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कोयला माफिया पर प्रशासन का दोहरा प्रहार: डुल्हारा-सिवनपाट में अवैध स्टॉक जप्त, सिंडिकेट पर 'रासुका' की तलवार IllegalMiningCrisis, CommunityImpact, LawEnforcementActions

  • May 9
  • 2 min read

बैतूल | जिले में अवैध उत्खनन और माफियाओं के खिलाफ कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के निर्देश पर खनिज विभाग का 'क्लीन स्वीप' अभियान निरंतर जारी है। घोड़ाडोंगरी तहसील के तवा नदी तटीय क्षेत्रों में सक्रिय कोयला माफिया अब प्रशासन की सघन घेराबंदी के कारण भूमिगत होने को मजबूर है।

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ताजा कार्रवाई: लावारिस कोयला जप्त, चोपना पुलिस को सौंपा

शुक्रवार, 08 मई 2026 को खनिज विभाग के अमले ने ग्राम डुल्हारा और सिवनपाट में औचक निरीक्षण किया।

  • जब्ती: निरीक्षण के दौरान नदी क्षेत्र में लगभग 01 ट्राली लावारिस कोयला भंडारित पाया गया।

  • पुलिस अभिरक्षा: जप्त किए गए इस अवैध कोयले को तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस थाना चोपना की अभिरक्षा में दे दिया गया है।

  • सतर्कता: टीम को मौके पर फिलहाल कोई नया उत्खनन या ताजा गड्ढे नहीं मिले हैं और पूर्व के गड्ढे भी बंद पाए गए, जो प्रशासन के बढ़ते दबाव को दर्शाता है।

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फ्लैशबैक: जब जेसीबी से ध्वस्त की गई थीं सुरंगनुमा खदानें

यह क्षेत्र लंबे समय से माफियाओं के निशाने पर रहा है। इससे पूर्व 1 अप्रैल 2026 को प्रशासन ने इस क्षेत्र में एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की थी:

  • सुरंगें नष्ट: तवा नदी के भीतर संचालित हो रही सुरंगनुमा अवैध खदानों को जेसीबी मशीनों के जरिए पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था।

  • नदी की धारा मोड़ी: माफियाओं तक पहुँचने और गड्ढों को भरने के लिए विभाग ने नदी की जलधारा तक को मोड़ दिया था और खदानों को मिट्टी व बोल्डर से पाट दिया था।

  • सिंडिकेट सक्रिय: विभाग के पास पुख्ता सूचना है कि यहाँ एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है, जो स्थानीय स्तर पर अवैध उत्खनन को बढ़ावा देता है।

सफेदपोशों पर नजर और 'रासुका' की चेतावनी

प्रशासन अब उन चेहरों की पहचान करने में जुटा है जो पर्दे के पीछे से इस काले कारोबार को संरक्षण दे रहे हैं।

  • संदिग्ध सूची: सूत्रों के अनुसार, खनिज विभाग को कुछ संदिग्ध 'सफेदपोशों' के नामों की सूची प्राप्त हुई है, जिनकी संलिप्तता की बारीकी से जांच की जा रही है।

  • कठोर कानूनी प्रावधान: खनिज विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि भविष्य में कोई भी व्यक्ति अवैध उत्खनन या परिवहन में संलिप्त पाया जाता है, तो उस पर रासुका (NSA) जैसी कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।

  • ग्रामीणों का मौन: हालांकि माफिया के डर के कारण ग्रामीण खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन विभाग ने गुप्त सूचना तंत्र के माध्यम से सतत निगरानी शुरू कर दी है।


प्रशासन की सख्ती ने फिलहाल उत्खनन पर लगाम लगा दी है, लेकिन लावारिस स्टॉक की जब्ती यह संकेत देती है कि माफिया अभी भी सक्रिय होने की फिराक में है। खनिज विभाग का सघन अभियान और रासुका की चेतावनी माफियाओं के हौसले पस्त करने के लिए काफी है!

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