शाहपुर: बीईओ की तानाशाही और "फिसड्डी" परीक्षा परिणामों ने खोली पोल; 8 दिन बाद भी दिव्यांग शिक्षिका को न्याय का इंतज़ार! InclusiveEducation, DisabledTeacherRights, EducationSystemCrisis
- Apr 25
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शाहपुर/बैतूल | 24 अप्रैल 2026
शाहपुर ब्लॉक में जनजातीय कार्य विभाग के तहत आने वाली शिक्षा व्यवस्था वर्तमान में दोहरे संकट से गुजर रही है। एक ओर जहाँ 80% दिव्यांग शिक्षिका के साथ हुए दुर्व्यवहार का मामला 8 दिनों से न्याय की बाट जोह रहा है, वहीं दूसरी ओर हाल ही में जारी बोर्ड परीक्षा परिणामों ने ब्लॉक की शैक्षणिक गुणवत्ता की पोल खोल दी है। इस पूरे प्रकरण पर कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने संज्ञान लेते हुए कहा है कि वह स्वयं इन व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण करवाएंगे।

एमपी बोर्ड औसत से पिछड़ा शाहपुर का प्रदर्शन
माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा जारी सत्र 2025-26 के परिणामों के विश्लेषण से पता चलता है कि शाहपुर ब्लॉक का शैक्षणिक स्तर चिंताजनक है।
कक्षा 10वीं का विश्लेषण: एमपी बोर्ड का राज्य स्तरीय औसत 73.42% रहा है, जबकि शाहपुर ब्लॉक का औसत मात्र 71.73% पर सिमट गया है।
कक्षा 12वीं का विश्लेषण: एमपी बोर्ड का राज्य औसत 76.01% रहा, जबकि शाहपुर ब्लॉक का औसत 81.44% है। हालांकि यह औसत से बेहतर है, लेकिन कई व्यक्तिगत स्कूलों के परिणाम दयनीय हैं।
60% से कम परिणाम वाले "रेड जोन" स्कूल:
ब्लॉक के कई स्कूलों में शिक्षा का स्तर इतना गिर चुका है कि वहां का परिणाम 60% का आंकड़ा भी नहीं छू सका। जिन स्कूलों में प्राचार्य नहीं हैं, वहां बीईओ की सीधी जवाबदेही बनती है।
कक्षा 10वीं (फेल होते स्कूल):
शासकीय हाईस्कूल ढोढरामऊ: मात्र 27.58% परिणाम।
शासकीय हाईस्कूल डाबरी: मात्र 30% परिणाम।
शासकीय हाईस्कूल फोफल्या: मात्र 50% परिणाम।
शासकीय हाईस्कूल कुप्पा: मात्र 51.00% परिणाम।
शासकीय हाईस्कूल धार: मात्र 55.5% परिणाम।
शासकीय हाईस्कूल तारा: मात्र 57.77% परिणाम।
शासकीय हाईस्कूल सिलपटी: मात्र 59.25% परिणाम।
कक्षा 12वीं:
शासकीय उ.मा.वि. रामपुर माल: मात्र 56.75% परिणाम।
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दिव्यांग शिक्षिका प्रताड़ना: 8 दिन की चुप्पी और कानूनी पेच
नया निशान गाँव की दिव्यांग शिक्षिका के साथ बीईओ द्वारा किए गए अपमानजनक व्यवहार को अब 8 दिन बीत चुके हैं। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि कानूनी रूप से एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) की श्रेणी में आता है।
ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार 2014: सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, यदि किसी संज्ञेय अपराध की सूचना मिलती है, तो पुलिस के लिए एफआईआर (FIR) दर्ज करना अनिवार्य है। दिव्यांग शिक्षिका को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना और उनके अधिकारों का हनन करना आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 के तहत दंडनीय है।
विधायक की "पोल" खुली: विदिशा विधायक मुकेश टंडन ने 8 दिन पहले इस घटना की निंदा करते हुए कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक उनकी ओर से कोई फॉलोअप नहीं आया है। यह चुप्पी दर्शाती है कि पीड़ित को न्याय दिलाने के आश्वासन केवल कागजी थे।
"मैं निरीक्षण करवाता हूँ" - कलेक्टर
बीईओ की तानाशाही और गिरते शैक्षणिक स्तर को लेकर कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ब्लॉक में शिक्षा की गुणवत्ता और अधिकारियों के आचरण दोनों की जाँच के लिए वह निरीक्षण करवाएंगे।
मुख्य प्रशासनिक सवाल:
जब एमपी बोर्ड का औसत 73.42% है, तो शाहपुर के स्कूल 27% पर क्यों गिरे?
ललिता कुमारी जजमेंट के बावजूद, संज्ञेय अपराध के इस मामले में अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई?
क्या बीईओ के "प्रशासनिक रसूख" के कारण ही विदिशा विधायक और अन्य स्थानीय नेता मौन हैं?
अब सबकी निगाहें कलेक्टर के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या शाहपुर के बच्चों को बेहतर शिक्षा और उस दिव्यांग माँ को न्याय मिल पाएगा?











