सारनी: राख बाँध पर सोलर प्लांट का विरोध बना वन्यजीवों की जीत; तेंदुए की मौजूदगी ने की पुष्टि (WildlifeConservation SolarPlantDebate EnvironmentalVictory - GAMÁKI MEDIA)
सारनी: मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) के राख बाँध क्षेत्र में प्रस्तावित सोलर प्लांट को लेकर उठी आपत्ति अब वन्यजीव संरक्षण की एक बड़ी मिसाल बन गई है। जिस क्षेत्र को औद्योगिक उपयोग के लिए पुनः माँगा जा रहा था, वहां आज तेंदुए और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया है कि प्रकृति को बचाना क्यों ज़रूरी था।
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क्या है पूरा मामला?
सारनी स्थित राख बाँध की 106 हेक्टेयर भूमि को नियमों के तहत वृक्षारोपण के लिए वन विभाग को सौंपा गया था। वन विभाग ने वर्ष 2024-25 में यहाँ चरणबद्ध तरीके से लगभग 50,000 पौधों का रोपण किया, जिससे यह क्षेत्र एक समृद्ध वन्यजीव आवास (Habitat) में तब्दील हो गया। हालांकि, बाद में पावर कंपनी द्वारा इसी भूमि पर सोलर प्लांट लगाने की योजना बनाई गई और इसे वापस माँगा जाने लगा, जिसका कड़ा विरोध हुआ।
वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट आदिल खान की मुहिम
इस मामले में सारनी के वन्यजीव विशेषज्ञ और एक्टिविस्ट आदिल खान ने मोर्चा संभाला। उन्होंने स्थानीय स्तर पर और फिर मार्च 2024 में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह क्षेत्र सतपुड़ा–मेलघाट टाइगर कॉरिडोर के अत्यंत निकट है और यहाँ लकड़बग्घा, सियार, साही और रेड मुनिया जैसे सैकड़ों पक्षी निवास करते हैं। उनका तर्क था कि सोलर प्लांट की गर्मी और मानवीय दखल से न केवल जैव-विविधता नष्ट होगी, बल्कि टाइगर कॉरिडोर भी प्रभावित होगा।
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संरक्षण की जीत: प्रत्यक्ष दिखा तेंदुआ
तथ्यों और आपत्तियों को देखते हुए प्रशासन ने यह भूमि सोलर प्लांट के लिए वापस नहीं सौंपी और यह वन विभाग के संरक्षण में ही रही। इस संघर्ष की सफलता तब प्रमाणित हुई, जब हाल ही में रविवार रात आदिल खान को इसी राख बाँध क्षेत्र में एक वयस्क तेंदुआ दिखाई दिया। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि यह क्षेत्र अब वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित शरणस्थली बन चुका है।
आदिल खान का कथन:
"राख बाँध में वन्यजीव पहले से थे, लेकिन वन विभाग के वृक्षारोपण ने इसे और अधिक अनुकूल बनाया। यदि समय रहते आपत्ति नहीं ली जाती, तो आज यहाँ न तेंदुआ होता और न ही पक्षियों की यह विविधता। जंगलों और घासभूमियों को बचाना पर्यावरण संतुलन के लिए अनिवार्य है।"
पर्यावरण और स्थानीय निवासियों को लाभ
सोलर प्लांट का प्रोजेक्ट रुकने से न केवल वन्यजीवों का घर बचा, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को भी राख के प्रदूषण से राहत मिली है। यह पूरी घटना विकास और प्रकृति के बीच सही संतुलन चुनने की एक प्रेरणादायक कहानी है।











