नगरीय निकायों में 'स्वागत द्वार' पर रोक: शाहपुर का 17 लाख का प्रोजेक्ट अधर में, ACS ने दी सस्पेंड करने की चेतावनी UrbanExpenditureReforms, ShahpurWelcomeGateIssue, MadhyaPradeshUrbanDevelopment
- May 9
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शाहपुर | मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के नगरीय निकायों में फिजूलखर्ची रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शासन ने निकायों द्वारा बनाए जाने वाले 'स्वागत द्वारों' के निर्माण पर कड़ी सख्ती दिखाते हुए रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले का सीधा असर शाहपुर नगर परिषद पर पड़ा है, जहाँ 17 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित स्वागत द्वार का प्रोजेक्ट अब खटाई में पड़ता नजर आ रहा है।

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फिजूलखर्ची पर ACS की सख्त चेतावनी
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वागत द्वारों का निर्माण केवल धन की बर्बादी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि किसी निकाय ने इन निर्देशों का उल्लंघन कर स्वागत द्वार बनाया, तो संबंधित अधिकारी पर सीधे कार्रवाई की जाएगी और उन्हें सस्पेंड तक किया जा सकता है। शासन का मानना है कि निकाय पहले से ही आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं, ऐसे में ऐसे निर्माणों पर लाखों खर्च करना उचित नहीं है जिनसे कोई आय प्राप्त नहीं होती।
शाहपुर का प्रोजेक्ट संकट में
शाहपुर नगर परिषद ने शहर के मुख्य मार्ग पर लगभग 17 लाख रुपये की लागत से एक भव्य स्वागत द्वार बनाने की तैयारी कर ली थी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी। लेकिन सरकार के ताजा रुख के बाद अब इस प्रोजेक्ट पर ब्रेक लगता दिख रहा है। हालांकि, अधिकारी अब इस उलझन में हैं कि जिन प्रोजेक्ट्स के टेंडर हो चुके हैं, क्या उन पर भी यह नियम लागू होगा।
मूलभूत सुविधाओं पर रहेगा फोकस
राज्य सरकार ने निकायों को निर्देश दिए हैं कि वे दिखावे के बजाय जनता से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं पर पैसा खर्च करें। प्राथमिकता की सूची में निम्नलिखित कार्य शामिल रहेंगे:
सड़कों का सुदृढ़ीकरण
बेहतर नालियां और जल निकासी
शुद्ध पेयजल की आपूर्ति
स्वच्छता अभियान
अधिकारियों का पक्ष
इस पूरे मामले पर फिलहाल असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शाहपुर के प्रभारी सीएमओ केसी ऊईके का कहना है कि उन्होंने इस स्थिति के समाधान के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है और मार्गदर्शन मांगा है। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर महापुरुषों के नाम पर द्वार बनाने की राजनीति और परंपरा पर भी अब चर्चाएं तेज हो गई हैं।











