विशेष अन्वेषण: अंतरराष्ट्रीय 'रामसर साइट' तवा में माफिया का तांडव, प्रशासनिक तंत्र की विफलता या मिलीभगत? TawaRamsarViolation IllegalMiningTawa SatpuraTigerReserve EcologicalCrimeUNEP NarmadapuramMini
- Feb 3
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नर्मदापुरम/बैतूल | (Courtesy: Google, Maxar, Airbus, and Sentinel Satellites) Investigative Report: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में स्थित तवा जलाशय (Ramsar Site No. 2547), जिसे जनवरी 2024 में अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि (Wetland of International Importance) घोषित किया गया था, आज रेत माफिया के अवैध उत्खनन की भेंट चढ़ रहा है। 'ग्राउंड जीरो' से प्राप्त वीडियो साक्ष्य और सैटेलाइट इमेजरी यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ न केवल भारतीय पर्यावरण कानूनों बल्कि अंतरराष्ट्रीय संधियों का भी गला घोंटा जा रहा है।

साक्ष्यों का विश्लेषण: मशीनों से 'पाताल' चीरता माफिया
हमारी पड़ताल में प्राप्त साक्ष्य चौंकाने वाले हैं:
अवैध जलमार्ग और डंपर: नदी की प्राकृतिक धारा को कृत्रिम रूप से पाटकर भारी डंपरों के लिए रास्ते बनाए गए हैं, जो नदी के पारिस्थितिक स्वरूप को स्थायी रूप से नष्ट कर रहे हैं।
सक्शन तकनीक का घातक प्रयोग: वीडियो फुटेज में स्पष्ट है कि जलधारा के भीतर पोकलेन और सक्शन मशीनों का उपयोग कर रेत की गहराई तक खुदाई की जा रही है। यह तकनीक जलीय जीवों के प्रजनन क्षेत्रों (Breeding Grounds) को पूरी तरह समाप्त कर देती है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का बफर क्षेत्र: सैटेलाइट डेटा के अनुसार, यह गतिविधियां नयापुरा (Nayapura) और ददिवाडा (Dandiwada) के पास हो रही हैं, जो सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और भीमकुंडे गेट के अति-संवेदनशील क्षेत्र में आता है।
तवा क्षेत्र में जारी यह अवैध उत्खनन केवल पर्यावरण का नुकसान नहीं, बल्कि तीन प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। सबसे पहले, यह क्षेत्र सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) के बफर जोन और भीमकुंडे गेट के पास स्थित है, जहाँ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत बिना 'नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ' (NBWL) की अनुमति के कोई भी व्यावसायिक गतिविधि प्रतिबंधित है। मशीनों का शोर और बनाए गए अवैध रास्ते वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को छिन्न-भिन्न कर रहे हैं। दूसरा, भारत प्रवासी प्रजातियों पर कन्वेंशन (CMS - Bonn Convention) का हस्ताक्षरकर्ता है, जिसका उद्देश्य प्रवासी पक्षियों के मार्गों (Flyways) को सुरक्षित रखना है। तवा जलाशय इन पक्षियों का प्रमुख पड़ाव है, जहाँ सक्शन ड्रेजिंग और मशीनों का तांडव इस अंतरराष्ट्रीय संधि की मूल भावना के विरुद्ध है। अंततः, जैव विविधता अधिनियम, 2002 के उन प्रावधानों को भी ताक पर रख दिया गया है जो प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग की बात करते हैं। सक्शन मशीनों द्वारा पानी के नीचे की वनस्पतियों और मछलियों के प्रजनन स्थलों (Breeding Grounds) का विनाश स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसे प्रशासन अनदेखा कर रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय रामसर संधि (Ramsar Convention) का उल्लंघन
तवा-देनवा संगम पर स्थित यह जलाशय अब वैश्विक संरक्षण के घेरे में है, जिसके तहत निम्नलिखित नियमों का उल्लंघन दंडनीय है:
