top of page

मूंग की खरीदी को लेकर भारतीय किसान संघ का अनिश्चितकालीन आंदोलन, प्रशासन से मांगी भिक्षा AgriculturalCrisis, FarmersProtest, CropPricingIssues

Jul 8
2 min read

नर्मदापुरम्, — मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ का अनिश्चितकालीन आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। बुधवार को आंदोलनकारी किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुँचकर शासन और प्रशासन से भिक्षा मांगकर विरोध दर्ज कराया। हाथों में कटोरे लिए किसान भजन गाते हुए अधिकारियों के सामने आए और कहा कि जब तक सरकार मूंग की खरीदी की घोषणा नहीं करती, तब तक हमारे पेट पालने की जिम्मेदारी प्रशासन को निभानी होगी।

AgriculturalCrisis, FarmersProtest, CropPricingIssues

आंदोलन संयोजक ललित सिंह चौहान ने बताया कि किसान अपने खर्च से खाना बना रहे हैं, टेंट और कूलर लगाए गए हैं ताकि स्वास्थ्य पर असर न पड़े। लेकिन सरकार ने अब तक मूंग की खरीदी की घोषणा नहीं की है और दो महीने पहले बेचे गए गेहूं का भुगतान भी नहीं हुआ। चौहान ने कहा, “अब आंदोलन आगे बढ़ाने के लिए किसानों के पास पैसे नहीं हैं, इसलिए हमने भिक्षा मांगकर शासन

प्रशासन से सहयोग मांगा है।”AgriculturalCrisis, FarmersProtest, CropPricingIssues

संभागीय मंत्री देवेंद्र पटेल ने कहा कि किसान अन्नदाता और प्रजापालक है, जो समाज का पेट भरता है। लेकिन आज वही अन्नदाता अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए भी पैसे से वंचित है। उन्होंने कहा कि भुगतान न होने से किसान आंदोलन का खर्च भी नहीं उठा पा रहे हैं, इसलिए भिक्षा मांगना मजबूरी बन गया है।

जिला सहमंत्री रजत दुबे ने बताया कि किसानों ने गर्मी में मेहनत कर मूंग का बंपर उत्पादन किया है — प्रति एकड़ 4 से 5 क्विंटल तक। लेकिन सरकार ने उपार्जन की सीमा मात्र 1 क्विंटल 20 किलो तय की है, जिससे किसानों को औने-पौने दामों पर मंडी में बेचना पड़ेगा। मंडी भाव 4,500 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं, जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान होगा। दुबे ने कहा कि सरकार को तुरंत शत-प्रतिशत खरीदी की घोषणा करनी चाहिए।

आंदोलन में डोलरिया, नर्मदापुरम् और इटारसी के कार्यकर्ता शामिल रहे। संभागीय मंत्री देवेंद्र पटेल, जिला सहमंत्री रजत दुबे, आंदोलन संयोजक ललित सिंह चौहान, श्रीराम दुबे, डोलरिया तहसील अध्यक्ष बदामीलाल साध सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता धरना स्थल पर मौजूद रहे।

किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा। भिक्षा मांगने का यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन प्रशासन को यह संदेश देने के लिए था कि अन्नदाता भूखा है और उसकी मेहनत का उचित मूल्य उसे नहीं मिल रहा।



Top Stories

1/16
bottom of page