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साहित्य समाज की चेतना का संवाहक है: राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया VasantPanchami, LiteraryFestival, CulturalCelebration

  • Jan 25
  • 2 min read

उदयपुर। राजस्थान साहित्य अकादमी के सभागार में वसंत पंचमी के पावन अवसर पर राज्य स्तरीय सम्मान समारोह एवं 'वसंतोत्सव' काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राजस्थान साहित्य अकादमी, युगधारा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था (उदयपुर) और केसर देवी जानी स्मृति संस्थान (बड़ीसादड़ी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

साहित्य और मूल्यों पर चर्चा

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद श्री चुन्नीलाल गरासिया ने अपने संबोधन में कहा, "साहित्य केवल शब्दों की साधना नहीं, बल्कि समाज की चेतना का संवाहक होता है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक आत्मा को जीवित रखते हैं और नई पीढ़ी को नैतिक मूल्यों से जोड़ते हैं।"

समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार योगेशचंद्र जानी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण ‘जुगनू’ और अकादमी के सचिव डॉ. बसंत सिंह सोलंकी उपस्थित रहे। डॉ. जुगनू ने साहित्य और इतिहास के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्य के बिना इतिहास अधूरा है।

VasantPanchami, LiteraryFestival, CulturalCelebration

प्रतिभाओं का सम्मान और पुस्तक लोकार्पण

संस्थापक ज्योतिपुंज के अभिनंदन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस अवसर पर मानवीय संवेदनाओं और विशिष्ट योगदान के लिए पांच विभूतियों को सम्मानित किया गया:

  • डॉ. गरिमा भाटी ‘गौरी’ (फरीदाबाद)

  • चक्रवर्ती लखावत (अजमेर)

  • शोभा ठाकुर (जयपुर)

  • डॉ. बसंत सिंह सोलंकी (उदयपुर)

  • अरविंद सिंह शक्तावत (बड़ीसादड़ी)

इन सभी को स्मृतिचिह्न, सम्मानपत्र, शॉल और पगड़ी भेंट कर नवाजा गया। इसी क्रम में वरिष्ठ लेखिका डॉ. विजयलक्ष्मी नेनावटी की पुस्तक ‘संस्कृति की सौरभ’ का लोकार्पण भी किया गया।

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राष्ट्रभक्ति और काव्य का संगम

वंदे मातरम् की 150वीं जयंती और नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में पूरा सदन सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ गान से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में आयोजित काव्य गोष्ठी में राजस्थान के विभिन्न कोनों से आए लगभग 125 साहित्यकारों ने अपनी ओजपूर्ण और संवेदनशील रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आयोजन की मुख्य कड़ियाँ

  • स्वागत उद्बोधन: युगधारा अध्यक्ष किरण बाला ‘किरन’ ने संस्था के 35 वर्षों के सफर और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

  • संचालन: डॉ. सिम्मी सिंह, दीपा पंत ‘शीतल’ और कृष्णार्जुन पार्थभक्ति ने संयुक्त रूप से प्रभावी संचालन किया।

  • आभार प्रदर्शन: राजस्थान साहित्य अकादमी की ओर से राजेश मेहता ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस गरिमामय आयोजन में प्रकाश तातेड, लोकेश चौबीसा, ब्रजराज सिंह जगावत, हेमेंद्र जानी ‘गोपाल’ सहित कई गणमान्य साहित्यप्रेमी और रचनाकार उपस्थित रहे।

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