'वाइज यूज' (Wise Use) सिद्धांत: संधि के अनुच्छेद 3.1 के अनुसार, आर्द्रभूमि का उपयोग केवल उसी सीमा तक हो सकता है जिससे उसका पारिस्थितिक स्वरूप न बदले। मशीनों द्वारा किया जा रहा अंधाधुंध खनन इस अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन है।
पारिस्थितिक स्वास्थ्य (Ecological Health): सक्शन ड्रेजिंग और मशीनों का शोर यहाँ आने वाले लगभग 280 प्रकार के प्रवासी पक्षियों के आवास को नष्ट कर रहा है।
जैव विविधता का विनाश: यह क्षेत्र 'महाशीर' (MP की राजकीय मछली) और लुप्तप्राय प्रजातियों का घर है, जिनका अस्तित्व गहरे खनन के कारण संकट में है।
रामसर संधि के तहत 'मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड' (Montreux Record) का प्रावधान एक प्रकार की 'ब्लैक-लिस्ट' की तरह काम करता है। यदि तवा जलाशय में जारी अवैध खनन के कारण इसके पारिस्थितिक स्वरूप में कोई गंभीर नकारात्मक बदलाव आता है, तो इसे इस रिकॉर्ड में शामिल किया जा सकता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पर्यावरणीय छवि के लिए एक बड़ा धक्का होता है, क्योंकि यह प्रमाणित करता है कि देश अपनी सबसे मूल्यवान प्राकृतिक धरोहरों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं की रक्षा करने में विफल रहा है। मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड में नाम आने का सीधा अर्थ है कि उस क्षेत्र का अस्तित्व संकट में है, जिससे न केवल पर्यटन और स्थानीय पारिस्थितिकी प्रभावित होती है, बल्कि यह शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता को वैश्विक पटल पर उजागर करता है।
प्रशासनिक संवेदनहीनता: 'नंबर' और 'जांच' का टालमटोल भरा खेल
जब इस गंभीर मामले पर जवाबदेही तय करने के लिए अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो व्यवस्था की विसंगतियां उभरकर सामने आईं:
पद/अधिकारी | स्थान | मोबाइल नंबर | आधिकारिक प्रतिक्रिया (Version) |
डिप्टी रेंजर | शुकतवा | 9424792040 | "मामले को दिखवाती हूँ।" (कोई समय सीमा तय नहीं की) |
SDO (उत्तम सिंह सरत्त्या) | शाहपुर | 9424792019 | "जांच के बाद कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।" |
DFO (NIC रिकॉर्ड) | नर्मदापुरम | 9425415003 | नंबर गलत दर्ज है; कॉल करने पर RTI अधिकारी ने पल्ला झाड़ते हुए खनिज विभाग को जिम्मेदार बताया। |
अन्य विभागीय नंबर | नर्मदापुरम | 7898661095 | संपर्क करने पर व्यक्ति ने स्वयं के DFO होने से ही इनकार कर दिया। |
विधिक उल्लंघन: NGT एवं माइनिंग नियम
Sustainable Sand Mining Guidelines 2020 के अनुसार:
जल स्तर के नीचे खुदाई प्रतिबंधित है: वीडियो साक्ष्य दिखाते हैं कि माफिया सीधे पानी के भीतर से रेत खींच रहे हैं।
मशीनों का प्रवेश: रेत खदानों में नदी की मुख्य धारा में भारी मशीनों का उपयोग पूरी तरह वर्जित है।
रात में परिवहन और अवैध रास्ते: बिना विभागीय अनुमति के नदी के बीच में सड़कें बनाना संज्ञेय अपराध है。
निष्कर्ष: तवा नदी में चल रहा यह खेल केवल रेत चोरी नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि की 'पारिस्थितिक हत्या' है। अधिकारियों द्वारा गलत नंबरों का उपयोग और "जांच करेंगे" जैसे जवाब माफिया के प्रति उनकी 'मौन सहमति' की ओर संकेत करते हैं। यदि मुख्यमंत्री और एनजीटी ने तत्काल इस पर हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह रामसर साइट केवल कागजों पर ही सिमट कर रह जाएगी।
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प्रशासनिक एवं वैश्विक मंच पर हस्तक्षेप की तैयारी: 'संयुक्त राष्ट्र' तक पहुँचेगी गूँज
