दानवाखेड़ा का दर्द: स्वास्थ्य विभाग के 'रेस्क्यू' के बीच शासन की दो दशकों की नाकामी उजागर EmergencyResponse, BasicAmenities, HealthcareAccess
- Mar 19
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घोड़ाडोंगरी: जनपद के ग्राम दानवाखेड़ा में फैली बीमारी ने एक बार फिर जिला प्रशासन और शासन के उन दावों की पोल खोल दी है, जो विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं। जहाँ एक ओर CMHO डॉ. मनोज हुरमाड़े और BMO डॉ. शर्मा सूचना मिलते ही अपनी टीम के साथ लगातार गांव में डटे हुए हैं और स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दो मासूमों की मौत ने शासन की उदासीनता पर गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।

विभागीय तत्परता: संकट के बीच मैदान में अधिकारी
खबर मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने अपनी सक्रियता दिखाई है। BMO डॉ. शर्मा के नेतृत्व में मेडिकल टीम न केवल गांव में कैंप कर रही है, बल्कि खुद अधिकारी भी स्थिति की मॉनिटरिंग के लिए बार-बार गांव पहुँच रहे हैं।
इलाज जारी: खुजली (स्केबीज) और मौसमी बीमारियों से पीड़ित 28 मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
अस्पताल में निगरानी: 6 बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कर विशेष देखरेख दी जा रही है।
बचाव के प्रयास: पानी के क्लोरीनेशन और स्वास्थ्य जागरूकता के जरिए विभाग स्थिति को 'कंट्रोल' करने में जुटा है।
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प्रशासनिक विफलता: 20 साल से बुनियादी सुविधाओं का अकाल
स्वास्थ्य विभाग की इस भागदौड़ के बावजूद, असली सवाल जिला प्रशासन और शासन की कार्यप्रणाली पर खड़ा होता है। दानवाखेड़ा के ग्रामीण पिछले दो दशकों से आदिम युग जैसी परिस्थितियों में जीने को मजबूर हैं:
सड़क का अभाव: पक्की सड़क न होने से आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस और राहत कार्यों में भारी देरी होती है।
बिजली और पानी: साफ़ पीने का पानी और बिजली जैसी न्यूनतम जरूरतें भी आज तक इस गांव की दहलीज तक नहीं पहुँची हैं।
दो मासूमों की जान: प्रशासन की इसी अनदेखी की कीमत दो मासूम बच्चों (9 माह और 1 साल) को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
निष्कर्ष: केवल 'बैंड-एड' लगाने से नहीं चलेगा काम
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी निश्चित रूप से अपनी पूरी ऊर्जा के साथ गांव में राहत पहुंचा रहे हैं, लेकिन यह केवल एक 'तात्कालिक राहत' (First-aid) जैसा है। जब तक शासन गांव में सड़क, बिजली और शुद्ध पेयजल जैसी आधारभूत संरचनाएं विकसित नहीं करता, तब तक बीमारियों का यह तांडव और मासूमों की मौत का सिलसिला रुकना नामुमकिन है। प्रशासन की बीस साल की इस 'मौन अनदेखी' ने आज दानवाखेड़ा को एक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है।











