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बैतूल: दूषित पानी पीने से 2 आदिवासी बच्चों की मौत, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप WaterCrisis, RuralNeglect, HealthHazard

  • Jan 24
  • 2 min read

बैतूल, 21 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के आदिवासी बाहुल्य गांव दानवाखेड़ा में सरकारी तंत्र की बड़ी लापरवाही सामने आई है। दूषित पानी के सेवन से गांव के दो मासूम बच्चों की जान चली गई है, जबकि सैकड़ों ग्रामीण और बच्चे पिछले दो महीनों से गंभीर 'खुजली' के प्रकोप से जूझ रहे हैं।

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प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोश

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को दिसंबर की शुरुआत में ही इस समस्या से अवगत कराया गया था। अधिकारियों ने गांव का दौरा कर जल्द हैंडपंप लगवाने का आश्वासन भी दिया था। प्रशासन की शर्त पर ग्रामीणों ने श्रमदान कर ट्रक पहुंचने के लिए रास्ता भी तैयार किया, लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी अब तक खुदाई शुरू नहीं हुई है।

संगठनों ने घेरा कलेक्ट्रेट

20 जनवरी को श्रमिक आदिवासी संगठन और समाजवादी जन परिषद (सजप) के नेतृत्व में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल उप जिला पंचायत अधिकारी और अतिरिक्त कलेक्टर से मिला।

  • राजेंद्र गढ़वाल (श्रमिक आदिवासी संगठन): उन्होंने बताया कि आश्वासन के बावजूद प्रशासन वन विभाग की अनुमति का बहाना बनाकर टालमटोल कर रहा है, जबकि गांव में बीमारी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

  • अनुराग मोदी (सजप): उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तुरंत साफ पानी की व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले महीनों में यह स्थिति किसी भयंकर महामारी का रूप ले सकती है।

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बुनियादी सुविधाओं से महरूम है दानवाखेड़ा

यह गांव आज के दौर में भी विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में न तो आंगनवाड़ी है, न स्कूल, न सड़क और न ही बिजली की व्यवस्था। स्वास्थ्य सेवाओं का हाल यह है कि यहाँ किसी नर्स या डॉक्टर का दौरा तक नहीं होता।

ग्रामीणों ने जिला पंचायत सीईओ को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द हैंडपंप खुदाई और बीमार बच्चों के समुचित इलाज की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या कागजी कार्रवाई के बीच और मासूमों की जान जोखिम में डाली जाएगी।

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