खबर का बड़ा असर: शाहपुर मंडी में खुलासे के बाद व्यापारियों में हड़कंप, रातों-रात खाली,शाहपुर मंडी में 'सिस्टम' का सरेंडर: समर्थन मूल्य से400 रुपये कम पर बिक रहा गेहूं, सुविधाओं पर व्यापारियों का 'कब्जा'
- Apr 13
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शाहपुर | शाहपुर कृषि उपज मंडी में अव्यवस्थाओं और किसानों के शोषण को लेकर हुए खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है। GAMAKI JOURNAL™ (GAMAKI MEDIA) की सक्रियता और प्रशासनिक सख्ती की आहट मिलते ही व्यापारियों ने रातों-रात मंडी परिसर से अपना अवैध रूप से डंप किया गया माल हटाना शुरू कर दिया है। हालांकि किसान विश्राम गृह में अभी भी व्यापारियों का अवैध कब्ज़ा काबिज है !,मंडी में खड़े संदिग्ध वाहनों और विभागों के बीच जारी 'तालमेल की कमी' ने अब भी खरीदी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा रखे हैं।

दबाव में आए व्यापारी: रफूचक्कर हुआ सड़ा अनाज
मंडी के टीन शेड और किसानों के विश्राम गृह पर व्यापारियों ने लंबे समय से कब्जा कर रखा था। यहाँ महीनों पुरानी सड़ी हुई मक्का डंप थी, जिससे नई फसल में संक्रमण का खतरा बना हुआ था। खबर के प्रभाव से घबराए व्यापारियों ने कानूनी कार्रवाई के डर से आनन-फानन में रातों-रात माल ठिकाने लगा दिया। किसानों का कहना है कि जो काम मंडी प्रबंधन हफ्तों में नहीं कर सका, वह 'खबर' के दबाव ने चंद घंटों में कर दिखाया।
हालांकि, टीन शेड से माल तो हट गया है, लेकिन मंडी परिसर में बिना नंबर की गाड़ियां और भारी ट्रक अब भी जस के तस खड़े हैं, जो प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

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समर्थन मूल्य बनाम व्यापारियों की मनमानी
जमीनी हकीकत अब भी चिंताजनक है। एक ओर सरकारी सहकारी समितियां ₹2625 प्रति क्विंटल (बोनस सहित) की दर से गेहूं खरीद रही हैं, वहीं दूसरी ओर मंडी में व्यापारियों द्वारा नीलामी ₹2200 से शुरू की जा रही है। नियमों के अनुसार नीलामी का आधार मूल्य 'समर्थन मूल्य' होना चाहिए, लेकिन गुणवत्ता के नाम पर अधिकारियों के हस्तक्षेप न करने से किसानों को प्रति क्विंटल ₹400 का सीधा घाटा हो रहा है।
'प्लेटफॉर्म' विवाद: सहकारिता और मंडी समिति के बीच ठनी
मंडी में अव्यवस्था के पीछे एक बड़ा कारण विभागीय खींचतान भी है। सहकारिता विभाग (जो समर्थन मूल्य पर खरीदी कर रहा है) को उस शेड की आवश्यकता है जिसका प्लेटफॉर्म नीचे है, ताकि किसानों के ट्रैक्टर आसानी से अंदर जा सकें।
सहकारिता विभाग: "हमने मंडी समिति से शेड मांगा है ताकि किसानों को दिक्कत न हो।"
मंडी समिति: "हमें ऊपर से ऐसा कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।"
पत्रकार द्वारा पूछने पर डिप्टी कमिश्नर (सहकारिता) ने इस मामले में हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की बात कही है, लेकिन विभागों के बीच फंसे किसान तपती धूप में अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं।

अधिकारियों का लापरवाह रवैया
सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर मंडी प्रभारी के तर्क अब भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं। परिसर में खड़े संदिग्ध वाहनों की जिम्मेदारी आरटीओ पर डालना और चोरी की स्थिति में 'सीसीटीवी से पकड़ लेंगे' जैसे बयान विभाग की गंभीरता पर सवाल उठाते हैं। शनिवार को खरीदी बंद होने के बावजूद किसानों को बुलाकर घंटों बाहर खड़ा रखना इसी लापरवाही की अगली कड़ी है।
प्रशासनिक रुख
शाहपुर तहसीलदार टी. वास्के ने स्पष्ट किया है कि टीम भेजकर जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि किसानों के हक में बाधा डालने वाली हर अव्यवस्था को दूर किया जाएगा।
निष्कर्ष: शाहपुर मंडी में व्यापारियों द्वारा माल हटाया जाना एक सकारात्मक शुरुआत है, लेकिन असली जीत तब होगी जब किसानों को उनकी उपज का सही दाम (MSP) मिले और मंडी की सुविधाएं व्यापारियों के बजाय किसानों के उपयोग में आएं। प्रशासन को अब उन 'बिना नंबर' की गाड़ियों और विभागीय समन्वय पर ध्यान देना होगा, जो सरकारी खरीदी की राह में रोड़ा बने हुए हैं।











