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विधायक डूंगरराम गेदर ने विधानसभा में 'विक्षुब्ध क्षेत्र विधेयक 2026' का किया पुरजोर विरोध; बताया सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा

  • Mar 7
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जयपुर/सूरतगढ़, 6 मार्च: राजस्थान विधानसभा में चर्चा के दौरान सूरतगढ़ विधायक श्री डूंगरराम गेदर ने "राजस्थान विक्षुब्ध क्षेत्र (स्थावर संपत्ति के अंतरण का प्रतिषेध और परिसरों से किरायेदारों को बेदखली से संरक्षण) विधेयक 2026" पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

मुख्य आपत्तियां और तर्क:

अस्पष्ट मापदंड: विधायक गेदर ने सरकार को घेरते हुए कहा कि विधेयक में किसी क्षेत्र को "विक्षुब्ध" घोषित करने के मापदंड स्पष्ट नहीं हैं। बिना ठोस आधार के प्रशासन को दिए गए ये व्यापक अधिकार भविष्य में मनमानी का कारण बन सकते हैं।

संवैधानिक अधिकारों का हनन: उन्होंने तर्क दिया कि संपत्ति के हस्तांतरण के लिए उपखंड अधिकारी (SDO) की पूर्व अनुमति अनिवार्य करना नागरिकों के मौलिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों में सीधा हस्तक्षेप है।

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की आशंका: श्री गेदर ने चिंता जताई कि "अनुचित सामूहिकीकरण" जैसे अस्पष्ट शब्दों के प्रयोग से प्रदेश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ेगा, जिससे व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

संवैधानिक मूल्यों की दुहाई: उन्होंने कहा कि यह विधेयक डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित समानता के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है और शांतिप्रिय राजस्थान को जाति-धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश है।

शायराना अंदाज में तीखा प्रहार:

सदन को संबोधित करते हुए श्री गेदर ने काव्य पंक्तियों के माध्यम से सरकार की मंशा पर सवाल उठाए:

"कलम की नोक से बस्ती का बंटवारा नहीं होगा,

इलाका अशांत कहकर हमारा-तुम्हारा नहीं होगा।"

निष्कर्ष:

विधायक ने स्पष्ट किया कि राजस्थान जैसे सद्भाव वाले प्रदेश में ऐसे विभाजनकारी कानूनों की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने सरकार से जनहित और सामाजिक एकता को सर्वोपरि रखते हुए इस विधेयक को तत्काल निरस्त करने का आग्रह किया।

 
 

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