के कारण बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शैख हसीना के निवास तक आंदोलनकारी के घुस जाने के कारण बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफा देकर देश छोड़ने के कारण बांग्लादेश में राजनीतिक तख्तापलट होने से बांग्लादेश में राजनीतिक आस्थिरता व अराजकता का जो वातावरण बना हुआ है। उस वातावरण के कारण वहां पर निवासरत अन्य संप्रदाय व धर्मो को मानने वाले नागरिकों विशेषकर हिंदुओं के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हुआ है।


बांग्लादेश में निवास करने वाले अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ छुटपुट हिंसा की घटनाओं की खबरें आती रहती थी लेकिन पिछले कुछ समय से बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के साथ ही बांग्लादेश में निवास करने वाले हिंदुओं के साथ होने वाली घटनाओं में वृद्धि हुई है। लगातार समाचार के माध्यम से खबरें आ रही है कि बांग्लादेश में रहने वाली हिंदुओं के घर दुकान एवं उनके धार्मिक स्थलों पर तोड़फोड़ कर आगजनी कर महिलाओं के साथ सामूहिक व्यभिचार की घटनाएं आम बात हो गई है। हिंदुओं के साथ हो रही घटनाओं को देखकर लगता है कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत हिंदुओं के ऊपर यह हमले एवं आक्रमण हो रहे हैं जिन्हें रोकने में वहां की सरकार असफल रही है।।


बांग्लादेश में कट्टरपंथी जिहादियों की की भीड़ के द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक एवं असत्य अफवाहों को फैलाकर हिंदू बस्तियों में सामूहिक रूप से भीड़ तंत्र के माध्यम से हिंसा की घटनाओं को कारित करना कट्टरपंथी जिहादियों की मानसिकता को प्रकट करता है कि उनका एकमात्र उद्देश्य हिंदुओं को गंभीर क्षति पहुंचाना है । कट्टरपंथी जिहादियों के द्वारा की जा रही हिंसा से हिंदुओं को भयभीत होकर भय के वातावरण में जीवन यापन करना पड़ रहा है । कट्टरपंथी जियादियों के द्वारा लगातार की जा रही हिंसा के कारण हिंदुओं को अपना घर परिवार छोड़ने के लिए विवश होना पड़ रहा है। हिंदुओं के साथ हो रही इन हिंसाओं के कारण हिंदुओं के बच्चों को शिक्षा और तालीम से वंचित होना पड़ रहा है। उनजे बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। कट्टरपंथी जिहादियों के कारण बांग्लादेश में निवास करने वाला हिंदू आज असुरक्षा की भावना के साथ बांग्लादेश में निवास कर रहा हैं।


वर्ष 2024 में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के पद छोड़ने के बाद से रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में हिंदुओं के ऊपर 2010 हमले की घटनाएं सामने आई है जिसमें 69 मंदिरों को निशाना बनाया गया हैं। कट्टरपंथी जिहादियों के द्वारा किए गए इन हमलों में 157 हिंदू परिवारों के घरों को नुकसान पहुंचाया गया है तथा हमले के दौरान 09 हिंदुओं की हत्या कट्टरपंथी जिहादियों के द्वारा की गई है। वर्ष 2025 की हालिया हमलो में 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपूचंद्र दास की हत्या जिसे पुलिस बल के द्वारा जिहादियों की हवाले कर दिया गया था। युवक पुलिस कर्मियों से सुरक्षा की गुहार लगाता रहा जिन पुलिस कर्मियों के ऊपर युवक की सुरक्षा की जवाबदेहि थी उन्ही पुलिस कर्मियों के सामने दीपू चंद्र दास को सामूहिक रूप से उसके साथ मारपीट कर पीटने के बाद तेल छिड़क कर जिंदा जला दिया गया था। दूसरी घटना रजवाड़ी जिले के 29 वर्ष के युवा अमृत मंडल के साथ घटी जिसे जिहादियों की भीड़ ने मावलिंचिंग में मार दिया। तथा तीसरी घटना 40 वर्षीय युवा बृजेंद्र विश्वास के साथ घटी जिसे जिहादियों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई थी। इन हत्याओं से बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस की अंतिम सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े किये थे।।


लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की यह नैतिक जवाबदेहि एवं जिम्मेदारी होती है कि वह उसके संघात्मक ढांचे के अंदर निवास करने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के नागरिक को की सुरक्षा की व्यवस्था करें। सरकार यह सुनिश्चित करें कि उसके देश में निवासरत अल्पसंख्यकों के साथ बहुसंख्यक समुदाय के द्वारा कैसा व्यवहार किया जा रहा है। मोहम्मद यूनुस की अंतिम सरकार जो बांग्लादेश में अराजकता के बाद अंतिम रूप से इस बात के लिए चुनी गई थी कि वह बांग्लादेश के वर्तमान अस्थिरता के वातावरण को स्थिर करें तथा देश में नई सरकार की गठन के लिए चुनाव का मार्ग प्रशस्त करें। किंतु मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा को रोकने में पूरी तरह असफल रही हैं।।


मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार में हिंदुओं के ऊपर हो रहे अत्याचार की घटनाओं में तीव्र गति से वृद्धि हुई है जिसके कारण हिंदुओं को पलायन करने पर विवश होना पड़ रहा है। हिंदुओं को बांग्लादेश में उनके नागरिक अधिकारों के संरक्षण के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है। मानवाधिकार के लिए कार्य करने वाली कहीं अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संस्थाओं के द्वारा हिंदुओं के ऊपर हो रहे हमलों और आक्रमण को लेकर आवाज उठाई गई लेकिन उसका कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल पाया। अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के विरोध के कारण हिंदू की शिकायत है तो दर्ज की जा रही है लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।


बांग्लादेश की अंतिम सरकार का यह दायित्व था कि वह हिंदुओं के ऊपर हो रहे हमलो और अत्याचार तथा कट्टरपंथी जिहादियों के द्वारा निर्ममता पूर्वक हिंदूओ की जा रही हत्याओं की मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर उसके समाधान की दिशा में कार्य करती किंतु ऐसा कोई प्रयास मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतिम सरकार के द्वारा कोई प्रयाश नहीं किया गया जो अल्पसंख्यक हिंदुओं के नागरिक अधिकारों का संरक्षण कर उन्हें उनकी सुरक्षा का विश्वास एवं भरोसा उन्हें करवा पाती। बांग्लादेश की अंतिम सरकार के द्वारा अल्पसंख्यक हिंदू की सुरक्षा के लिए प्रबंध न करना बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की निष्ठा पर प्रश्न चिन्ह निर्मित करता है कि क्या वास्तव में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार हिंदुओं के ऊपर हो रहे हैं हमले और अत्याचार को लेकर चिंतित हैं। बांग्लादेश के अंतरिम सरकार हिन्दुओ के साथ हो रही हिंसा को रोकने में असफल क्यों है या फिर हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा को बांग्लादेश अंतरिम सरकार रोकना नहीं चाहती हैं।


बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस की सरकार को विचार करना चाहिए कि हिंदुओं पर हमले किन कारणों से हो रहे हैं। हिन्दुओ पर हो रहे हमले केवल एक समुदाय पर हो रहे हमले नहीं है बल्कि उस विचार पर हो रहे हमले हैं जिसके मूल में बांग्लादेश का गठन हुआ था। बांग्लादेश की सरकार के समक्ष विचारणीय प्रश्न यह है कि वह हिंदुओं पर हो रहे हमले और हिंसा को रोकने में असफल क्यों हुई है। बांग्लादेश में हिंदू पर हो रहे सुनियोजित हमले मानव अधिकार के लिए चिंताजनक हैं। बांग्लादेश सरकार की निष्क्रियता से बांग्लादेश सरकार की निष्ठा पर प्रश्न चिन्ह उत्पन्न हुआ है की सरकार वास्तव में बांग्लादेश में निवासरत अल्पसंख्यक हिंदू के अधिकारों का संरक्षण करने के लिए चिंतित है। बांग्लादेश की सरकार को अल्पसंख्यक हिंदुओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रभावी कार्यवाही करनी चाहिए ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के मन में सरकार के प्रति विश्वास बहाली हो।


बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओ के हालत चिंताजनक है कि किस तरह से भीड़ तंत्र के आगे सत्ता पक्ष एवं सुरक्षाबल असहाय नजर आ रहे हैं। जिन सुरक्षाबलों के कंधों पर नागरिकों की सुरक्षा का दायित्व है। वही सुरक्षाबल आम नागरिकों को मरने के लिए कट्टरपंथी जिहादियों की भीड़ के सामने मरने के लिए छोड़ दे रहे हैं। हालिया दिनों में बांग्लादेश में हुए घटनाक्रमों के कारण मानवीयता शर्मसार हुई है। असहाय नागरिकों को बिना किसी कारण के मार देने से बांग्लादेश में निवासरथ अल्पसंख्यक हिंदुओं के जीवन के समक्ष संकट उत्पन्न हो रहा है। हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर सरकार का मौन धारण करने के कारण बांग्लादेश में लोकतंत्र खतरे में है। लोकतंत्र में विश्वास बहाली के लिए बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस की अंतिम सरकार को सभी नागरिकों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जनता को विश्वास दिलाने के जो प्रयास यूनुस सरकार को करना था उन प्रयासों को मोहम्मद यूनुस की सरकार करने में बुरी तरह असफल रही है।


बांग्लादेश में हाल ही में हुए चुनाव के बाद चुनी हुई सरकार को अल्पसंख्यक समुदाय के नागरिकों विशेष कर हिन्दुओ को विश्वास दिलाना पड़ेगा कि उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए उन्हें न्याय दिलाने के लिए चुनी हुई सरकार चुप नहीं बैठेगी।


बांग्लादेश की चुनी हुई सरकार को प्राथमिकता से अल्पसंख्यकों के अधिकारों का संरक्षण करने की दिशा में नीति बनाकर उनके अधिकारों का संरक्षण करने हेतु प्रभावी रूप से नीतियों का निर्माण कर उनके क्रियान्वयन करना चाहिए। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय एवं मानवाधिकार संगठनों एवं संस्थाओं का बांग्लादेश की चुनी हुई नयी सरकार पर दबाव बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के बांग्लादेश के विषय को उठाना चाहिए बांग्लादेश के अल्पसंख्यक विशेष कर हिंन्दुओ के जीवन उनके जानमाल की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाये जा सके ।


बांग्लादेश की सरकार यह प्रबंध करें की धार्मिकता के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ किसी प्रकार की हिंसा कारित नही की जावेगी। यदि किसी संगठन या मजहबी भीड़ एवं कट्टरपंथी जिहादियों के द्वारा किसी प्रकार से अल्पसंख्यक विशेष कर हिंदुओं के साथ हिंसा करने वालों से निपटने के लिए बांग्लादेश की नयी चुनी हुई सरकार सख्त एवं कठोर कार्रवाई करने हेतु दृढ़संकल्पित है। नयी चुनी हुई सरकार ईमानदारी से सख्त एवं कठोर कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार की तरह ही बांग्लादेश की नयी चुनी हुई सरकार भी अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले और आक्रमण को रोकने में असफल रहती है तो यह बांग्लादेश में निवास करने वाले अल्पसंख्यक विशेषकर हिंन्दू नागरिकों के मानवाधिकारों के लिए गंभीर चिंताजनक संकट होगा बांग्लादेश में हुए अभी हाल ही है चुनाव में मोहम्मद यूनुस के अंतिम सरकार के सत्ता से बेदखल होने पर नई सरकार के समक्ष यह चुनौती रहेगी की बांग्लादेश में निवास करने *वाले अल्पसंख्यक विशेष कर हिंदुओं के मानवाधिकारों के लिए व्यापक रूप से सुरक्षा प्रबंध का इंतजाम करें ताकि बांग्लादेश में निवासरथ हिंदुओं* के नागरिक अधिकारों का संरक्षण किया जा सके।


नीलेश कौशल अधिवक्ता हरसूद

 
 

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