BIS ने सहायक उत्पादों (Assistive Products) के लिए 6 नए भारतीय मानक जारी किए AssistiveTechnology, InclusiveDesign, ElderlySupport
- May 2
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नई दिल्ली(courtesy pib)। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने दिव्यांगजनों और बुजुर्गों की सुविधा के लिए छह महत्वपूर्ण सहायक उत्पादों (Assistive Products) के लिए नए मानक प्रकाशित किए हैं। यह पहल भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की 'नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल असिस्टिव प्रोडक्ट्स' (NLEAP) के तहत की गई है।
इन मानकों का मुख्य उद्देश्य देश में सहायक उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन सुनिश्चित करना है, ताकि ये अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप बन सकें।
प्रकाशित किए गए नए मानक:
एल्बो क्रचेस (IS 18558 Part 1): कोहनी के सहारे चलने वाली बैसाखियों के लिए सुरक्षा, एर्गोनॉमिक्स और प्रदर्शन के मानक तय किए गए हैं।
वॉकिंग स्टिक (IS 5145): लकड़ी, बेंत, एल्युमीनियम और प्लास्टिक से बनी छड़ियों के आकार, बनावट और मजबूती के लिए स्वदेशी मानक तैयार किए गए हैं।
तीन या अधिक पैरों वाली छड़ियाँ (IS 18558 Part 4): अधिक स्थिरता वाली छड़ियों के लिए मार्किंग, लेबलिंग और सुरक्षा मापदंड निर्धारित किए गए हैं।
टैक्टाइल गाइड मैप (IS 19189): दृष्टिबाधित लोगों के लिए सार्वजनिक स्थानों और इमारतों में स्पर्श-संवेदी मानचित्रों (Tactile Maps) के डिजाइन और डिस्प्ले के नियम तय किए गए हैं।
ब्रेल साइनबोर्ड (IS 19190): उपकरणों और साइनबोर्ड पर ब्रेल लिपि के उपयोग, उसके आकार और सामग्री के लिए मानक निर्धारित किए गए हैं।
पोर्टेबल रैम्प (IS 19631): व्हीलचेयर, स्ट्रोलर और अन्य पहिये वाले उपकरणों के लिए उपयोग होने वाले पोर्टेबल रैम्प के लिए विशिष्ट आवश्यकताएं तय की गई हैं।
AssistiveTechnology, InclusiveDesign, ElderlySupport
'सुगम्य भारत अभियान' को मिलेगा बल
BIS के अनुसार, इन मानकों के विकास से केंद्र सरकार के 'सुगम्य भारत अभियान' को मजबूती मिलेगी। इसका उद्देश्य दिव्यांगजनों के लिए सार्वभौमिक पहुंच (Universal Accessibility) सुनिश्चित करना है।
उद्योग और गुणवत्ता पर प्रभाव
ये मानक न केवल घरेलू निर्माताओं को गुणवत्ता सुधारने में मदद करेंगे, बल्कि भारतीय उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में निर्यात के योग्य भी बनाएंगे। मानकों में सुरक्षा के साथ-साथ उत्पाद के रख-रखाव और निर्माता द्वारा दी जाने वाली जानकारी को भी अनिवार्य किया गया है।
इन मानकों को तैयार करने वाली समिति में AIIMS दिल्ली, ICMR, ALIMCO और भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (जयपुर) जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल थे।


















