विधानसभा चुनाव 2026: मतदान से मतगणना तक 'ड्राई-डे' का सख्त पहरा; चुनाव आयोग ने मदिरा बिक्री पर लगाई रोक ElectoralIntegrity, VoterManipulationPrevention, DryDaysPolicy
- Apr 20
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नई दिल्ली। 2026 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और शांति बनाए रखने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने असम, केरल, पुद्दुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदान के अंतिम 48 घंटों और मतगणना के दिन को 'ड्राई-डे' (Dry Day) घोषित करने के निर्देश जारी किए हैं।
यह आदेश न केवल सरकारी शराब दुकानों, बल्कि क्लबों, स्टार होटलों और निजी प्रतिष्ठानों पर भी समान रूप से प्रभावी होगा।

कानूनी ढांचा: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 135सी
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135सी के तहत लागू किया जा रहा है। इस कानून के तहत चुनाव वाले क्षेत्रों में मतदान समाप्त होने के 48 घंटे पहले से ही मदिरा की बिक्री, वितरण और भंडारण पर पूर्णतः रोक लगा दी जाती है।
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महत्वपूर्ण तिथियां: कब-कब बंद रहेंगी मदिरा की दुकानें?
आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, अलग-अलग चरणों के लिए ड्राई-डे की समय सीमा इस प्रकार रहेगी:
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल (चरण-I): मतदान की तिथि 23 अप्रैल है, अतः मतदान समाप्त होने के समय से 48 घंटे पूर्व ही ड्राई-डे प्रभावी हो जाएगा।
पश्चिम बंगाल (चरण-II): 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए भी यही 48 घंटे का नियम लागू होगा।
मतगणना दिवस (4 मई, 2026): सभी पांच राज्यों और उपचुनाव वाले क्षेत्रों में मतगणना के दिन पूर्ण 'ड्राई-डे' रहेगा।
"शून्य सहनशीलता": आयोग के निर्देशों के मुख्य अंश
पीआईबी (PIB) द्वारा जारी सूचना के अनुसार, आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि शराब के अवैध वितरण को रोकने के लिए सख्त निगरानी रखी जाएगी।
आयोग के निर्देशानुसार: "किसी भी मतदान क्षेत्र में चुनाव के लिए निर्धारित मतदान के समापन के अड़तालीस घंटे पहले की अवधि के दौरान उस क्षेत्र के भीतर किसी होटल, भोजनालय, मदिरालय, दुकान या किसी अन्य सार्वजनिक या निजी स्थान पर कोई भी मदिरा या मादक पेय बेचे, दिए या वितरित नहीं किए जाएंगे।"
इसके अतिरिक्त, आयोग ने निजी क्लबों और होटलों के लिए भी सख्त हिदायत दी है:
"गैर-स्वामित्व वाले क्लब, स्टार होटल और रेस्तरां, जिनके पास मदिरा भंडारण का लाइसेंस है, उन्हें भी इन विशेष दिनों में मदिरा परोसने की अनुमति नहीं होगी। बिना लाइसेंस वाले परिसरों में मदिरा के भंडारण पर उत्पाद शुल्क कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"
विश्लेषण: क्यों जरूरी है यह प्रतिबंध?
चुनाव के दौरान 'ड्राई-डे' का कार्यान्वयन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
मतदाताओं को प्रलोभन से बचाना: अक्सर असामाजिक तत्वों द्वारा शराब को वोट के बदले प्रलोभन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
कानून-व्यवस्था: मतदान के दौरान हिंसा या तनाव की स्थिति को रोकने के लिए नशा-मुक्त वातावरण अनिवार्य है।
भंडारण पर लगाम: आयोग ने इस बार न केवल बिक्री बल्कि 'भंडारण में कटौती' की भी बात कही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि उत्पाद शुल्क विभाग (Excise Department) को अवैध गोदामों पर छापेमारी के लिए खुली छूट दी गई है।
निष्कर्ष: निर्वाचन आयोग का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि 4 मई को जब चुनावी नतीजे आएँ, तब तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनी रहे। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे पुनर्मतदान (यदि हो) की स्थिति में भी इन्ही नियमों का कड़ाई से पालन करें।











