शाहपुर में टीईटी परीक्षा के खिलाफ शिक्षकों का प्रदर्शन:बोले- सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाए, ज्ञापन सौंपा
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शाहपुर ब्लॉक मुख्यालय पर शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शिक्षक संघर्ष संयुक्त मोर्चा के बैनर तले बड़ी संख्या में संविदा और नियमित शिक्षकों ने खेड़ापति मंदिर से रैली निकालकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शनकारी ‘टीईटी परीक्षा निरस्त करो’ लिखी तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ जंगी प्रदर्शन
चिलचिलाती धूप में शिक्षक हाथों में बैनर लेकर नारेबाजी करते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार टी वास्के को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों का कहना है कि वे सालों पहले प्रवेश परीक्षा पास करके विभाग में आए हैं, अब दशकों की सेवा के बाद दोबारा परीक्षा देना उनके साथ अन्याय और मानसिक प्रताड़ना है। शिक्षक संगठनों ने बताया कि हालिया आदेशों के अनुसार, आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी दो साल के भीतर टीईटी पास करना होगा। परीक्षा में फेल होने पर उन्हें नौकरी से निकालने का प्रावधान किया गया है। इसी कड़े नियम ने शिक्षकों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है। शिक्षकों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
पुराने आदेश निरस्त हों : लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी परीक्षा के आदेशों को तुरंत रद्द किया जाए।
अनुभव को मिले मान्यता : शिक्षकों का तर्क है कि 30-35 सालों का उनका अनुभव किसी भी परीक्षा से ज्यादा बड़ा है।
कानूनी राहत की मांग : प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाए और केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर सेवारत शिक्षकों को टीईटी से छूट दे।
वरिष्ठता का मुद्दा : नवीन संवर्ग के शिक्षकों को उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से ही वरिष्ठता दी जाए।











