नारी सशक्तिकरण और डिजिटल गवर्नेंस में मध्यप्रदेश का 'एमपी मॉडल': लाड़ली बहनों को सौगात और देश का पहला पेपरलेस ई-रजिस्ट्रेशन सिस्टम शुरू |WomenEmpowermentInitiatives, DigitalGovernance, Technological
- Mar 7
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भोपाल, 07 मार्च 2026
मध्यप्रदेश आज विकास और तकनीक के दोहरे मोर्चे पर देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जहाँ एक ओर नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में बजट और योजनाओं की झड़ी लगा दी है, वहीं दूसरी ओर 'संपदा 2.0' के माध्यम से पूरी तरह पेपरलेस डिजिटल पंजीयन व्यवस्था लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

1. नारी सशक्तिकरण: लाड़ली बहनों और बच्चों के लिए ₹32,730 करोड़ का बजट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की प्रगति महिलाओं की उन्नति से जुड़ी है। महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 32,730 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है।
लाड़ली बहना योजना: जून 2023 से अब तक 52,305 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। वर्तमान में 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये मिल रहे हैं। अगले साल के लिए 23,882 करोड़ रुपये सुरक्षित रखे गए हैं।
आंगनवाड़ी और पोषण: प्रदेश के 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों में 'जियो-फेंसिंग' और 'फेस मैचिंग' जैसी तकनीक अपनाई गई है। पोषण 2.0 के तहत गंभीर कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं।
लाड़ली लक्ष्मी योजना: 52.56 लाख बेटियों के पंजीकरण के साथ यह योजना अन्य राज्यों के लिए मिसाल बनी हुई है।
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2. डिजिटल क्रांति: अब घर बैठे होगा संपत्तियों का 'फेसलेस' रजिस्ट्रेशन
तकनीकी क्षेत्र में इतिहास रचते हुए मध्यप्रदेश ने 'संपदा 2.0' प्रणाली शुरू की है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जहाँ दस्तावेजों का पंजीयन पूरी तरह पेपरलेस और डिजिटल होगा।
सायबर पंजीयन कार्यालय: भोपाल में स्थापित इस विशेष कार्यालय के माध्यम से अब 75 प्रकार के दस्तावेजों का फेसलेस पंजीयन (बिना कार्यालय आए) किया जा सकेगा।
वीडियो KYC अनिवार्य: पक्षकारों को अब उप-पंजीयक कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी; आधार आधारित वीडियो KYC के जरिए घर बैठे पहचान सत्यापित हो जाएगी।
जियो-टैगिंग से घटेगा विवाद: नई व्यवस्था में संपत्तियों की जियो-टैगिंग की जाएगी, जिससे जमीन और मकान संबंधी विवादों में कमी आएगी। साथ ही, सायबर तहसील के माध्यम से कृषि भूमि का नामांतरण (Mutation) भी स्वतः हो जाएगा।
निष्कर्ष: एक तरफ जहाँ प्रदेश की 'लाड़ली बहनों' के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए खजाना खोला गया है, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिक को सरकारी दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति दिलाने के लिए 'डिजिटल गवर्नेंस' को चरम पर पहुँचाया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, ये नवाचार न केवल पारदर्शिता लाएंगे बल्कि सालाना 11,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व भी सुनिश्चित करेंगे।












