DRDO ने ड्रोन्स से दागी जाने वाली ULPGM-V3 मिसाइल के एयर-टू-ग्राउंड और एयर-टू-एयर ट्रायल्स सफलतापूर्वक पूरे किए DRDOInnovations, DefenseTechnology, DualStrikeCapability
- May 21
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नई दिल्ली: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल के पास अपनी टेस्ट रेंज में अनमैन्ड एरियल व्हीकल लॉन्च्ड प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल (ULPGM)-V3 के सभी डेवलपमेंट ट्रायल्स सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। यह मिसाइल ड्रोन्स (UAVs) से दागी जाने वाली एक बेहद सटीक गाइडेड मिसाइल है, जिसने हवा से जमीन (Air-to-Ground) और हवा से हवा (Air-to-Air) दोनों ही मोड में अपनी मारक क्षमता को साबित किया है।
इन ट्रायल्स के दौरान वेपन सिस्टम को कमांड और कंट्रोल करने के लिए एक आधुनिक इंटीग्रेटेड ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम (GCS) का इस्तेमाल किया गया, जो लॉन्च ऑपरेशन्स को पूरी तरह ऑटोमैटिक बनाने की तकनीक से लैस है। DRDOInnovations, DefenseTechnology, DualStrikeCapability

तकनीकी और मुख्य बिंदु:
दोहरी मारक क्षमता: हवा से जमीन (Air-to-Ground) मोड में यह मिसाइल एंटी-टैंक भूमिका निभाएगी, जबकि हवा से हवा (Air-to-Air) मोड में यह दुश्मन के ड्रोन्स, हेलीकॉप्टर्स और अन्य हवाई लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम है।
घरेलू औद्योगिक इकोसिस्टम: इस मिसाइल का उत्पादन पूरी तरह से भारतीय उद्योगों और बड़ी संख्या में एमएसएमई (MSMEs) के सहयोग से किया गया है। सफल परीक्षणों से यह पुष्टि हुई है कि देश में इसकी सप्लाई चेन अब बड़े पैमाने पर सीरियल मास प्रोडक्शन (Mass Production) के लिए पूरी तरह तैयार है।
प्रमुख सहयोगी और लैब्स: इस मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने नोडल लैब के रूप में DRDL (हैदराबाद), TBRL (चंडीगढ़) और HEMRL (पुणे) के साथ मिलकर विकसित किया है। उत्पादन के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और अडानी डिफेंस सिस्टम्स के साथ साझेदारी की गई है, जबकि ट्रायल्स के लिए इसे न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (बेंगलुरु) के ड्रोन्स पर इंटीग्रेट किया गया था।
वरिष्ठ अधिकारियों की प्रतिक्रिया: रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने इस सराहनीय उपलब्धि के लिए परीक्षण से जुड़ी सभी टीमों की सराहना की।












