उदयपुर: आंगनबाड़ी केंद्र पर अन्नप्राशन संस्कार संपन्न, 'जल, जमीन और हवा' के संरक्षण का दिया संदेशUdaipurEvents, ChildNutrition, EnvironmentalAwareness
उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर जिले के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र रूपावतफला (टेकण) में जतन सेवा संस्थान के सहयोग से अन्नप्राशन संस्कार कार्यक्रम गरिमापूर्ण तरीके से आयोजित किया गया। इस अवसर पर बच्चों के प्रथम आहार के साथ-साथ प्रकृति के आधार स्तंभों—जल, जमीन और हवा के महत्व पर विशेष चर्चा की गई।

संस्कार और पोषण का संगम
सनातन धर्म के 16 संस्कारों में से एक 'अन्नप्राशन' के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि शिशु के लिए प्रथम छह माह तक केवल माता का दूध ही सर्वोत्तम आहार है। इसके पश्चात ही ऊपरी आहार की शुरुआत की जानी चाहिए। कार्यक्रम के दौरान नौनिहाल बच्चों का अन्नप्राशन कराकर उनके बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
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पर्यावरण संरक्षण पर विशेष वार्ता
जतन सेवा संस्थान के क्लस्टर प्रतिनिधि निशीथेश्वर चौबीसा ने उपस्थित ग्रामीणों और धात्री माताओं को संबोधित करते हुए जल, जमीन और हवा को जीवन के तीन मुख्य आधार स्तंभ बताया। उन्होंने पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखने में इनकी भूमिका पर जोर देते हुए कहा:
जल: यह जीवन का अमृत है और समस्त जैविक क्रियाओं का आधार है।
जमीन: यह हमें निवास और पोषण (कृषि) प्रदान करती है।
हवा: वायुमंडल से मिलने वाली ऑक्सीजन ही श्वसन का आधार है।
उन्होंने समझाया कि जल चक्र, भूजल स्तर और जलवायु संतुलन इन तीनों के आपसी तालमेल पर निर्भर करता है। वर्तमान में हो रहे जलवायु परिवर्तन के खतरों से बचने के लिए इनका संरक्षण पर्यावरण और अर्थव्यवस्था, दोनों के लिए अनिवार्य है।
कार्यक्रम का विवरण
आंगनबाड़ी केंद्र पर पधारे अतिथियों और लाभार्थियों का स्वागत कार्यकर्ता ममता मेघवाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ईश वन्दना के साथ हुआ। अंत में जतन सेवा संस्थान के निशीथेश्वर चौबीसा ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त कर कार्यक्रम का समापन किया।











