कागजी दावों के बीच जमीनी हकीकत: शाहपुर हाईवे पर मंडी शुल्क चोरी का भंडाफोड़, क्या सिर्फ जुर्माने से रुकेगा अवैध परिवहन? IllegalTrade, SupplyChainIntegrity, RuralEconomy
- May 23
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मध्य प्रदेश में कृषि उपज के अवैध परिवहन और टैक्स चोरी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला नेशनल हाईवे-46 (NH-46) का है, जहां संभागीय जांच दल मंडी बोर्ड भोपाल ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 26 टन मक्का से लदे एक वाहन को पकड़ा है। यह खेप बिना किसी वैध अनुज्ञा पत्र (परमिट) के शाहपुर के रास्ते भोपाल ले जाई जा रही थी। शुरुआती जांच में साफ हुआ है कि इस पूरे खेल के पीछे मंडी शुल्क की चोरी करना मुख्य मकसद था।

इस कार्रवाई के बाद भले ही विभाग अपनी पीठ थपथपा रहा हो, लेकिन यह मामला व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है।
5 गुना जुर्माना: समाधान या सिर्फ एक तात्कालिक कार्रवाई?
मंडी अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए वाहन को शाहपुर कृषि उपमंडी के सुपुर्द कर दिया गया है और कृषि उपज के कुल मूल्य के आधार पर संबंधित व्यापारी पर 5 गुना मंडी शुल्क (पेनल्टी) लगाया जाएगा। इस कार्रवाई में मंडी निरीक्षक अनूप सिंह, उप निरीक्षक गौतम सिंह रघुवंशी और शिवम कार्तिके की टीम शामिल रही।IllegalTrade, SupplyChainIntegrity, RuralEconomy
लेकिन सवाल यह है कि:
क्या यह पहली बार हो रहा है? हाईवे पर सघन चेकिंग के दौरान एक गाड़ी का पकड़ा जाना यह साबित करता है कि परमिट के बिना माल को एक शहर से दूसरे शहर भेजना कितना आसान हो चुका है। जानकार मानते हैं कि जो गाड़ियां पकड़ी जाती हैं, वह कुल अवैध परिवहन का महज एक छोटा सा हिस्सा होती हैं।
सिस्टम की कमियां: जब तक उड़नदस्ता टीम हाईवे पर नहीं उतरती, तब तक बिना परमिट की गाड़ियां आसानी से नाकों को पार कर जाती हैं। ऐसे में डिजिटल गवर्नेंस और सख्त निगरानी के तमाम सरकारी वादे जमीनी स्तर पर कमज़ोर नजर आते हैं।
व्यापारियों में हड़कंप, पर जड़ से खत्म नहीं हो रहा नेटवर्क
इस कार्रवाई के बाद शाहपुर और आसपास के क्षेत्र के व्यापारियों और परिवहनकर्ताओं में हड़कंप जरूर मचा है, लेकिन पर्यावरण और कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि सिर्फ जुर्माने की कार्रवाई से इस सिंडिकेट को नहीं तोड़ा जा सकता। मंडी शुल्क से बचने के लिए व्यापारी लगातार नए-नए रास्ते अपनाते हैं, जिससे न केवल सरकार के राजस्व को नुकसान होता है बल्कि ईमानदार व्यापारियों के व्यापार पर भी बुरा असर पड़ता है।
अधिकारियों ने आगे भी ऐसा अभियान जारी रखने की बात कही है, लेकिन देखना यह होगा कि क्या भविष्य में ऐसी चोरियों पर पूरी तरह लगाम लग पाएगी या फिर यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।