तवा नदी में हो रहे इस सुनियोजित पर्यावरणीय अपराध और अंतरराष्ट्रीय संधि के उल्लंघन को दबाने की कोशिशों के बीच, हमारे पंजीकृत मीडिया संस्थान द्वारा इस खोजी रिपोर्ट के समस्त डिजिटल साक्ष्य (वीडियो, फोटो एवं सैटेलाइट इमेजरी) आधिकारिक तौर पर निम्नलिखित विभागों एवं वैश्विक निकायों को कार्रवाई हेतु प्रेषित किए जा रहे हैं:
क्षेत्रीय अधिकारी, म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB): जल प्रदूषण और जलीय पारिस्थितिकी के विनाश के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हेतु।
संचालक, भौमिकी तथा खनिकर्म (म.प्र.): प्रतिबंधित मशीनी उत्खनन, सक्शन ड्रेजिंग और राजस्व की चोरी रोकने हेतु।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन (म.प्र.): सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) के बफर जोन और भीमकुंडे गेट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के उल्लंघन की उच्च-स्तरीय जांच हेतु।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP): इस मामले को वैश्विक 'पारिस्थितिक अपराध' (Ecological Crime) के रूप में दर्ज कराने हेतु, क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG 15 - Life on Land) का खुला उल्लंघन है।
रामसर कन्वेंशन सचिवालय (स्विट्जरलैंड): अंतरराष्ट्रीय महत्व की इस आर्द्रभूमि के स्वरूप के साथ की जा रही अवैध छेड़छाड़ की वैश्विक स्तर पर रिपोर्टिंग करने हेतु ताकि इस धरोहर को 'मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड' (Blacklist) में जाने से बचाया जा सके।
प्रशासन से 5 तीखे सवाल
1. अंतरराष्ट्रीय 'रामसर संधि' की शर्तों का खुला उल्लंघन किसके संरक्षण में? तवा-देनवा संगम एक घोषित रामसर साइट है, जहाँ 'वाइज यूज' (Wise Use) सिद्धांत अनिवार्य है। जब सैटेलाइट और वीडियो में सक्शन पाइपों द्वारा नदी का स्वरूप बदला जाना स्पष्ट दिख रहा है, तो विभाग ने अब तक इस अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज क्यों नहीं की?
2. टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित बफर जोन में भारी मशीनों का प्रवेश कैसे संभव हुआ? नयापुरा और धान्देवाडा जैसे क्षेत्र सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और भीमकुंडे गेट के अत्यंत समीप हैं। क्या वन विभाग और खनिज विभाग को यह नहीं पता कि इस संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र में भारी पोकलेन मशीनों और डंपरों का संचालन बिना विभागीय मिलीभगत के असंभव है?
3. क्या 'जांच का आश्वासन' माफिया को सुरक्षित रास्ता देने की एक तकनीक है? जब अधिकारियों (जैसे डिप्टी रेंजर और SDO) को सटीक लोकेशन और साक्ष्य दिए गए, तो उन्होंने तत्काल कार्रवाई (Spot Action) के बजाय "दिखवाती हूँ" और "जांच करेंगे" जैसे टालमटोल भरे जवाब क्यों दिए? क्या यह समय माफिया को मशीनें और सबूत हटाने के लिए दिया जा रहा है?
4. NIC और सरकारी पोर्टल पर गलत मोबाइल नंबरों का होना क्या एक सुनियोजित 'ढाल' है? आम जनता की शिकायतों के लिए उपलब्ध पोर्टल पर DFO जैसे जिम्मेदार अधिकारियों के नंबर गलत होना (RTI अधिकारी का नंबर होना या पद से इनकार करना) प्रशासनिक लापरवाही है या माफिया को जनता की पहुँच से बचाने का कोई सुनियोजित तरीका?
5. NGT के 'सस्टेनेबल माइनिंग' नियमों को 'पाताल' में क्यों दफनाया गया? नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त निर्देश हैं कि जलधारा के भीतर उत्खनन और सक्शन ड्रेजिंग प्रतिबंधित है। वीडियो में सरेआम नदी के बीचों-बीच पाइपों का जाल और मशीनों का तांडव दिख रहा है, फिर भी शासन इसे रोकने में विफल क्यों है?











