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केसला में क्रांतिकारी साथियों की याद में 41वां स्मृति समारोह: जल, जंगल और जमीन की लड़ाई का संकल्प SocialJusticeActivism, CommunitySolidarity, MemorialEventKesla

  • Apr 30
  • 2 min read

नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश): साथी राजनारायण, सुनील और अन्य दिवंगत संगठन साथियों की याद में केसला स्थित संगठन कार्यालय में 41वां स्मृति समारोह गरिमामयी उपस्थिति में मनाया गया। 28 अप्रैल को आयोजित इस कार्यक्रम में चार जिलों के अलावा दिल्ली और मुंबई से आए युवाओं, महिलाओं और पुरुषों ने क्रांतिकारी शहीद साथियों के विचारों पर चलने और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया।

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विचारधारा और संघर्ष की विरासत

कार्यक्रम की शुरुआत शहीद क्रांतिकारी साथियों को जिंदाबाद और सलाम के साथ हुई। मुख्य अतिथि कश्मीर उप्पल की उपस्थिति में विचारों को साझा किया गया। गोपाल राठी ने वर्तमान परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब समय पहले जैसा नहीं रहा है। धरातल पर समस्याएं और गहरी हुई हैं और सरकार जन आंदोलनों को कुचलने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जल, जंगल और जमीन जैसे संसाधनों को गरीबों से छीनकर पूंजीपतियों और निवेशकों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।

एकजुटता और जन-आंदोलन पर जोर

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने अपनी बात रखी:

कपिल खंडेलवाल ने कहा कि वर्तमान कठिन समय में सभी संगठनों को एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है। उन्होंने युवाओं से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि गरीबों के मुद्दों को वर्चस्व की लड़ाई नहीं बनाना चाहिए।

अनुराग भाई ने वैचारिक मजबूती की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि पानी के संकट से निपटने के लिए अधिक पेड़ लगाने की जरूरत है।

दुलेश उईके ने पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के उल्लंघन का मुद्दा उठाया।

लक्ष्मी सोनी, रावलसिंह, हीरालाल और गोलू ने कहा कि गरीबों के अधिकारों के लिए अब सड़कों पर उतरकर इंकलाब करने का समय आ गया है। SocialJusticeActivism, CommunitySolidarity, MemorialEventKesla

रचनात्मक कार्य और पर्यावरण संरक्षण

राजेंद्र गढ़वाल ने बताया कि श्रमिक आदिवासी संगठन द्वारा अब तक 50 हजार फलदार पौधे लगाए गए हैं, जो अब फल दे रहे हैं। कोरोना काल में यही फल लोगों के जीवन निर्वाह का सहारा बने। तारा वरकड़े ने याद दिलाया कि केसला क्षेत्र में पानी की उपलब्धता राजनारायण और सुनील भाई के संघर्षों और जंगल सत्याग्रह की देन है।

ऐतिहासिक संदर्भ और श्रद्धांजलि

मुख्य वक्ता कश्मीर उप्पल ने 1978 के दौर को याद करते हुए बताया कि कैसे राजनारायण और सुनील ने विद्यार्थी राजनीति से निकलकर होशंगाबाद और इटारसी के ग्रामीण क्षेत्रों में काम शुरू किया। उन्होंने एक उपन्यास का उदाहरण देकर समझाया कि कैसे जड़ें और मिट्टी जलस्तर को बनाए रखती हैं। अंत में सभी दिवंगत साथियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

उपस्थिति


इस अवसर पर आलोक सागर, लक्ष्मी सोनी, डॉक्टर समीर खान, विशेष जोठे, राजीव बामने, रामदीन गज्जाम, हीरालाल, बिस्तोरी, रिंकी, सुनीता और उर्मिला सहित ग्रामीण अंचलों से सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे। आभार प्रदर्शन फागराम द्वारा किया गया।

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