नाबालिग बालिका की सतर्कता से टला बाल विवाह, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 बनी सहारा
- Apr 26
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एक सराहनीय और जागरूकता से भरा मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग बालिका ने स्वयं आगे बढ़कर अपने बाल विवाह को रुकवाया। बालिका द्वारा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर कॉल कर मदद मांगी गई, जिसके बाद महिला एवं बाल विकास विभाग तथा प्रशासन की तत्परता से समय रहते विवाह को रोक दिया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती विनीता कासवा ने जानकारी देते हुए बताया कि दिनांक 25 अप्रैल को भोपाल स्थित चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से सूचना प्राप्त हुई थी कि एक बालिका ने स्वयं अपने बाल विवाह को रुकवाने के लिए कॉल किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन प्रभारी श्री मुकेश ताम्रकार को सूचित किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह विदिशा जिले का पहला ऐसा मामला है, जिसमें किसी बालिका ने स्वयं पहल करते हुए हेल्पलाइन के माध्यम से अपने विवाह को रुकवाने की कोशिश की। जांच के लिए विकासखंड समन्वयक ग्यारसपुर श्री आशीष यादव को मौके पर भेजा गया। जांच में पाया गया कि गूलरखेड़ी, गुलाबगंज में 17 वर्षीय नाबालिग बालिका का विवाह 26 अप्रैल 2026 को राहतगढ़ (जिला सागर) निवासी युवक से तय किया गया था। बालिका मूलतः रायसेन जिले के बरेली की निवासी है और विवाह उसके मामा के घर से कराया जा रहा था।
मौके पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रेखा शर्मा एवं स्वाति नामदेव से भी जानकारी का सत्यापन किया गया। इसके पश्चात गुलाबगंज थाना प्रभारी से संपर्क कर पुलिस सहयोग लिया गया। बालिका, उसके मामा एवं अन्य परिजन थाने में उपस्थित हुए, जहां बालिका ने स्पष्ट रूप से बताया कि वह नाबालिग है और अपनी इच्छा के विरुद्ध विवाह नहीं करना चाहती।
बालिका ने यह भी बताया कि उसने कक्षा 11वीं तक शिक्षा प्राप्त की है और स्कूल के दौरान ही उसे चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में जानकारी मिली थी, जो विद्यालय परिसर में प्रदर्शित था। उसी जानकारी के आधार पर उसने आज इस सेवा का उपयोग कर अपने अधिकारों की रक्षा की।
प्रशासन द्वारा बालिका की जन्मतिथि का सत्यापन किया गया, जिसमें उसकी आयु 17 वर्ष 9 माह पाई गई, जो कि विधिक विवाह आयु से कम है। इसके आधार पर परिजनों से बाल विवाह न करने की लिखित सहमति ली गई और आवश्यक समझाइश दी गई। महिला एवं बाल विकास विभाग तथा प्रशासन के समन्वित प्रयासों से यह बाल विवाह सफलतापूर्वक रोका गया। यह घटना न केवल बालिका की जागरूकता का उदाहरण है, बल्कि समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी देती है।











