आदिवासियों ने पेड़-पौधों की पारंपरिक पूजा कर मनाया विश्व पर्यावरण दिवस EnvironmentalConservation, TreePlantingInitiatives, CommunityEngagement
- Jun 8
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घोड़ाडोंगरी। श्रमिक आदिवासी संगठन और समाजवादी जनपरिषद के कार्यकर्ताओं ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक अनूठी मिसाल पेश की। घोड़ाडोंगरी ब्लॉक की नूतनडग्गा पंचायत के ग्राम मरकाढाना (मांडूखेड़ा) में आदिवासियों ने अपनी पारंपरिक रीति-रिवाज से फूलदार-छायादार पेड़-पौधों और धरती माता की प्राकृतिक पूजा-अर्चना कर पर्यावरण दिवस मनाया।

तीन महीने तक चलेगा सघन पौधरोपण अभियान
पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए संगठन ने 5 जून 2026 से 30 अगस्त 2026 तक एक व्यापक अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत बैतूल जिले के चिचोली, शाहपुर, घोड़ाडोंगरी और हरदा जिले के टिमरनी ब्लॉक में हजारों की संख्या में फलदार पौधे लगाए जाएंगे।
कार्यकर्ताओं ने केवल पौधे लगाने ही नहीं, बल्कि आगामी तीन वर्षों तक उनकी पूर्ण सुरक्षा करने की भी शपथ ली। इसके अंतर्गत पौधों के चारों ओर कांटा और खेड़ी लगाने तथा गर्मी के दिनों में पानी देने की जिम्मेदारी तय की गई है।
2007 से अब तक लगाए 50 हजार पौधे, कोरोना काल में बने आजीविका का साधन
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2007 से 2025 तक हर साल जुलाई-अगस्त महीने में 'हरियाली रैली' निकालकर जन-जागरूकता फैलाई जाती है। हाट-बाजारों में पर्चे बांटकर आम जनता से पेड़ लगाने की अपील की जाती है।
इस अभियान के तहत अब तक करीब 50 हजार पेड़-पौधों का रोपण किया जा चुका है, जो अब पूरी तरह फल देने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि कोरोना काल के संकट के समय स्थानीय लोगों ने इन पेड़ों के फल बेचकर अपनी आजीविका चलाई थी। धरती को हरा-भरा करने, नदी-नालों को बचाने और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से यह कार्य किया जा रहा है।
जिला प्रशासन से 50 हजार निःशुल्क फलदार पौधों की मांग
संगठन के प्रमुख राजेंद्र गढ़वाल और स्थानीय आदिवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस अभियान को गति देने के लिए समाज को 50 हजार फलदार पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएं। इनमें मुख्य रूप से आम, जाम (अमरूद), जामुन, कटहल, नींबू, मूंगा (सहजन), महुआ, करोंदा और आंवला जैसे प्रजातियों के पौधे शामिल हैं।
अभियान में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
इस पर्यावरण उत्सव और संकल्प सभा में संगठन के राजेंद्र गढ़वाल, सुमारलाल, गोरेलाल, करणसिंह, बट्टूलाल, चेरसिंह, कमल, कुशीलाल, झमियाबाई, श्यामवती और गुड्डीबाई सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।











