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मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की चुनौती: सारनी में तेंदुए की दस्तक, सुरक्षा और जागरूकता की दरकारWildlifeEncounters, HumanWildlifeConflict, LeopardSighting

  • Jan 20
  • 2 min read

सारनी (बैतूल)। प्रकृति और इंसानों के बीच का संतुलन ही एक सुरक्षित समाज की नींव है। हाल ही में सारनी क्षेत्र के ग्राम मोराढोंगरी में एक तेंदुए की सक्रियता देखी गई है, जिसने जंगल किनारे बंधे एक मवेशी को अपना प्राकृतिक आहार बनाया। यह घटना हमें याद दिलाती है कि जंगलों से सटे इलाकों में हमें वन्यजीवों के प्रति सजग और सुरक्षा नियमों के प्रति अनुशासित रहने की कितनी आवश्यकता है।

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कुदरती स्वभाव और शिकार की घटना

गुरुवार रात करीब 10:30 बजे, एक तेंदुए ने ग्रामीण मनोज पवार की बछिया का शिकार किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक 'सब-एडल्ट' तेंदुआ है जो अपने प्राकृतिक व्यवहार के तहत शिकार की तलाश में था। तेंदुए ने बछिया को शिकार बनाने के बाद उसे जंगल की ओर सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास किया। मौके पर मिले पगमार्क और अन्य साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि वन्यजीव अपनी प्राकृतिक सीमाओं के भीतर ही सक्रिय है।

वन विभाग और समाज की साझा जिम्मेदारी

सतपुड़ा बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष आदिल खान ने इस स्थिति पर संतुलित दृष्टिकोण साझा करते हुए बताया कि जब वन्यजीवों को आबादी के करीब आसानी से भोजन (खुले में बंधे मवेशी) उपलब्ध होता है, तो वे अनजाने में बस्तियों की ओर रुख करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि:

  • सुरक्षित बाड़े: मवेशियों को खुले में बांधने के बजाय मजबूत और बंद बाड़ों में रखना सबसे पहली सुरक्षा है।

  • सतर्कता ही बचाव: अंधेरे में अकेले बाहर निकलने से बचें और बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।

  • वन्यजीवों का सम्मान: तेंदुआ कोई अपराधी नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा है। उसे परेशान करना या उकसाना इंसानों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

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प्रशासनिक सक्रियता की अपील

आदिल खान ने वन विभाग से आग्रह किया है कि केवल मुनादी (घोषणा) करना पर्याप्त नहीं है। ग्रामीणों के मन से डर दूर करने और तेंदुए को वापस गहरे जंगल की ओर सुरक्षित रास्ता देने के लिए रात्रि गश्त और ट्रैप कैमरों के माध्यम से निगरानी बढ़ानी होगी।

क्यों जरूरी है वन्यजीवों का संरक्षण?

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि यदि कोई वन्यजीव इंसानों के साथ संघर्ष में आता है, तो अंततः उसका जीवन भी खतरे में पड़ जाता है। उसे रेस्क्यू कर पिंजरे में कैद करना पड़ता है, जिससे जंगल की जैव-विविधता प्रभावित होती है। प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि हम उन्हें डराने या उन पर हमला करने के बजाय, खुद को सुरक्षित रखने के तरीके अपनाएं।

वन विभाग अब मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर रहा है, लेकिन वास्तविक समाधान 'सावधानी' और 'समझदारी' में ही छिपा है।


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