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भारतीय रेलवे की बड़ी उपलब्धि: देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन संचालन के लिए तैयार !IndianRailwaysTech, NetZeroEmissions, HydrogenFuelChallenges

  • May 27
  • 2 min read

नई दिल्ली(Courtesy pib): हरित और टिकाऊ परिवहन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए भारतीय रेलवे ने उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत खंड पर 10-कार वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल-आधारित ट्रेनसेट के संचालन को मंजूरी दे दी है। यह ट्रेन 1200 किलोवाट (KW) के हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम द्वारा संचालित होगी और 75 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से चलेगी।

इस शुरुआत के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों (जैसे जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका) के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गया है, जो स्वच्छ रेल संचालन के लिए हाइड्रोजन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।

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  • रूट और रिफ्यूलिंग: हरियाणा के जींद-सोनीपत खंड को पायलट रूट के रूप में चुना गया है। जींद में एक स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और रिफ्यूलिंग सुविधा स्थापित की गई है, जिसे पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से लाइसेंस मिल चुका है।

  • सुरक्षा प्रणालियाँ: रिफ्यूलिंग सुविधा में हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर और फ्लेम डिटेक्टर जैसे सुरक्षा सेंसर लगाए गए हैं। साथ ही, शकूरबस्ती में प्रस्तावित रखरखाव सुविधा के लिए सुरक्षा ऑडिट और मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) सुनिश्चित की जा रही हैं।

  • शुरुआती निगरानी: शुरुआती चरण के दौरान, ट्रेन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रमाणित और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी लगातार ट्रेन में मौजूद रहेंगे।

यह परियोजना भारतीय रेलवे की ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल परिवहन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो भारत के नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक होगी। इस परियोजना को रेल मंत्रालय और संबंधित विभागों के संयुक्त प्रयासों से धरातल पर उतारा जा रहा है।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक: मुख्य चुनौतियाँ

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यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल जरूर है, लेकिन इसके व्यापक स्तर पर कार्यान्वयन के सामने कई तकनीकी और आर्थिक चुनौतियाँ हैं:

  1. उच्च उत्पादन लागत: वर्तमान में 'ग्रीन हाइड्रोजन' (जो पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा से बनती है) का उत्पादन काफी महंगा है। इसके लिए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रोलाइजर और स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

  2. भंडारण और परिवहन : हाइड्रोजन बेहद हल्की और अत्यधिक ज्वलनशील गैस है। इसे सुरक्षित रूप से स्टोर करने के लिए बहुत उच्च दबाव या अत्यधिक कम तापमान की आवश्यकता होती है, जो काफी जटिल और खर्चीला है।

  3. कम ऊर्जा दक्षता : बिजली से हाइड्रोजन बनाने और फिर हाइड्रोजन से वापस ट्रेन चलाने के लिए बिजली बनाने की प्रक्रिया में ऊर्जा का काफी नुकसान (Energy Loss) होता है। सीधे बैटरी या ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइनों की तुलना में इसकी कुल दक्षता (Efficiency) कम होती है।

  4. इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभाव: देश भर में हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन और सुरक्षित पाइपलाइन नेटवर्क तैयार करने के लिए बहुत भारी निवेश की जरूरत होगी।

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