ओंकारेश्वर: गोदड़ अखाड़ा ट्रस्ट की संपत्तियों को लेकर उठे सवाल, जांच की मांग (Omkareshwar,Godad Akhada, LegalDisputes, PropertyTransparency, PublicTrustsAct)
- Jun 20
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ओंकारेश्वर (खंडवा): खंडवा जिले की पुनासा तहसील के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक 'गोदड़ अखाड़ा ट्रस्ट' (पंजीयन क्रमांक 329) की कार्यप्रणाली और उसकी संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जिला प्रशासन को सौंपी गई एक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की इस सार्वजनिक धार्मिक संपत्ति को निजी पारिवारिक संपत्ति में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।

अरबों की संपत्ति पर विवाद
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस 65 वर्ष पुराने दशनामी संप्रदाय के सार्वजनिक ट्रस्ट के पास बहुमूल्य संपत्तियां हैं, जिनमें शामिल हैं:
ग्राम बसावा और भोकर (खंडवा-इंदौर मुख्य मार्ग) पर स्थित लगभग 72 एकड़ कृषि भूमि।
ओंकारेश्वर के मुख्य बाजार में स्थित कई व्यावसायिक दुकानें।
ब्रह्मपुरी क्षेत्र के झूला पुल मार्ग पर स्थित करीब डेढ़ एकड़ प्राइम लैंड।
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'पावर ऑफ अटॉर्नी' और संचालन पर कानूनी सवाल
दस्तावेजों और शिकायत के मुताबिक, ट्रस्ट के वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष महंत घनश्याम पुरी (उम्र लगभग 80 वर्ष) लंबे समय से अस्वस्थ हैं और अधिकांश समय उत्तराखंड में बिताते हैं।
मुख्य आरोप: आरोप है कि उनके बड़े पुत्र अजय पुरी (जो पूर्व में हरिद्वार में वकालत करते थे) उनके नाम पर जारी 'पावर ऑफ अटॉर्नी' के माध्यम से ट्रस्ट का संचालन कर रहे हैं।
कानूनी पहलू: शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यह व्यवस्था 'मध्यप्रदेश लोक न्यास अधिनियम' (MP Public Trusts Act) के प्रावधानों के विपरीत है।
क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) को लेकर संतों और पत्रकारों की परेशानी
शिकायत में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि गोदड़ अखाड़ा ट्रस्ट की सभी संपत्तियां खंडवा जिला मुख्यालय के न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) में आती हैं। इसके बावजूद, ट्रस्ट से जुड़े मामलों को लेकर हरिद्वार (उत्तराखंड) में 'गोदड़ अखाड़ा समिति' नाम से एक नई संस्था पंजीकृत कराई गई है।
मुकदमों का आरोप: आरोप है कि स्थानीय पत्रकारों और वरिष्ठ संतों को परेशान करने की नीयत से 1200 किलोमीटर दूर हरिद्वार की अदालतों में मामले दर्ज कराए गए।
न्यायालय से राहत: पत्रकार प्रभाकर केरलकर और ललित दुबे के विरुद्ध दर्ज कराए गए मानहानि (धारा 499, 500) के मामले साक्ष्य के अभाव में अदालत द्वारा पहले ही खारिज किए जा चुके हैं।

ट्रस्टियों को हटाने और नए ट्रस्टी बनाने का विवाद
वर्ष 2016-17 के एक घटनाक्रम का हवाला देते हुए शिकायत में कहा गया है कि तत्कालीन मुख्य ट्रस्टी ने अन्य सदस्यों को विश्वास में लिए बिना अपने दो पुत्रों (अजय पुरी और विजय पुरी) को ट्रस्टी बनाने का प्रयास किया था।
इसके साथ ही, दो वरिष्ठ ट्रस्टियों—स्वामी सच्चिदानंद गिरी जी महाराज (अन्नपूर्णा आश्रम) और स्वामी प्रणवानंद जी सरस्वती (मार्कंडेय सन्यास आश्रम)—को ट्रस्ट से बाहर करने का आवेदन उप-पंजीयक कार्यालय पुनासा में दिया गया था।
हालांकि, तत्कालीन अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) एवं IAS अधिकारी श्रीमती शीतल पतले ने संतों का पक्ष जानने के बाद इस आवेदन को खारिज कर दिया था।
वित्तीय अनियमितता और बैठकों का अभाव
ट्रस्ट के अन्य सदस्यों और शिकायतकर्ताओं ने वित्तीय पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं:
8 वर्षों से ऑडिट और बैठकें बंद: आरोप है कि पिछले आठ सालों से ट्रस्ट की कोई आधिकारिक बैठक नहीं बुलाई गई है और न ही सालाना आय-व्यय (जिसका अनुमान 20 से 25 लाख रुपये वार्षिक है) का विवरण दिया गया है।
एकल खाता संचालन: नियमों के विपरीत, ट्रस्ट के बैंक खातों और एफडी (FD) का संचालन कथित तौर पर केवल एक ही व्यक्ति (महंत घनश्याम पुरी) द्वारा किया जा रहा है, जबकि सार्वजनिक न्यास के नियमों के तहत संयुक्त हस्ताक्षर (Joint Signatures) अनिवार्य होते हैं।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की गुहार
पूर्व में वरिष्ठ ट्रस्टी सच्चिदानंद गिरी जी महाराज (वर्ष 2021-22) और महंत संविदानंद पुरी जी महाराज (वर्ष 2023) द्वारा पुनासा उप-पंजीयक कार्यालय में शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उचित कार्रवाई नहीं हुई। दशनामी संप्रदाय से जुड़े संतों और स्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर खंडवा से मांग की है कि इस सार्वजनिक लोक न्यास की संपत्ति की सुरक्षा के लिए उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।











