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तमिलनाडु में बंधुआ बनाए गए बैतूल के 20 श्रमिक रेस्क्यू, रेलवे स्टेशन पर कलेक्टर-एसपी ने किया स्वागत

  • Mar 12
  • 2 min read

बैतूल | 12 मार्च 2026 तमिलनाडु के इरोड जिले में बंधुआ बनाकर रखे गए बैतूल जिले के 20 श्रमिकों को प्रशासन ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, जिला प्रशासन और वनवासी कल्याण आश्रम के समन्वित प्रयासों से इन श्रमिकों की घर वापसी संभव हो पाई। गुरुवार को बैतूल रेलवे स्टेशन पहुंचने पर कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी एवं पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने श्रमिकों का आत्मीय स्वागत किया।

होली पर छुट्टी मांगने पर बनाया था बंधुआ

जिला श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत ने बताया कि ये श्रमिक काम की तलाश में इरोड (तमिलनाडु) गए थे। होली के पर्व पर जब श्रमिकों ने घर जाने के लिए अवकाश मांगा, तो नियोक्ता ने उन्हें छुट्टी देने से मना कर दिया और उन्हें बंधुआ बनाकर कार्य कराने लगे। मामले की जानकारी मिलते ही बैतूल प्रशासन ने इरोड जिला प्रशासन से संपर्क साधा और पुलिस व राजस्व विभाग के समन्वय से सभी को मुक्त कराया।

आर्थिक सहायता और पुनर्वास की घोषणा

कलेक्टर श्री सूर्यवंशी ने स्टेशन पर श्रमिकों से सीधा संवाद किया और उन्हें शासन की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। प्रशासन द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

  • वित्तीय सहायता: प्रत्येक रेस्क्यू किए गए श्रमिक को 30-30 हजार रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता स्वीकृत की जाएगी।

  • सुरक्षित वापसी: रेलवे स्टेशन से श्रमिकों को उनके गृह ग्राम (भीमपुर ब्लॉक के काबरा, बोरकुंड, बीरपुरा और बासिंदा) तक पहुंचाने के लिए विशेष बसों और भोजन की व्यवस्था की गई।

  • सतत निगरानी: राजस्व, पुलिस और श्रम विभाग को निर्देशित किया गया है कि वे भविष्य में भी इन परिवारों के संपर्क में रहें ताकि उन्हें दोबारा ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

समन्वित प्रयास की सफलता

इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में वनवासी कल्याण आश्रम के जिला अध्यक्ष महेश्वर भलावी, एएसपी श्रीमती कमला जोशी, एसडीएम अभिजीत सिंह, और थाना प्रभारी नीरज पाल सहित अन्य अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कुल 24 श्रमिकों में से 20 बैतूल और 4 हरदा जिले के निवासी हैं, जिन्हें सुरक्षित उनके गंतव्य की ओर रवाना कर दिया गया है।

 
 

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