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बैतूल कांग्रेस में 'सर्जरी' की तैयारी: क्या 'निरंकुश' दिग्गजों के बीच सफल होंगे निलय डागा? LocalLeadership, CommunityChallenges, PoliticalDynamics

  • Apr 5
  • 3 min read

बैतूल। (EDITORIAL OPINION)एक ओर जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा संगठन को 'रीबूट' मोड पर डालकर गांव-गांव की खाक छान रहे हैं, तो दूसरी ओर उनके ही क्षेत्र के 'निरंकुश' नेता अपनी लापरवाही से पार्टी की जमीनी हकीकत को लहूलुहान कर रहे हैं। 5 से 7 अप्रैल तक चलने वाला डागा का यह तीन दिवसीय 'मैराथन' दौरा संगठन के लिए संजीवनी है या महज एक औपचारिकता, यह दानवाखेड़ा जैसी घटनाएं तय करेंगी।

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एक तरफ 'मिशन रीबूट', दूसरी तरफ 'मैदान में मातम'

जिला अध्यक्ष निलय डागा आज 5 अप्रैल से भैंसदेही, भीमपुर और शाहपुर के दौरे पर हैं। उनका लक्ष्य माइक्रो मैनेजमेंट के जरिए ब्लॉक और मंडल स्तर पर नई ऊर्जा फूंकना है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जिस संगठन को डागा 'आक्रामक' और 'मजबूत' बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उसी संगठन के जिम्मेदार पद पर बैठे राहुल उइके जैसे नेता पिछले ढाई साल से क्या कर रहे थे?

दानवाखेड़ा कांड: कांग्रेस की 'फोटो पॉलिटिक्स' की खुली पोल

घोड़ाडोंगरी क्षेत्र के दानवाखेड़ा गांव में दो मासूमों की मौत ने कांग्रेस के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। स्थानीय जनता के बीच तीखी चर्चा है कि:

  • ढाई साल का मौन: जनपद अध्यक्ष राहुल उइके सत्ता और संसाधनों पर काबिज रहने के बावजूद गांव में शुद्ध पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंचा सके?

  • विफलता का ढाल प्रशासन: आज जब मौतें हो गईं, तो उइके इसे 'प्रशासनिक विफलता' बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या जनपद के फंड का इस्तेमाल सिर्फ कागजों पर हुआ?

  • फोटो पॉलिटिक्स: ग्रामीणों का आरोप है कि जब तक बच्चे तड़प रहे थे, तब तक कोई कांग्रेसी नेता नहीं दिखा, लेकिन मौत के बाद संवेदना जताने की होड़ मच गई।

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दिग्विजय सिंह को 'गुमराह' करने वाला स्थानीय नेतृत्व

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दानवाखेड़ा मामले पर ट्वीट कर सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन शायद उन्हें यह नहीं बताया गया कि इस विफलता के पीछे खुद उनकी पार्टी के 'निरंकुश' जनप्रतिनिधि हैं। अगर स्थानीय स्तर पर कांग्रेस समर्थित जनपद अध्यक्ष सक्रिय होते, तो आज प्रशासन को रातों-रात हैंडपंप गाड़ने की नौबत नहीं आती। संसाधनों की कमी नहीं थी, बल्कि स्थानीय नेतृत्व की इच्छाशक्ति की कमी थी।



क्या सफल होंगे निलय डागा के प्रयास?

निलय डागा का दौरा कार्यक्रम और उनकी रणनीति निश्चित रूप से सराहनीय है। वे संगठन की नब्ज टटोलने निकले हैं, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी ही पार्टी के भीतर बैठे वे नेता हैं जो जनता के प्रति जवाबदेही से ज्यादा अपनी 'कुर्सी' और 'परिक्रमा' को महत्व देते हैं।

तिथि

स्थान/ब्लॉक

मुख्य उद्देश्य

5 अप्रैल

भैंसदेही, भीमपुर, दामजीपुरा

संगठन की स्थिति की सीधी समीक्षा

6 अप्रैल

शाहपुर, आमला

ब्लॉक, शहर और मंडल अध्यक्षों से संवाद

7 अप्रैल

बैतूल (जिला मुख्यालय)

अंतिम समीक्षा बैठक और रणनीति

बड़ा सवाल: निलय डागा की 'नई ऊर्जा' और 'माइक्रो मैनेजमेंट' तब तक बेअसर रहेगी, जब तक पार्टी में ऐसे निरंकुश और गैर-जिम्मेदार नेता बैठे हैं जो सिर्फ चुनाव के समय सक्रिय होते हैं। क्या डागा इन लापरवाह चेहरों पर नकेल कस पाएंगे? क्या वे उन नेताओं की जवाबदेही तय करेंगे जिनकी वजह से आज आदिवासी गांवों में मासूमों की जान जा रही है?

निष्कर्ष: बैतूल कांग्रेस को बाहरी विरोधियों से ज्यादा अपने भीतर के 'दीमक' से खतरा है। निलय डागा का प्रयास तभी सफल माना जाएगा जब वे 'फोटो पॉलिटिक्स' करने वाले नेताओं के बजाय वाकई जनता की सेवा करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे लाएंगे। वरना, यह दौरा भी पिछली कई बैठकों की तरह सिर्फ एक 'इवेंट' बनकर रह जाएगा।

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