कांग्रेस का हल्ला बोल दिव्यांग शिक्षिका पर दबाव बनाने का आरोप, विदिशा विधायक ने कहा- मामले को उच्च अधिकारीयों को भेज कार्यवाही करवाई जाएगी ! DisabilityRights, AdministrativeNegligence, LocalGovernance
- Apr 19
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शाहपुर ब्लॉक में 80% दिव्यांग शिक्षिका के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और बीईओ की तानाशाही के मामले में आज नए तथ्य सामने आए हैं। 'नया निशान' गाँव में की गई ग्राउंड रिपोर्टिंग से पता चला है कि पीड़ित शिक्षिका पर अब लगातार दबाव बनाया जा रहा है। एक तरफ जहाँ बैतूल जिले के स्थानीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, वहीं शिक्षिका के गृह जिले विदिशा के विधायक ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

नया निशान गाँव से ग्राउंड रिपोर्ट: "2-3 साल से झेल रहे हैं, अब अति हो चुकी है"
नया निशान गाँव में जब पीड़ित दिव्यांग शिक्षिका और उनके परिवार से संपर्क किया गया, तो उनका दर्द साफ छलक रहा था।
शिक्षिका का आरोप: शिक्षिका ने बताया कि बीईओ और उनके साथी कर्मचारियों द्वारा उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और इस मामले को दबाने के लिए कई गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
पति का बयान: महिला के पति ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा, "सर, हम पिछले 2-3 साल से ये सब झेल रहे हैं। अब अति हो चुकी है और ये बर्दाश्त के बाहर है।"
क्या कहता है दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016?
इस मामले में बीईओ और उनके साथियों की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPWD Act) का खुला उल्लंघन प्रतीत होता है जिसकी उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।
कठोर सजा का प्रावधान: इस कानून की धारा 92 के तहत, यदि कोई व्यक्ति किसी दिव्यांग को जानबूझकर सार्वजनिक या कार्यस्थल पर अपमानित करता है, डराता-धमकाता है या नीचा दिखाता है, तो यह एक संज्ञेय अपराध है।
जेल और जुर्माना: ऐसे मामलों में दोषियों को 6 महीने से लेकर 5 साल तक की जेल और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है। शिक्षिका की दिव्यांगता को लेकर अभद्र टिप्पणियां करना और उनके अधिकारों (जैसे अवकाश) से उन्हें वंचित करना इस अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई का आधार बनता है।
महिला प्रताड़ना और कार्यस्थल पर शोषण: एक और गंभीर अपराध
दिव्यांगता के साथ-साथ यह मामला एक महिला और 6 महीने के मासूम की माँ की मानसिक प्रताड़ना का भी है। कार्यस्थल पर किसी महिला कर्मचारी को इस हद तक परेशान करना कि वह आत्महत्या की चेतावनी देने पर मजबूर हो जाए, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महिलाओं के कार्यस्थल पर सुरक्षा से जुड़े कानूनों के तहत गंभीर अपराध है। एक माँ को उसके 'संतान पालन अवकाश' (CCL) से वंचित करना और व्यक्तिगत टिप्पणियां करना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, बल्कि मानसिक क्रूरता है। यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो दोषियों पर महिला प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का प्रयास करने जैसी संगीन धाराओं के तहत भी एफआईआर (FIR) दर्ज हो सकती है।
अधिकारियों और स्थानीय नेताओं की चुप्पी पर सवाल
दिनांक 16.04.2026 को ही इस अत्यंत संवेदनशील मामले में जब जिले के जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगने की कोशिश की गई, तो उनका रवैया बेहद निराशाजनक रहा:
सहायक आयुक्त, बैतूल: विवेक पांडेय से उनके मोबाइल नंबर (9303272071) पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
घोड़ाडोंगरी विधायक: श्रीमती गंगा सज्जन सिंह उइके से भी उनके नंबर (8815443949) पर चर्चा करने का प्रयास किया गया, पर उनकी तरफ से भी कोई जवाब नहीं मिला।
विदिशा विधायक मुकेश टंडन ने दिया साथ
स्थानीय प्रशासन की बेरुखी के बाद, जब शिक्षिका के गृह निवास (विदिशा) के विधायक मुकेश टंडन से इस विषय में चर्चा की गई, तो उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया।
कड़ी निंदा और आश्वासन: टंडन ने इस घटना की कड़ी निंदा की और आश्वासन दिया कि वह इस संदर्भ में वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर के कड़ी कार्रवाई करवाएंगे।
सबूत सौंपे गए: इस मामले से जुड़े तमाम सबूत और खबर की कॉपी विधायक के पीए को उनके नंबर (9826413377) पर उपलब्ध करा दी गई है।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें बैतूल कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे और विदिशा विधायक के हस्तक्षेप पर टिकी हैं। क्या अब बीईओ के "प्रशासनिक और राजनीतिक रसूख" को भेद कर एक दिव्यांग माँ को न्याय मिल पाएगा, या प्रशासन की चुप्पी किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार कर रही है?
Update: 1.पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष कांग्रेस (शाहपुर) पंडित नरेंद्र मिश्रा ने वर्तमान प्रशासनिक और राजनैतिक व्यवस्था को ध्वस्त होना बताया है उनका कहना है कि वर्तमान शासन में महिलाओं दबे कुचलों और, पीड़ितों की कोई सुनवाई नहीं है । महिला को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस हर संभव प्रयास करेगी ।
उपेंद्र (रिंकू वर्मा) नगर अध्यक्ष शाहपुर कांग्रेस : विकलांग महिला के खिलाफ की गई क्रूरता शासन का आईना है, आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो दोबारा ऐसी घटना न हो साथ ही अगर महिला को न्याय नहीं मिलता है तो हमारे द्वारा कलेक्टर एवं सहायक आयुक्त को मामले से अवगत कराते हुए कड़ी कार्यवाही की मांग की जाएगी ।











