शाहपुर एकलव्य आवासीय विद्यालय में फिर 'खेल': टेंडर घोटाले की कोशिश ने खोली पुरानी परतें, विवादों से रहा है गहरा नाता EducationalCorruption, StudentWelfareCrisis, ResidentialSchoolScandal
- May 18
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शाहपुर (बैतूल): जिले का एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शाहपुर एक बार फिर बड़े वित्तीय घालमेल और अनियमितताओं के घेरे में आ गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राशन, सब्जी, फल और दैनिक उपयोग की सामग्रियों की खरीदी के टेंडर में तीन दिनों तक चली कथित 'सेटिंग' के उजागर होने के बाद विद्यालय प्रबंधन को पूरी निविदा प्रक्रिया निरस्त करनी पड़ी है।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब यह विद्यालय प्रशासनिक और नैतिक लापरवाही के लिए सुर्खियों में आया है। साल 2024 के शर्मनाक सीसीटीवी वीडियो कांड से लेकर साल 2025 के बड़े छात्र आंदोलन तक, इस संस्थान का विवादों से पुराना नाता रहा है।

ताजा मामला (मई 2026): टेंडर में तीन दिन चली 'सेटिंग', विरोध बढ़ा तो निविदा निरस्त
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विद्यालय में राशन और अन्य आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति हेतु निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 09 मई 2026 शाम 4 बजे तक थी, जिसमें शाहपुर, बैतूल, हरदा, इंदौर और भोपाल जैसे शहरों के व्यापारियों ने अपने प्रपत्र भेजे थे।
नियमों की धज्जियां: नियम के अनुसार 12 मई 2026 को सुबह 11 बजे सभी निविदाएं खोली जानी थीं। लेकिन आरोप है कि क्रय समिति ने उसी दिन प्रक्रिया पूरी करने के बजाय एक चहेते व्यापारी को फायदा पहुंचाने के लिए तीन दिनों तक जोड़-तोड़ की।
संशोधित लिफाफा लेने का खेल: सूत्रों के अनुसार, 15 मई 2026 को शाहपुर के एक खास व्यापारी से संशोधित दरों वाला दूसरा लिफाफा लिया गया। इसे कार्यालय के बाबू यतीश समाधिया ने प्राचार्य की मौजूदगी में स्वीकार किया।
विरोध और निरस्तीकरण: जैसे ही अन्य निविदाकारों को इस गुप्त खेल का पता चला, उन्होंने विद्यालय परिसर में ही तीखी आपत्ति दर्ज कराई। मामला बढ़ता देख और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते देख प्राचार्य राम बहादुर वर्मा और समिति सदस्य कृष्ण कुमार कटारे ने आनन-फानन में पूरी निविदा प्रक्रिया को निरस्त कर दिया।
क्रय समिति के घेरे में आए नाम: इस पूरी हेराफेरी के पीछे विद्यालय की क्रय समिति शामिल है, जिसमें प्राचार्य राम बहादुर वर्मा, कृष्ण कुमार कटारे, बीआरसी राधेलाल भादे, अमर सिंह और बाबू यतीश समाधिया शामिल हैं। व्यापारियों ने अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
फ्लैशबैक 1 (सितंबर 2025): बदहाली से तंग आकर जब पैदल ही कलेक्टर से मिलने निकल पड़े थे 200 छात्र
विद्यालय में भ्रष्टाचार और व्यवस्थाओं की बदहाली का स्तर यह रहा है कि सितंबर 2025 में संस्थान के लगभग 200 छात्र-छात्राएं प्रबंधन के दुर्व्यवहार, खराब भोजन, गंदगी और मानसिक प्रताड़ना से क्षुब्ध होकर पैदल ही बैतूल कलेक्टर से मिलने निकल पड़े थे।
कलेक्टर की समझदारी: तत्कालीन कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए खुद शाहपुर पहुंचकर बच्चों को अपनी और प्रशासनिक वाहनों में बैठाकर सुरक्षित वापस लाया था।
प्राचार्य की मनमानी का खुलासा: जांच के दौरान छात्रों ने बताया था कि विद्यालय के प्राचार्य, नर्स और काउंसलर द्वारा उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जाता है। वहीं, स्कूल के शिक्षकों ने भी खुलासा किया था कि प्राचार्य उन पर खरीदी के फर्जी दस्तावेजों और सामग्रियों के बिलों पर जबरन हस्ताक्षर करवाते थे।
गाज गिरी और पद बदला: इस भारी विरोध के बाद राष्ट्रीय आदिवासी छात्र विकास समिति की डिप्टी कमिश्नर कुमुद कुशवाह ने तत्कालीन प्राचार्य पंकज शरण को तत्काल प्रभाव से हटाकर भोपाल अटैच कर दिया था और कृष्ण कुमार कटारे को प्रभारी प्राचार्य का प्रशासनिक और वित्तीय प्रभार सौंपा था। (जिसके बाद वर्तमान में राम बहादुर वर्मा को नया प्राचार्य बनाया गया)।
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फ्लैशबैक 2 (अक्टूबर 2024): छात्राओं के कपड़े बदलते समय वीडियो रिकॉर्डिंग और सबूत मिटाने का काला कांड
इस विद्यालय का सबसे शर्मनाक इतिहास अक्टूबर 2024 का है, जिसने आदिवासी छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी थी।
सीसीटीवी में कैद हुई थीं छात्राएं: नर्मदापुरम संभाग के तीन जिलों के 150 छात्र-छात्राएं जब संभाग स्तरीय साहित्य और ड्रामा प्रतियोगिता में भाग लेने आए थे, तब एक कमरे में छात्राओं ने कपड़े चेंज किए। उस कमरे में सीसीटीवी कैमरा चालू था, जिसमें छात्राओं के कपड़े बदलने का वीडियो रिकॉर्ड हो गया।
हार्ड डिस्क तोड़कर मिटाए सबूत: छात्राओं द्वारा आपत्ति दर्ज कराने और वीडियो रिकवर होने के डर से घबराए जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन ने मामले की वैधानिक जांच कराने के बजाय, रात गुजारने से पहले ही कंप्यूटर की हार्ड डिस्क को तोड़कर नष्ट कर दिया ताकि सबूत मिटाए जा सकें।
विधायक का फूटा था गुस्सा: इस घटना की भनक लगते ही स्थानीय विधायक गंगा उईके ने स्कूल पहुंचकर तत्कालीन प्राचार्य पंकज शरण को जमकर फटकार लगाई थी और हार्ड डिस्क तोड़ने को एक गंभीर कानूनी अपराध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
निष्कर्ष: चेहरे बदले पर नहीं बदली फितरत
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शाहपुर का यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि यहां साल दर साल सिर्फ चेहरे बदले हैं (पंकज शरण से लेकर राम बहादुर वर्मा तक), लेकिन व्यवस्था के भीतर पनप रहा भ्रष्टाचार और 'सेटिंग' का खेल जस का तस है। बच्चों की सुरक्षा, उनके भोजन की गुणवत्ता और सरकारी टेंडरों में पारदर्शिता को ताक पर रखकर अधिकारी और बाबू अपनी जेबें भरने में मस्त हैं। ताजा टेंडर घोटाले के बाद अब यह देखना लाजमी होगा कि जिला प्रशासन इस बार कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करता है या फिर हर बार की तरह मामले को ठंडे बस्ते में दबा दिया जाएगा।











