सारनी के वार्ड-28 में अज्ञात वन्यजीव का हमला: 8 बकरियों की मौत(Wildlife Attack Sarani Incident: Animal Safety Tips - GAMÁKI MEDIA)
सारनी (मध्य प्रदेश): नगरपालिका सारनी के वार्ड क्रमांक 28 में बुधवार की दरमियानी रात एक अज्ञात वन्यजीव के हमले से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। इस घटना में पशुपालक दीनू गोहे की आठ बकरियों और एक मुर्गी की जान चली गई, जबकि दो अन्य बकरियाँ गंभीर रूप से घायल हैं। क्षेत्र के रिहायशी इलाके से सटे वन क्षेत्र के कारण अक्सर वन्यजीवों का मूवमेंट बना रहता है, जिसके चलते यह दुखद घटना घटित हुई।

सारनी (मध्य प्रदेश): नगरपालिका सारनी के वार्ड क्रमांक 28 में बुधवार की दरमियानी रात एक अज्ञात वन्यजीव के हमले से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। इस घटना में पशुपालक दीनू गोहे की आठ बकरियों और एक मुर्गी की जान चली गई, जबकि दो अन्य बकरियाँ गंभीर रूप से घायल हैं। क्षेत्र के रिहायशी इलाके से सटे वन क्षेत्र के कारण अक्सर वन्यजीवों का मूवमेंट बना रहता है, जिसके चलते यह दुखद घटना घटित हुई।
घटना का विवरण और प्रशासनिक कार्रवाई
घटना की जानकारी गुरुवार सुबह मिलते ही वार्ड पार्षद बेबी बिंझाड़े ने तत्परता दिखाते हुए वन विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन को सूचित किया। सूचना मिलते ही वन विभाग का दल मौके पर पहुँचा और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए।
पशु चिकित्सालय पाथाखेड़ा की डॉ. कीर्ति ठाकुर ने घटनास्थल पर पहुंचकर मृत पशुओं का विधिवत पोस्टमार्टम किया। वन विभाग ने आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने के उपरांत दोपहर में मृत पशुओं का नियमानुसार अंतिम संस्कार करवाया।
विशेषज्ञों का विश्लेषण: सुरक्षा को लेकर चिंता
सतपुड़ा बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष एवं वन्यजीव विशेषज्ञ आदिल खान ने भी प्रभावित स्थल का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि पीड़ित का घर घने वन क्षेत्र की सीमा से लगा हुआ है। अक्सर देखा गया है कि रिहायशी इलाकों के करीब होने के कारण वन्यजीव शिकार की तलाश में बाड़ों तक पहुँच जाते हैं।
अधिकारियों एवं विशेषज्ञों का मत:
डॉ. कीर्ति ठाकुर (पशु चिकित्सक): "हमले की प्रकृति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि किसी हिंसक अज्ञात जीव ने बकरियों को निशाना बनाया है। मृत बकरियों की पसलियाँ टूटी हुई थीं और उनके शरीर पर गहरे घाव के निशान पाए गए हैं। इनमें चार वयस्क और चार छोटे मेमने शामिल हैं। फिलहाल गंभीर रूप से घायल दो बकरियों का उपचार जारी है।"
आदिल खान (अध्यक्ष, सतपुड़ा बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन सोसाइटी): "सारनी का भौगोलिक ढांचा ऐसा है कि यहाँ बस्तियाँ जंगल के काफी करीब हैं। ऐसे में पशुपालकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। रात के समय पशुओं को ऐसे बाड़ों में रखें जो पूरी तरह से ढके और सुरक्षित हों। एक महत्वपूर्ण सुझाव यह भी है कि बाड़े के भीतर पशुओं को रस्सी से न बाँधें, ताकि किसी हमले की स्थिति में वे भाग सकें या अपना बचाव करने का प्रयास कर सकें।"
मुआवजे की उम्मीद
इस घटना से गरीब पशुपालक दीनू गोहे को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। स्थानीय पार्षद और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नियमों के तहत पशुपालक को उचित आर्थिक मुआवजा जल्द से जल्द प्रदान किया जाए ताकि उन्हें राहत मिल सके।











