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जयपुर में राजस्थान राज्य स्तरीय वन्यजीव पुरस्कार समारोह: उदयपुर के दर्शन मेनारिया और फ्लाइंग स्क्वाड सम्मानित

  • Mar 23
  • 2 min read

जयपुर। राजस्थान के सबसे प्रतिष्ठित वन्यजीव पुरस्कारों का छठा संस्करण सोमवार को राजधानी के होटल आईटीसी राजपूताना में आयोजित किया गया। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (WWF) इंडिया और प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस गरिमामय समारोह में पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया।

उदयपुर के लिए दोहरी उपलब्धि

इस वर्ष का आयोजन उदयपुर जिले के लिए बेहद खास रहा, क्योंकि पहली बार दोनों प्रमुख श्रेणियों में पुरस्कार उदयपुर के नाम रहे।

वन्यप्राणी मित्र अवार्ड: उदयपुर के रामसर साइट मेनार के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् दर्शन मेनारिया को 'वन्यप्राणी मित्र पुरस्कार' से नवाजा गया। उन्हें यह सम्मान मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और सामुदायिक स्तर पर संरक्षण कार्यों के लिए दिया गया। पुरस्कार स्वरूप उन्हें प्रशस्ति पत्र और 50,000 रुपये की राशि प्रदान की गई।

मछली पुरस्कार: रणथंभौर की मशहूर बाघिन 'मछली' (T-16) की स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार इस बार वन विभाग उदयपुर (वन्यजीव मंडल) की फ्लाइंग स्क्वाड (उड़नदस्ता) टीम को मिला। टीम लीडर रेंज ऑफिसर सीताराम मीणा सहित अजीत सिंह राणावत, जितेंद्र सिंह, द्वारका प्रसाद शर्मा और अशोक नारायण जोशी को कुल 1.5 लाख रुपये (प्रत्येक को 30 हजार) और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

दिग्गज हस्तियों की रही मौजूदगी

समारोह में पर्यावरण जगत की कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं, जिनमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) पीके उपाध्याय, मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक के.सी.ए. अरुण प्रसाद, प्रभा खेतान फाउंडेशन की अपरा कुछल, और प्रसिद्ध पर्यावरणविद् हर्षवर्धन सिंह प्रमुख थे। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के स्टेट कॉर्डिनेटर अरुण सोनी ने बताया कि इन पुरस्कारों का उद्देश्य धरातल पर वन्यजीवों की रक्षा करने वाले लोगों का उत्साहवर्धन करना है।

अन्य जिलों के जांबाज भी हुए पुरस्कृत

कार्यक्रम के दौरान राज्य के अन्य हिस्सों से आए संरक्षणवादियों को भी सम्मानित किया गया:

राम लाल गुर्जर (रणथंभौर टाइगर रिजर्व)

अनीता कुमारी (कोटा)

पिरा राम (जालौर)

सरोज कुंवर (बूंदी)

अनिल विश्नोई (हनुमानगढ़)

यह पुरस्कार समारोह राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में काम करने वाले स्वयंसेवकों और वन विभाग के कर्मचारियों के अटूट साहस और समर्पण का प्रतीक बन गया है।

 
 

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