बैतूल: पेयजल संकट और विकास पर आर-पार; लापरवाही पर नपेंगे ठेकेदार, लैंडबैंक और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा WaterCrisisManagement, InfrastructureDevelopment, DistrictDevelopment
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बैतूल | 13 अप्रैल 2026
सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य रूप से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपत्तियां उईके, विधायक हेमंत खंडेलवाल, महेंद्र सिंह चौहान, चंद्रशेखर देशमुख, योगेश पंडाग्रे, गंगाबाई उईके, जिला विकास सलाहकार समिति सदस्य सुधाकर पवार और कलेक्टर सौरभ संजय सोनवणे सहित तमाम जिला अधिकारी मौजूद रहे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा गर्मी में संभावित जल संकट का प्रबंधन और जिले के विकास कार्यों की गति बढ़ाना था।

पेयजल प्रबंधन: गुणवत्ता से समझौता नहीं, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
मंत्री संपत्तियां उईके ने नल-जल योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी अधूरे कार्य समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि:
योजनाओं के पूर्ण होने के बाद भौतिक सत्यापन अनिवार्य है, इसके बाद ही इन्हें पंचायतों को सौंपा जाए।
रखरखाव के लिए पीएचई (PHE) विभाग तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।
सड़क रेस्टोरेशन (मरम्मत) का कार्य ठेकेदार को समय पर करना होगा, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जल संकट के त्वरित समाधान के लिए विधायक हेमंत खंडेलवाल ने एक समर्पित व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का सुझाव दिया, जिसे पीएचई विभाग द्वारा संचालित किया जाएगा। इस ग्रुप के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। गिरते जलस्तर वाले गांवों में प्राथमिकता से हैंडपंप और ट्यूबवेल खनन के निर्देश भी दिए गए।
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लैंडबैंक और पर्यटन: रोजगार के नए अवसर
जिले में औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए हेमंत खंडेलवाल ने लैंडबैंक विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने प्रशासन और वन विभाग को निर्देश दिए कि:
उद्योग, मंडी, डैम और अन्य विकास कार्यों के लिए भूमि का चिन्हांकन कर लैंडबैंक बढ़ाया जाए।
ताप्ती कंजर्वेशन फॉरेस्ट में बटरफ्लाई पार्क, ग्रासलैंड विकास और होमस्टे जैसी पर्यटन गतिविधियों को शुरू किया जाए, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सके।
सिंचाई और क्षेत्रीय परियोजनाएं: ढहकना और घोघरी पर मंथन
बैठक में सिंचाई के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि के रूप में ढहकना वृहद परियोजना की स्वीकृति की जानकारी दी गई। इससे आठनेर, भीमपुर, चिचोली और शाहपुर क्षेत्र के सैकड़ों गांव लाभान्वित होंगे। साथ ही घोघरी परियोजना के डूब क्षेत्र और लाभान्वित गांवों के पुनर्निर्धारण पर भी चर्चा हुई।
विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रमुख समस्याएं रखीं:
आमला और मुलताई: बैराज निर्माण की मांग।
घोड़ाडोंगरी: सुखी नदी पर बैराज का प्रस्ताव।
भैंसदेही: मेडा जलाशय प्रभावितों का मुआवजा और गन्ना किसानों का पंजीयन।
अतिक्रमण पर प्रहार: संयुक्त टीम करेगी कार्रवाई
नगरीय प्रशासन की समीक्षा के दौरान अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए सख्त रुख अपनाया गया। कलेक्टर को निर्देश दिए गए कि एसडीएम, तहसीलदार और सीएमओ (CMO) की एक संयुक्त टीम गठित कर अभियान चलाया जाए। अतिक्रमण हटाने के बाद उन स्थानों पर स्थायी चिन्हांकन (Boundary) करने को कहा गया ताकि दोबारा कब्जा न हो सके।
सड़क और वन विभाग का समन्वय
वन विभाग से संबंधित अनापत्ति प्रमाण पत्रों (NOC) और वन विस्थापन के लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के कार्यों को लेकर निर्देश दिए गए कि सड़कों के मेंटेनेंस पर विशेष ध्यान दिया जाए और स्वीकृत कार्यों को जल्द से जल्द शुरू किया जाए।
निष्कर्ष: प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की इस बैठक ने साफ कर दिया है कि जिले के विकास में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे ऊपर होगी। जल संकट को लेकर सरकार 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है।











