शाहपुर में जल संकट के बीच नगर परिषद की शर्मनाक मेहरबानी: प्यासी जनता की परवाह नहीं, ठेकेदार के स्वागत द्वार को चमका रही सरकारी फायर ब्रिगेड ( WaterCrisis, LocalCorruption, GovernanceAccountability)
- Jun 11
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अंधेरनगरी: बूंद-बूंद पानी को तरस रहे नगरवासी; जरूरतमंद वार्डों में टैंकर नहीं, लेकिन ठेकेदार के निर्माण कार्य के लिए खुला सरकारी पानी का खजाना।
बड़ा आरोप: स्वागत द्वार निर्माण में विद्युत कंपनी की मेन लाइन से सीधे कटिया डालकर बिजली चोरी की भी आशंका; वीडियो-तस्वीरें वायरल होने के बाद भड़का जनता का आक्रोश।
(शाहपुर/बैतूल): भीषण गर्मी और नौतपा के इस दौर में जहां शाहपुर नगर की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है, वहीं नगर परिषद की एक ऐसी कार्यप्रणाली सामने आई है जिसने पूरे महकमे को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। नगर में वर्तमान में एक से दो दिन के अंतराल पर पेयजल की आपूर्ति की जा रही है, जिससे नागरिकों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इस गंभीर संकट के बीच, नगर परिषद द्वारा आम जनता की प्यास बुझाने के बजाय सरकारी संसाधनों का उपयोग एक निजी ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
आपातकालीन सेवा का तमाशा: आग बुझाने वाली गाड़ी से धुल रहा स्वागत द्वार पूरा मामला गुरुवार को उस समय उजागर हुआ, जब नगर के बजरंग रोड पर बन रहे निर्माणाधीन स्वागत द्वार को नगर परिषद की फायर ब्रिगेड से धोए जाने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब जरूरतमंद और सूखे इलाकों में पानी के टैंकर भेजने के लिए नगर परिषद के पास संसाधन नहीं हैं, तब फायर ब्रिगेड जैसी अति-आवश्यक और आपातकालीन सेवा का इस्तेमाल ठेकेदार के निर्माण कार्य को चमकाने और साफ-सफाई के लिए क्यों किया जा रहा है?
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बिजली चोरी का भी गंभीर आरोप: मामला सिर्फ पानी के दुरुपयोग तक ही सीमित नहीं है। स्वागत द्वार का निर्माण कर रहे ठेकेदार के कर्मचारियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने निर्माण कार्य के संचालन के लिए विद्युत वितरण कंपनी की मेन लाइन (मुख्या धारा) में सीधे तार (कटिया) डालकर अवैध रूप से बिजली का उपयोग किया। सरेआम की जा रही इस बिजली चोरी पर भी स्थानीय अमला आंखें मूंदे बैठा रहा।
आक्रोशित जनता के तीखे सवाल: इस पूरे घटनाक्रम के बाद शाहपुर के नागरिकों ने सीधे मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) और जनप्रतिनिधियों को कटघरे में खड़ा करते हुए निम्नलिखित सवाल दागे हैं:
संसाधनों का दुरुपयोग क्यों?: जब जनता प्यासी है और जल संकट गहराया हुआ है, तो फायर ब्रिगेड का कीमती पानी निर्माण कार्य में क्यों बहाया जा रहा है?
ठेकेदार पर इतनी मेहरबानी क्यों?: क्या रसूखदार ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए परिषद के नियम-कायदों को ताक पर रख दिया गया है?
बिजली चोरी पर कार्रवाई कब?: सरेआम मेन लाइन से सीधे तार डालकर की जा रही बिजली चोरी पर विद्युत विभाग और नगर परिषद कब एक्शन लेगी?

प्रशासनिक चुप्पी पर उठ रहे सवाल: भीषण गर्मी में प्यासी जनता और ठेकेदार पर मेहरबानी के इस दोहरे मापदंड ने नगर परिषद शाहपुर के भ्रष्टाचार और वीआईपी कल्चर को उजागर कर दिया है। जागरूक नागरिकों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि इस गंभीर लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारी क्या कदम उठाते हैं या फिर हमेशा की तरह मामले पर पर्दा डाल दिया जाता है।











