मध्यप्रदेश: अवैध सागौन परिवहन पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, आरोपी को 'संदिग्ध पानी' पिलाने के आरोपों के बाद अस्पताल में भारी हंगामा IllegalLoggingCrisis, ForestDepartmentScandal, HealthImpactProtests
- Jul 19
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प्रदेश में अवैध वनोपज के परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत वन विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से सागौन की चरपट ले जा रहे एक ट्रैक्स वाहन को जब्त किया है। गश्त के दौरान मुखबिर की सूचना पर रात करीब 2 बजे एक संदिग्ध ट्रैक्स जीप (क्रमांक MP 14 TB 0336) को रोककर जांच की गई। तलाशी के दौरान वाहन से 0.626 घनमीटर सागौन की 8 नग चरपट बरामद की गईं, जिनकी अनुमानित कीमत 25 हजार रुपए आंकी गई है। वन अमले ने तस्करी में प्रयुक्त वाहन को जब्त कर उसे राजसात करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस मामले में दो आरोपियों अरनेश (अरनीश) पिता जगदीश राठौर और संजू पिता भागुलाल विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर भारतीय वन अपराध अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

इस बड़ी कार्रवाई के बाद मामले में उस समय एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया, जब गिरफ्तार किए गए आरोपी अरनीश ने वन विभाग के कर्मचारियों पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए। आरोपी को दिन में मुचलके पर छोड़ दिया गया था, लेकिन पंचनामा और मौके की वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए वन अमला उसे दोबारा क्षेत्र के एक नजदीकी जंगल लेकर गया था। अरनीश का दावा है कि जंगल में कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद नौ वनकर्मियों ने खुद एक अलग बोतल से पानी पिया, जबकि उसे वाहन से निकालकर दूसरी बोतल का पानी दिया गया। आरोपी का आरोप है कि वह पानी पीते ही उसे तेज घबराहट, बेचैनी और लगातार उल्टियां होने लगीं, जिससे उसकी शारीरिक स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी।
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आरोपी की हालत गंभीर होते देख वन विभाग के कर्मचारी उसे आनन-फानन में शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। घटना की जानकारी मिलते ही आरोपी के परिजन और स्थानीय ग्रामीण भी भारी संख्या में अस्पताल परिसर में एकत्र हो गए। वहां परिजनों ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही और 'संदिग्ध पदार्थ' पिलाने का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध-प्रदर्शन और हंगामा किया। इस गहमागहमी के दौरान ड्यूटी पर तैनात रेंजर मोहन आरसे के साथ धक्का-मुक्की होने की बात भी सामने आई है। अस्पताल में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा और सूझबूझ से हालात को नियंत्रित किया।
तबीयत में अपेक्षित सुधार न होने के कारण डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद अरनीश को जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जिसके बाद परिजन उसे बेहतर इलाज के लिए एक निजी अस्पताल ले गए। फिलहाल प्रदेश के इस हिस्से में इस घटना को लेकर विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक और राजनैतिक चर्चाएं गर्म हैं। वन विभाग की ओर से इस पूरे घटनाक्रम और पानी में कुछ मिलाए जाने के आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक खंडन या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। पुलिस प्रशासन और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए इसकी निष्पक्ष जांच में जुट गए हैं।











