top of page

इंसान और वन्यप्राणी संघर्ष: भौंरा रेंज में मासूम पर हमला, सुरक्षा और संरक्षण की चुनौती बढ़ी WildlifeConflict, ChildSafety, ForestEncounters

  • Jan 17
  • 2 min read

शाहपुर (बैतूल): उत्तर वनमंडल की भौंरा रेंज में शुक्रवार शाम एक ऐसी घटना सामने आई जो एक बार फिर इंसान और वन्यप्राणी के बीच बढ़ते संघर्ष की ओर इशारा करती है। एक 4 वर्षीय बालक पर अज्ञात वन्यप्राणी के हमले ने जहाँ ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है, वहीं वन विभाग के लिए यह वन्यजीव संरक्षण और मानवीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती बन गया है।

WildlifeConflict, ChildSafety, ForestEncounters

घटना का विवरण और त्वरित उपचार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 7 बजे आर्यन उइके (4 वर्ष) अपने पिता के साथ घर के समीप था, तभी एक अज्ञात वन्यप्राणी ने उस पर झपट्टा मारा। पिता के साहस और सूझबूझ से वन्यप्राणी तुरंत जंगल की ओर लौट गया। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे को जिला अस्पताल बैतूल ले जाया गया और अब वह पूरी तरह सुरक्षित है। बेहतर निगरानी के लिए उसे भोपाल रेफर किया गया है।WildlifeConflict, ChildSafety, ForestEncounters

दहशत नहीं, सावधानी और संरक्षण की ज़रूरत

वन विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि रिहायशी इलाकों का जंगल की ओर विस्तार और प्राकृतिक आवासों में इंसानी दखल के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदुए की मौजूदगी की खबरें पिछले एक माह से मिल रही हैं। इसे महज़ "आतंक" कहना गलत होगा, बल्कि यह वन्यप्राणियों के भटकने का मामला है।

WildlifeConflict, ChildSafety, ForestEncounters

STR की विशेषज्ञ टीम और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

तेंदुए या अन्य वन्यप्राणी की सटीक पहचान और उसे सुरक्षित रूप से वापस जंगल में भेजने के लिए सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व (STR) की प्रशिक्षित टीम की सहायता ली जा रही है।

  • एसडीओ फॉरेस्ट उत्तम सिंह सत्तया ने बताया कि प्राथमिकता बच्चे की सुरक्षा और वन्यप्राणी को बिना नुकसान पहुँचाए उसे उसके प्राकृतिक रहवास तक पहुँचाना है।

  • रेंजर बृजेन्द्र तिवारी के अनुसार, टीम लगातार निगरानी कर रही है ताकि ग्रामीणों और वन्यजीवों के बीच दोबारा ऐसी मुठभेड़ न हो।

प्रशासन और ग्रामीणों की साझी जिम्मेदारी

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा के कड़े इंतजामों की मांग की है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि वन्यप्राणी अपनी प्रकृति के अनुसार व्यवहार कर रहे हैं। ऐसे में रात के समय घरों से बाहर निकलने पर सावधानी बरतने और बच्चों की सुरक्षा के लिए सामूहिक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।

Top Stories

bottom of page