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कैग (CAG) रिपोर्ट: केंद्र सरकार के 15 मंत्रालयों में 54,282 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाणपत्र (UC) लंबित CAGReport, GovtExpenditure, PublicFinance

  • Aug 7
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भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा संसद में पेश की गई वित्तीय लेखा-परीक्षण रिपोर्ट में केंद्र सरकार के 15 मंत्रालयों और विभागों में वित्तीय अनुपालन से जुड़ी कमियों को उजागर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक कुल 54,282.32 करोड़ रुपये की राशि से संबंधित 33,973 उपयोगिता प्रमाणपत्र (Utilization Certificates - UCs) जमा होना शेष हैं।

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उपयोगिता प्रमाणपत्र यह सुनिश्चित करने का प्राथमिक माध्यम हैं कि आवंटित सरकारी धन का उपयोग केवल उसी निर्धारित उद्देश्य के लिए हुआ है जिसके लिए उसे स्वीकृति दी गई थी। समय पर यूसी जमा न होना सामान्य वित्तीय नियमों का उल्लंघन है और इससे धनराशि के लक्षित उपयोग की निगरानी पर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और सवाल

कैग रिपोर्ट के आंकड़े सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता जितेंद (जीतू) पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कैग रिपोर्ट के मुख्य आंकड़ों को साझा करते हुए सरकार की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं:CAGReport, GovtExpenditure, PublicFinance

  • उन्होंने रेखांकित किया कि 15 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों में 33,973 यूसी लंबित हैं, जिनसे जुड़ी कुल राशि ₹54,282.32 करोड़ है।

  • उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि इनमें से ₹38,287.52 करोड़ की राशि पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2021-22 से 2023-24) की ही है।

  • पटवारी ने सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि जब सरकार स्वयं अपने खर्चों का समय पर हिसाब नहीं दे पा रही है, तो वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जा रही है।



वित्तीय नियमों का उल्लंघन और लंबित मामलों की स्थिति

कैग रिपोर्ट में इंगित किया गया है कि यह स्थिति सामान्य वित्तीय नियम (GFR), 2017 के नियम 238(1) और 238(2) के प्रावधानों के विपरीत है:

  • समय-सीमा नियम: नियमों के तहत अनुदान प्राप्त करने वाली संस्था को वित्तीय वर्ष समाप्त होने के 12 महीनों के भीतर उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।

  • कार्रवाई के प्रावधान: निर्धारित अवधि में यूसी प्रस्तुत न करने पर संबंधित मंत्रालय या विभाग उस संस्था को भविष्य में मिलने वाली वित्तीय सहायता या अनुदान से वंचित (ब्लैकलिस्ट) कर सकता है।

  • लंबित मामलों का इतिहास: कुल 33,973 लंबित यूसी में से 13,926 मामले (38,287.52 करोड़ रुपये) हालिया वित्तीय वर्षों (2021-22 से 2023-24) के हैं। हालांकि, सबसे पुराने लंबित मामलों का इतिहास वर्ष 1985-86 से जुड़ा पाया गया है।

सर्वाधिक प्रभावित मंत्रालय एवं विभाग

रिपोर्ट के अनुसार, लंबित राशियों में दो प्रमुख मंत्रालयों और विभागों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है:

  1. आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय: ₹18,272.91 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित।

  2. उच्च शिक्षा विभाग: ₹14,359.76 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा होना शेष।

अन्य संबंधित 13 मंत्रालय/विभाग: इसके अतिरिक्त कृषि एवं किसान कल्याण, आयुष, औषधि, संस्कृति, स्कूली शिक्षा, राजस्व, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, योजना, पोत परिवहन एवं जलमार्ग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, जनजातीय कार्य, और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भी इस सूची में शामिल हैं।CAGReport, GovtExpenditure, PublicFinance

संबंधित मंत्रालयों और विभागों का स्पष्टीकरण

कैग की ऑडिट आपत्तियों के जवाब में विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है:

  • सड़क परिवहन, योजना, स्वास्थ्य और पोत परिवहन मंत्रालय: इन्होंने सूचित किया है कि कार्यान्वयन एजेंसियों और संबंधित प्रभागों के साथ समन्वय बनाकर लंबित मामलों को कम करने की प्रक्रिया चालू है।

  • शिक्षा मंत्रालय: मंत्रालय ने बताया कि उपयोगिता प्रमाणपत्रों की निगरानी, ट्रैकिंग और त्वरित निष्पादित करने के लिए एक विशेष आईटी प्रणाली (IT System) विकसित की गई है।

  • संस्कृति, आयुष, जनजातीय कार्य और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय: इन मंत्रालयों ने बकाया यूसी की संख्या में कमी लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की बात कही है।

  • अन्य विभाग: शेष मंत्रालयों की ओर से रिपोर्ट तैयार होने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं की गई थी।

कैग ने सभी संबंधित मंत्रालयों को एक मजबूत एवं डिजिटल निगरानी ढांचा विकसित करने की सलाह दी है ताकि अनुदान प्राप्तकर्ता संस्थाएं समय-सीमा के भीतर उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर सकें।


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