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शाहपुर बीईओ कार्यालय पर 'प्रशासनिक गाज': सहायक आयुक्त के निरीक्षण में खुली अव्यवस्थाओं की पोल Educational Challenges, Human Rights Violations, Local Authority Accountability

  • May 6
  • 2 min read

बैतूल/शाहपुर | 06 मई 2026

शाहपुर ब्लॉक का शिक्षा विभाग इन दिनों चौतरफा विवादों और प्रशासनिक जांच के घेरे में है। बुधवार को जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त द्वारा विकासखंड शिक्षा कार्यालय (BEO) शाहपुर का किया गया औचक निरीक्षण इसी कड़ी का एक हिस्सा माना जा रहा है। कार्यालयीन कुप्रबंधन और गिरते शैक्षणिक स्तर के बीच हुए इस निरीक्षण ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


Educational Challenges, Human Rights Violations, Local Authority Accountability

Educational Challenges, Human Rights Violations, Local Authority Accountability

1. औचक निरीक्षण: रिकॉर्ड में भारी लापरवाही उजागर

सहायक आयुक्त ने बुधवार को बीईओ कार्यालय पहुंचकर रोकड़बही, सेवा अभिलेख एवं कर्मचारी उपस्थिति पंजी का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित गंभीर खामियां पाई गईं:

  • रिकॉर्ड के साथ खिलवाड़: सेवापुस्तिकाओं के प्रथम पृष्ठ (जहाँ जन्मतिथि अंकित होती है) पर अनिवार्य सेलो टेप नहीं पाया गया। इसे रिकॉर्ड सुरक्षा में बड़ी लापरवाही माना गया है।

  • अधूरे सेवा अभिलेख: कई कर्मचारियों के अवकाश लेख (Leave Records) अपूर्ण पाए गए, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को बल मिलता है।

  • अनुशासनहीनता: निलंबित कर्मचारियों के लिए निर्धारित मुख्यालय पर उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं थी। इस पर सहायक आयुक्त ने सख्त नाराजगी जताते हुए भविष्य में ऐसी लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी है।

2. बैकग्राउंड: गिरते परीक्षा परिणामों ने पहले ही खोली थी पोल

यह प्रशासनिक सख्ती उस समय आई है जब शाहपुर ब्लॉक एमपी बोर्ड सत्र 2025-26 के परिणामों में पिछड़ गया है। आंकड़ों के अनुसार, ब्लॉक की शैक्षणिक गुणवत्ता 'डेंजर ज़ोन' में है:

  • रेड जोन स्कूल: शासकीय हाईस्कूल ढोढरामऊ (27.58%) और डाबरी (30%) जैसे स्कूलों ने ब्लॉक की साख पर बट्टा लगाया है।

  • बीईओ की सीधी जवाबदेही: राज्य का औसत 73.42% होने के बावजूद शाहपुर का औसत मात्र 71.73% पर सिमट गया। जिन स्कूलों में नियमित प्राचार्य नहीं हैं, वहां बीईओ कार्यालय की मॉनिटरिंग पूरी तरह विफल साबित हुई है।

3. मानवाधिकार उल्लंघन: दिव्यांग शिक्षिका का मामला अब भी अनसुलझा

प्रशासनिक कुप्रबंधन के साथ-साथ बीईओ कार्यालय पर मानवीय संवेदनाओं की कमी के भी आरोप हैं। नया निशान गाँव की 80% दिव्यांग शिक्षिका के साथ हुए दुर्व्यवहार का मामला अभी भी ठंडा नहीं हुआ है।

  • कानूनी पेच: लगभग एक महिना बीत जाने के बाद भी आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 और ललिता कुमारी जजमेंट के तहत अनिवार्य एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है।

  • राजनीतिक चुप्पी: विदिशा विधायक के आश्वासनों के बावजूद कार्रवाई न होना, बीईओ के प्रशासनिक रसूख की ओर इशारा करता है।

4. कलेक्टर का 'एक्शन मोड' और भविष्य की कार्रवाई

इन तमाम विसंगतियों (प्रशासनिक लापरवाही, गिरते नतीजे और प्रताड़ना) पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने पहले ही विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे। सहायक आयुक्त का यह औचक निरीक्षण कलेक्टर के उसी कड़े रुख का परिणाम माना जा रहा है।

मुख्य प्रशासनिक प्रश्न:क्या केवल 'निर्देश' देने से उन स्कूलों का सुधार होगा जहां परिणाम 27% रहा है?सेवापुस्तिकाओं में सेलो टेप न होना क्या किसी बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा है?क्या प्रशासन एक दिव्यांग कर्मचारी को न्याय दिलाने में 'रसूखदारों' के आगे नतमस्तक है?

निष्कर्ष: सहायक आयुक्त के इस निरीक्षण ने शाहपुर बीईओ कार्यालय की अव्यवस्थाओं को दस्तावेजों में दर्ज कर लिया है। अब देखना यह है कि दोषी अधिकारियों पर केवल 'आपत्ति दर्ज' की जाती है या उन्हें पद से हटाकर व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन किया जाता है।

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