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शाहपुर: अतिथि शिक्षकों का फूटा गुस्सा; आदिम जाति कल्याण विभाग की लापरवाही ने भविष्य किया अंधकारमय, आर-पार की लड़ाई का ऐलान!

  • Mar 1
  • 2 min read

शाहपुर | 1 मार्च 2026 शाहपुर ब्लॉक के सैकड़ों अतिथि शिक्षकों ने प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली और भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जनजातीय कार्य विभाग की 'ऑफलाइन' सुस्ती ने वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अजाक संघ के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपते हुए शिक्षकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके अनुभव के अंक स्कोर कार्ड में नहीं जुड़े, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।

प्रशासन की 'ऑफलाइन' सुस्ती और डिजिटल इंडिया का मजाक

एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर शाहपुर ब्लॉक का जनजातीय कार्य विभाग आज भी 'पाषाण काल' की ऑफलाइन कार्यप्रणाली में अटका हुआ है। अतिथि शिक्षक राधेश्याम बाकोरिया ने विभाग की पोल खोलते हुए बताया कि सालों से ईमानदारी से सेवा देने के बावजूद उनका रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज नहीं है। नतीजा यह है कि स्कोर कार्ड में उनके अनुभव के अंक 'शून्य' दिखाई दे रहे हैं, जिससे वे मेरिट सूची से बाहर हो गए हैं।

सौतेला व्यवहार: शिक्षा विभाग 'अपडेट', जनजातीय विभाग 'फ्लॉप'

शिक्षकों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके साथ खुला भेदभाव किया जा रहा है। अन्य ब्लॉकों में शिक्षा विभाग के अतिथि शिक्षकों का डेटा ऑनलाइन होने से उन्हें अनुभव के अंक मिल रहे हैं, लेकिन शाहपुर के जनजातीय कार्य विभाग के शिक्षक प्रशासनिक निकम्मेपन की बलि चढ़ रहे हैं।

28 फरवरी की डेडलाइन निकली, पर अधिकारी कुंभकर्णी नींद में!

शिक्षकों ने कड़े शब्दों में कहा कि पोर्टल पर ऑफलाइन क्लेम की अंतिम तिथि 28 फरवरी दर्ज थी, जो बीत चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन ने डेटा अपडेट करने की जहमत नहीं उठाई। इस लापरवाही ने योग्य शिक्षकों को मानसिक प्रताड़ना के दौर में धकेल दिया है।

"यह केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि हमारे हक पर डाका है। प्रशासन की इस नाकामी के कारण कई प्रतिभावान शिक्षक आज सड़क पर आने को मजबूर हैं।" — आक्रोशित अतिथि शिक्षक

भीड़ और 'आर-पार' का संकल्प

ज्ञापन सौंपने के दौरान नीरज वर्मा, कृष्णकांत मालवीय, पवन यादव, चंद्रभान सोलंकी, मनोज यादव और मीना वर्मा सहित सैकड़ों शिक्षकों ने हुंकार भरी। शिक्षकों का कहना है कि अब वे केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेंगे। यदि जल्द ही चयन प्रक्रिया को न्यायसंगत नहीं बनाया गया और स्कोर कार्ड में सुधार नहीं हुआ, तो शाहपुर प्रशासन को अतिथि शिक्षकों के प्रचंड विरोध का सामना करना पड़ेगा।

 
 

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